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पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में बाथरूम के बाहर भी निगरानी
Updated Thu, 21 Sep 2017 09:27 PM IST
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पीसीएस परीक्षा में बाथरूम के बाहर भी निगरानी
0 प्रारंभिक परीक्षा 24 को, आयोग ने जारी किए निर्देश
0 केंद्रों पर अच्छी छवि वाले कर्मचारियों की होगी तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा किसी ने किसी विवाद के कारण चर्चा में रही। पेपर आउट होने, कॉपी बदलने जैसी घटनाओं ने परीक्षा की शुचिता को चोट पहुंचाने के साथ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की छवि भी धूमिल की। आयोग ने अपनी छवि सुधारने के लिए पुरानी गलतियों से सबक लेकर कई अहम फैसले किए हैं, जिनमें से एक निर्णय यह भी है कि परीक्षा के दौरान केंद्रों के बाथरूम के बाहर भी निगरानी की जाएगी ताकि कोई परीक्षार्थी कॉपी लेकर बाथरूम में न जा सके।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 24 सितंबर को प्रस्तावित है। आयोग की ओर से परीक्षा केंद्रों को जारी पत्र में कहा गया है कि पिछली कुछ परीक्षाओं में परीक्षा के दौरान अनुचित साधन का प्रयोग किए जाने की शिकायत मिली है। कुछ परीक्षार्थी तो कक्ष से बाहर कॉपी लेकर चले गए। यह भी शिकायत मिली कि परीक्षार्थी कॉपी लेकर बाथरूम में चल गए। इन तमाम शिकायतों के मद्देनजर आयोग के सचिव जगदीश ने परीक्षा केंद्रों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कहा गया है कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम एक सशस्त्र गार्ड और आंतरिक स्तर का एक कर्मचारी बाथरूम के बाहर तैनात किया जाए, जिसका यह देखने का दायित्व होगा कि बाथरूम में भीड़ इकट्ठा न हो और कोई भी अभ्यर्थी प्रश्नपत्र लेकर बाथरूम में न आया हो।
पूर्व में परीक्षा केंद्रों में हुई गलतियों का उदाहरण देते हुए आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि अंतरीक्षण कार्य के लिए दक्ष स्टाफ के अभाव में कई अंतरीक्षक परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों के उत्तर पत्रक, रोल लिस्ट आदि पर बिना इस बात की पुष्टि किए कि अभ्यर्थियों ने सभी प्रविष्टियों को पूर्ण कर लिया है, सरसरी तौर पर हस्ताक्षर कर देते हैं। कई बार अभ्यर्थी अपनी कॉपी एवं रोललिस्ट में अपनी प्रश्न पुस्तिका की सिरीज या रोल नंबर का अंकन करना भूल जाते हैं, जिसके कारण कॉपियों का मूल्यांकन नहीं हो पाता है। इसके अलावा कई केंद्रों से कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख, जैसे उत्तर पत्रक, रोल लिस्ट आदि के कुछ पन्ने प्रेषित नहीं किए जाते हैं और बाद में जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए अनुभवी अंतनिरीक्षकों की तैनाती के निर्देश दिए गए है और यह भी कहा गया है कि अंतनिरीक्षक नए हैं तो उन्हें प्रशिक्षण दिलाया जाए।
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‘नो-रिलेशनशिप’ का प्रमाण जरूरी
- परीक्षा केंद्रों पर जो भी कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, उनसे ‘नो-रिलेशनशिप’ का प्रमाण लिया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था पहले भी लागू थी लेकिन पूरी तरह से इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा था। आयोग ने इसे अनिवार्य कर दिया है।
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लिस्ट में नाम नहीं तो ली जाएगी अंडरटेकिंग
- आयेाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अभ्यर्थी जिनके पास केंद्र में प्रवेश के लिए ई-प्रवेश पत्र हो लेकिन केंद्र की रोल लिस्ट में उनका नाम या अनुक्रमांक न हो, ऐसे अभ्यर्थियों से अभिवचन पत्र (अंडरटेकिंग) लेकर उनके जोखिम (रिस्क) पर औपबंधिक प्रवेश दे दिया जाए।
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आयोग के पास सुरक्षित रहेगा सुबूत
- परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्रों के बंडल खोले जाने और परीक्षा के बाद उत्तर पत्र सील किए जाने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसे मेमोरी कार्ड में रखा जाए जाएगा और मेमोरी कार्ड आयोग के गोपनीय विभाग में जमा होगा।
