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जांच के चक्कर में फंसा आरओ-एआरओ का परिणाम
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:10 AM IST
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जांच के चक्कर में फंसा आरओ-एआरओ का परिणाम
शासन का दबाव कि जल्द जारी करें रिजल्ट, पर विवाद बरकरार
यूपीपीएससी भी परिणाम को लेकर स्पष्ट नहीं का पा रहा स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में तमाम पुराने परिणाम लंबित पड़े हैं। शासन का दबाव है कि आयोग लंबित परिणाम जल्द जारी कर लेकिन उनको लेकर विवाद अब तक बरकरार है। पीसीएस मुख्य परीक्षा का परिणाम तो जारी करने की तैयारी हो गई है लेकिन समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2016 के परिणाम को लेकर आयोग ने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 27 नवंबर 2016 को आयोजित की गई थी। इसमें तकरीबन दो लाख 32 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। यह परीक्षा 361 पदों के लिए दो पालियों में हुई थी। परीक्षा का पहला पेपर व्हाट्स ऐप पर वायर हो गया था। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपने स्तर पर तो कोई कार्रवाई नहीं की लेकिन बाद में न्यायालय के आदेश पर इसकी जांच शुरू कराई गई। वर्तमान में जांच सीबीसीआईडी के हवाले हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच के लिए सीबीसीआईडी ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से आख्या मांगीं थी और आयोग की ओर से सीबीसीआईडी को रिपोर्ट दी जा चुकी है लेकिन जांच अब भी जारी है। उधर, शासन का दबाव है कि लंबित परिणाम जल्द से जल्द जारी किए जाएंगे लेकिन इस मामले में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आयोग अब तक यह स्पष्ट कर पाने की स्थिति में भी नहीं है कि परीक्षा परिणाम का क्या होगा। इस बीच आरओ-एआरओ परीक्षा-2017 के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है लेकिन जो अभ्यर्थी पिछली परीक्षा में निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके हैं, उनकी उम्मीद अब केवल पुरानी परीक्षा पर ही टिकी है।
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शासन का दबाव कि जल्द जारी करें रिजल्ट, पर विवाद बरकरार
यूपीपीएससी भी परिणाम को लेकर स्पष्ट नहीं का पा रहा स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में तमाम पुराने परिणाम लंबित पड़े हैं। शासन का दबाव है कि आयोग लंबित परिणाम जल्द जारी कर लेकिन उनको लेकर विवाद अब तक बरकरार है। पीसीएस मुख्य परीक्षा का परिणाम तो जारी करने की तैयारी हो गई है लेकिन समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2016 के परिणाम को लेकर आयोग ने अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा 27 नवंबर 2016 को आयोजित की गई थी। इसमें तकरीबन दो लाख 32 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। यह परीक्षा 361 पदों के लिए दो पालियों में हुई थी। परीक्षा का पहला पेपर व्हाट्स ऐप पर वायर हो गया था। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपने स्तर पर तो कोई कार्रवाई नहीं की लेकिन बाद में न्यायालय के आदेश पर इसकी जांच शुरू कराई गई। वर्तमान में जांच सीबीसीआईडी के हवाले हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच के लिए सीबीसीआईडी ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से आख्या मांगीं थी और आयोग की ओर से सीबीसीआईडी को रिपोर्ट दी जा चुकी है लेकिन जांच अब भी जारी है। उधर, शासन का दबाव है कि लंबित परिणाम जल्द से जल्द जारी किए जाएंगे लेकिन इस मामले में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आयोग अब तक यह स्पष्ट कर पाने की स्थिति में भी नहीं है कि परीक्षा परिणाम का क्या होगा। इस बीच आरओ-एआरओ परीक्षा-2017 के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है लेकिन जो अभ्यर्थी पिछली परीक्षा में निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके हैं, उनकी उम्मीद अब केवल पुरानी परीक्षा पर ही टिकी है।
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