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गैर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थी होंगे चयन से बाहर
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:13 AM IST
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गैर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थी होंगे चयन से बाहर
0 हाईकोर्ट ने आयोग सचिव को जांच कर चयन सूची संशोधित करने का आदेश दिया
0 सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती के मामले में हाईकोर्ट ने ऐसे अभ्यर्थियों को चयन सूची से हटाने का आदेश दिया है, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान का ट्रिपल सी प्रमाणपत्र आवेदन के समय नहीं लगाया है। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग के सचिव को निर्देश दिया है कि वह सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच करें तथा जिनके प्रमाणपत्र डोएट या दूसरे किसी मान्यता प्राप्त संस्था के नहीं हैं, उनका नाम हटाकर मेरिट के अनुसार रिक्त पदों पर नियुक्तियां करें। राजीव कुमार और कई अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति रामसूरत राम मौर्या ने दिया।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सीमांत सिंह आदि ने पक्ष रखा। उत्तर प्रदेश सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती का विज्ञापन लोक सेवा आयोग ने 25 दिसंबर 2010 को जारी किया था। इसमें अन्य अर्हताओं के साथ ही अभ्यर्थी के पास डोएट या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी दूसरी संस्था का ट्रिपल सी प्रमाणपत्र होना अनिवार्य था। 31 अक्तूबर 2017 को इसका अंतिम परिणाम जारी किया गया। कुछ असफल अभ्यर्थियों ने चयन परिणाम को यह कहते हुए चुनौती दी कि चयन सूची में कई ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिनके पास मान्यता प्राप्त संस्था का प्रमाणपत्र नहीं है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष सभी 250 चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने इसे देखने के बाद याचीगण के अधिवक्ताओं को भी दिखाने का निर्देश दिया। जांच में 27 ऐसे प्रमाणपत्र मिले जो मान्यता प्राप्त संस्था के नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में ऐसा कोई रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे पता चले कि यह प्रमाणपत्र किसी मान्यता प्राप्त संस्था ने जारी किया है। सचिव लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह जांच करेें और जिनके प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त संस्था के नहीं है, उनका चयन रद्द कर रिक्त पदों को मेरिट के अनुसार भरा जाए। इससे पूर्व कोर्ट ने यथा स्थिति का अंतरिम आदेश पारित किया था, जिसकी वजह से पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई थी।
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0 हाईकोर्ट ने आयोग सचिव को जांच कर चयन सूची संशोधित करने का आदेश दिया
0 सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती के मामले में हाईकोर्ट ने ऐसे अभ्यर्थियों को चयन सूची से हटाने का आदेश दिया है, जिन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थान का ट्रिपल सी प्रमाणपत्र आवेदन के समय नहीं लगाया है। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग के सचिव को निर्देश दिया है कि वह सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच करें तथा जिनके प्रमाणपत्र डोएट या दूसरे किसी मान्यता प्राप्त संस्था के नहीं हैं, उनका नाम हटाकर मेरिट के अनुसार रिक्त पदों पर नियुक्तियां करें। राजीव कुमार और कई अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति रामसूरत राम मौर्या ने दिया।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सीमांत सिंह आदि ने पक्ष रखा। उत्तर प्रदेश सचिवालय में 250 अपर निजी सचिवों की भर्ती का विज्ञापन लोक सेवा आयोग ने 25 दिसंबर 2010 को जारी किया था। इसमें अन्य अर्हताओं के साथ ही अभ्यर्थी के पास डोएट या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी दूसरी संस्था का ट्रिपल सी प्रमाणपत्र होना अनिवार्य था। 31 अक्तूबर 2017 को इसका अंतिम परिणाम जारी किया गया। कुछ असफल अभ्यर्थियों ने चयन परिणाम को यह कहते हुए चुनौती दी कि चयन सूची में कई ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिनके पास मान्यता प्राप्त संस्था का प्रमाणपत्र नहीं है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष सभी 250 चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने इसे देखने के बाद याचीगण के अधिवक्ताओं को भी दिखाने का निर्देश दिया। जांच में 27 ऐसे प्रमाणपत्र मिले जो मान्यता प्राप्त संस्था के नहीं थे। कोर्ट ने कहा कि इन मामलों में ऐसा कोई रिकार्ड प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे पता चले कि यह प्रमाणपत्र किसी मान्यता प्राप्त संस्था ने जारी किया है। सचिव लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह जांच करेें और जिनके प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त संस्था के नहीं है, उनका चयन रद्द कर रिक्त पदों को मेरिट के अनुसार भरा जाए। इससे पूर्व कोर्ट ने यथा स्थिति का अंतरिम आदेश पारित किया था, जिसकी वजह से पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई थी।
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