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पीसीएस परीक्षा में बाथरूम के बाहर भी निगरानी
0 प्रारंभिक परीक्षा 24 को, आयोग ने जारी किए निर्देश
0 केंद्रों पर अच्छी छवि वाले कर्मचारियों की होगी तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित पीसीएस परीक्षा किसी ने किसी विवाद के कारण चर्चा में रही। पेपर आउट होने, कॉपी बदलने जैसी घटनाओं ने परीक्षा की शुचिता को चोट पहुंचाने के साथ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की छवि भी धूमिल की। आयोग ने अपनी छवि सुधारने के लिए पुरानी गलतियों से सबक लेकर कई अहम फैसले किए हैं, जिनमें से एक निर्णय यह भी है कि परीक्षा के दौरान केंद्रों के बाथरूम के बाहर भी निगरानी की जाएगी ताकि कोई परीक्षार्थी कॉपी लेकर बाथरूम में न जा सके।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 24 सितंबर को प्रस्तावित है। आयोग की ओर से परीक्षा केंद्रों को जारी पत्र में कहा गया है कि पिछली कुछ परीक्षाओं में परीक्षा के दौरान अनुचित साधन का प्रयोग किए जाने की शिकायत मिली है। कुछ परीक्षार्थी तो कक्ष से बाहर कॉपी लेकर चले गए। यह भी शिकायत मिली कि परीक्षार्थी कॉपी लेकर बाथरूम में चल गए। इन तमाम शिकायतों के मद्देनजर आयोग के सचिव जगदीश ने परीक्षा केंद्रों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कहा गया है कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर कम से कम एक सशस्त्र गार्ड और आंतरिक स्तर का एक कर्मचारी बाथरूम के बाहर तैनात किया जाए, जिसका यह देखने का दायित्व होगा कि बाथरूम में भीड़ इकट्ठा न हो और कोई भी अभ्यर्थी प्रश्नपत्र लेकर बाथरूम में न आया हो।
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पूर्व में परीक्षा केंद्रों में हुई गलतियों का उदाहरण देते हुए आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि अंतरीक्षण कार्य के लिए दक्ष स्टाफ के अभाव में कई अंतरीक्षक परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों के उत्तर पत्रक, रोल लिस्ट आदि पर बिना इस बात की पुष्टि किए कि अभ्यर्थियों ने सभी प्रविष्टियों को पूर्ण कर लिया है, सरसरी तौर पर हस्ताक्षर कर देते हैं। कई बार अभ्यर्थी अपनी कॉपी एवं रोललिस्ट में अपनी प्रश्न पुस्तिका की सिरीज या रोल नंबर का अंकन करना भूल जाते हैं, जिसके कारण कॉपियों का मूल्यांकन नहीं हो पाता है। इसके अलावा कई केंद्रों से कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख, जैसे उत्तर पत्रक, रोल लिस्ट आदि के कुछ पन्ने प्रेषित नहीं किए जाते हैं और बाद में जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए अनुभवी अंतनिरीक्षकों की तैनाती के निर्देश दिए गए है और यह भी कहा गया है कि अंतनिरीक्षक नए हैं तो उन्हें प्रशिक्षण दिलाया जाए।
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‘नो-रिलेशनशिप’ का प्रमाण जरूरी
- परीक्षा केंद्रों पर जो भी कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, उनसे ‘नो-रिलेशनशिप’ का प्रमाण लिया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था पहले भी लागू थी लेकिन पूरी तरह से इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा था। आयोग ने इसे अनिवार्य कर दिया है।
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लिस्ट में नाम नहीं तो ली जाएगी अंडरटेकिंग
- आयेाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अभ्यर्थी जिनके पास केंद्र में प्रवेश के लिए ई-प्रवेश पत्र हो लेकिन केंद्र की रोल लिस्ट में उनका नाम या अनुक्रमांक न हो, ऐसे अभ्यर्थियों से अभिवचन पत्र (अंडरटेकिंग) लेकर उनके जोखिम (रिस्क) पर औपबंधिक प्रवेश दे दिया जाए।
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आयोग के पास सुरक्षित रहेगा सुबूत
- परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्रों के बंडल खोले जाने और परीक्षा के बाद उत्तर पत्र सील किए जाने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसे मेमोरी कार्ड में रखा जाए जाएगा और मेमोरी कार्ड आयोग के गोपनीय विभाग में जमा होगा।