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बजरंगी की मौत के बाद उसकी याचिका खारिज

Thu, 12 Jul 2018 02:08 AM IST
Updated Thu, 12 Jul 2018 02:08 AM IST
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बजरंगी की मौत के बाद उसकी याचिका खारिज
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बजरंगी की मौत के बाद उसकी याचिका खारिज
0 हाईकोर्ट ने कहा मुआवजे या सीबीआई जांच के लिए परिजन अलग से दाखिल कर सकते हैं याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा की मांग को लेकर दाखिल उसकी याचिका अर्थहीन होने के आधार पर खारिज कर दी है। याचिका में मुन्ना बजरंगी ने अपर जिला जज वाराणसी के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसने वीडियो कांफ्रेेंसिंग से पेशी कराने या जेल से पेशी पर ले जाते समय सुरक्षा देने की मांग की थी। एडीजे ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी।
हालांकि बजरंगी की अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल ने मामले की सीबीआई से जांच कराने और उसके परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए याचिका की सुनवाई जारी रखने की मांग की मगर एकल न्यायपीठ को इस प्रकार के मामलों में सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है इसलिए सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याची के परिजन चाहें तो इस संबंध में अलग से खंडपीठ के समक्ष याचिका दाखिल कर सकते हैं।
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बजरंगी की ओर से दाखिल याचिका मई 2018 से लंबित थी। आठ जुलाई को इस पर सुनवाई होनी थी मगर उसी दिन बागपत जेल में उसकी हत्या कर दी गई। याचिका में अपर जिला जज वाराणसी के 23 अप्रैल 2018 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उस वक्त झांसी जेल में बंद बजरंगी ने एडीजे वाराणसी के समक्ष अर्जी दाखिल कर कहा था कि उसे जान का खतरा है। झांसी से वाराणसी लाने के दौरान पुलिस फर्जी एनकाउंटर दिखाकर उसकी हत्या कर सकती है। इसलिए उसकी वाराणसी कोर्ट में उसकी पेशी वीडियो कांफ्रें सिंग से कराई जाए। यह भी मांग की गई झांसी से वाराणसी कोर्ट लाते समय पूरे रास्ते की वीडियोग्राफी कराई जाए। झांसी जेल में वीडियो कांफ्रें सिंग की सुविधा न होने और झांसी से वाराणसी का रास्ता काफी लंबा होने के आधार पर एडीजे ने उसकी दोनों मांगे खारिज कर दी थी। हालांकि पुलिस को उसे पर्याप्त सुरक्षा के साथ पेशी पर लाने का निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। मगर बजरंगी की मौत के साथ ही उसकी याचिका भी खारिज हो गई।
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