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बीएचयू में नियुक्तियों पर कुलपति को निर्णय लेने का आदेश
Updated Wed, 04 Jul 2018 08:00 PM IST
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बीएचयू में नियुक्तियों पर कुलपति को निर्णय लेने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। बनारस हिंदू विश्वविद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने मामला कुलपति के पास भेज दिया है। कुलपति से कहा है कि वह याचीगण के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार दो माह में निर्णय लें। व्यंकटेश सिंह, डॉ. अंगद कुमार सिंह और डॉ. राजीव प्रताप सिंह की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति इफाकत अली खान ने सुनवाई की।
बीएचयू के अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह का कहना था कि याचिका में उठाई गईं आपत्तियां कुलपति की जानकारी में पहले से ही हैं और वह उन पर विचार कर रहे हैं। यदि याचीगण याचिका में उठाए गए वैधानिक पहलुओं को कुलपति के समक्ष उठाते हैं तो कुलपति उस पर भी विचार करने को तैयार हैं। बीएचयू के अधिवक्ता के इस आश्वासन के बाद कोर्ट ने याचिकाएं यह कहते हुए निस्तारित कर दीं कि याचीगण अपना प्रत्यावेदन कुलपति को दें, जिसमें वह अपने सभी मुद्दों को उठा सकते हैं। कुलपति को निर्देश दिया है कि वह याचीगण के प्रत्यावेदन पर दो माह में उपयुक्त निर्णय लें।
कोर्ट का कहना था कि चूंकि कुलपति पहले से इस मामले को देख रहे हैं, इसलिए इस पर भी विचार करें। याचिका में पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। कहा गया कि उन नियुक्तियों में योग्यता की अनदेखी की गई और मनमाने तरीके से कम योग्यता वाले लोगों का चयन कर लिया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। बनारस हिंदू विश्वविद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने मामला कुलपति के पास भेज दिया है। कुलपति से कहा है कि वह याचीगण के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार दो माह में निर्णय लें। व्यंकटेश सिंह, डॉ. अंगद कुमार सिंह और डॉ. राजीव प्रताप सिंह की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति इफाकत अली खान ने सुनवाई की।
बीएचयू के अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह का कहना था कि याचिका में उठाई गईं आपत्तियां कुलपति की जानकारी में पहले से ही हैं और वह उन पर विचार कर रहे हैं। यदि याचीगण याचिका में उठाए गए वैधानिक पहलुओं को कुलपति के समक्ष उठाते हैं तो कुलपति उस पर भी विचार करने को तैयार हैं। बीएचयू के अधिवक्ता के इस आश्वासन के बाद कोर्ट ने याचिकाएं यह कहते हुए निस्तारित कर दीं कि याचीगण अपना प्रत्यावेदन कुलपति को दें, जिसमें वह अपने सभी मुद्दों को उठा सकते हैं। कुलपति को निर्देश दिया है कि वह याचीगण के प्रत्यावेदन पर दो माह में उपयुक्त निर्णय लें।
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कोर्ट का कहना था कि चूंकि कुलपति पहले से इस मामले को देख रहे हैं, इसलिए इस पर भी विचार करें। याचिका में पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। कहा गया कि उन नियुक्तियों में योग्यता की अनदेखी की गई और मनमाने तरीके से कम योग्यता वाले लोगों का चयन कर लिया गया।
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