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हर नागरिक को धार्मिक शिक्षा लेने का अधिकार: हाईकोर्ट
Updated Tue, 03 Oct 2017 08:03 PM IST
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हर नागरिक को धार्मिक शिक्षा लेने का अधिकार: हाईकोर्ट
0 बीएचयू और एएमयू में धार्मिक शिक्षा पर पाबंदी लगाने की याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि हर नागरिक को अपने धर्म से संबंधित शिक्षा लेने का अधिकार है। संविधान धर्म के बारे में जानकारी लेने पर रोक नहीं लगाता है। मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में कर्मकांड की शिक्षा और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुस्लिम धर्म की शिक्षा देने पर रोक लगाने की मांग में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि इन विश्वविद्यालयों में ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है, जिसे पढ़ाने की संविधान पाबंदी लगाता है। विधि छात्र शाश्वत आनंद और पांच अन्य ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा कि सरकारी विश्वविद्यालय में धार्मिक पूजापाठ और धर्म पद्धति की शिक्षा नहीं दी जा सकती है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लंघन है। सुप्रीमकोर्ट द्वारा अरुणा राय केस में दिए निर्णय का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि हर बच्चे को धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है। संविधान धर्म के विषय में जानकारी प्राप्त करने पर कोई रोक नहीं लगाता है। यह नागरिकों का मौलिक अधिकार है कि वह अपने धर्म के बारे में जानें। कोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।
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0 बीएचयू और एएमयू में धार्मिक शिक्षा पर पाबंदी लगाने की याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने कहा है कि हर नागरिक को अपने धर्म से संबंधित शिक्षा लेने का अधिकार है। संविधान धर्म के बारे में जानकारी लेने पर रोक नहीं लगाता है। मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में कर्मकांड की शिक्षा और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुस्लिम धर्म की शिक्षा देने पर रोक लगाने की मांग में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि इन विश्वविद्यालयों में ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है, जिसे पढ़ाने की संविधान पाबंदी लगाता है। विधि छात्र शाश्वत आनंद और पांच अन्य ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा कि सरकारी विश्वविद्यालय में धार्मिक पूजापाठ और धर्म पद्धति की शिक्षा नहीं दी जा सकती है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लंघन है। सुप्रीमकोर्ट द्वारा अरुणा राय केस में दिए निर्णय का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि हर बच्चे को धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है। संविधान धर्म के विषय में जानकारी प्राप्त करने पर कोई रोक नहीं लगाता है। यह नागरिकों का मौलिक अधिकार है कि वह अपने धर्म के बारे में जानें। कोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।
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