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यूपी: चयनित 49 शिक्षकों की अब जाएगी नौकरी
Sat, 27 Jul 2019 04:19 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2019 04:19 AM IST
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शिक्षक
- फोटो : Social Media (File Photo)
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68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में गलत मूल्यांकन के चलते नौकरी पाए 49 शिक्षकों की नौकरी अब जाएगी। शासन की ओर से गठित जांच कमेटी की सिफारिश पर जब इन 49 चयनितों की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया तो उसमें नंबर कम पाए गए। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इन 49 शिक्षकों को नौकरी से बाहर करने के लिए शासन को पत्र फरवरी-मार्च में ही भेजा गया था। हाल ही में हुई शासन की बैठक में इनको नौकरी से हटाने के फैसले पर मुहर लग गई। अब संबंधित बीएसए के माध्यम से नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है।
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प्रदेश सरकार की ओर से 2018 में 68,500 सहायक अध्यापकों के पद घोषित किए गए थे। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से हुई शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद मात्र 41556 को ही सफल घोषित किया गया। परिणाम के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर हंगामा किया।
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हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद पता चला कि जिस अभ्यर्थी को उत्तर पुस्तिका में 127 अंक मिले थे, उसे रिजल्ट में मात्र 27 अंक दिए गए थे। इसके बाद हुई जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की पुष्टि होने लगी। शासन की ओर से तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक डॉ. सुत्ता सिंह और रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी जीवेंद्र सिंह ऐरी को निलंबित कर दिया गया था।
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हाईकोर्ट के आदेश पर हुए पुनर्मूल्यांकन के बाद लगभग पांच हजार अभ्यर्थियों को बारी-बारी से नौकरी तो दे दी गई, लेकिन जो लोग गलत मूल्यांकन के चलते कम अंक होने के बाद भी सफल हो गए थे, वह आठ महीने से नौकरी पर बने हुए हैं। जांच और पुनर्मूल्यांकन के बाद सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से फरवरी-मार्च में ही इन शिक्षकों को हटाने की सिफारिश शासन के पास भेज दी गई थी। अब शासन की ओर से इन शिक्षकों को हटाने की तैयारी कर ली गई है। जल्द ही बीएसए के माध्यम से इनको हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
प्रोबेशन पूरा होने के बाद शिक्षकों को हटाना मुश्किल
बेसिक शिक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में नौकरी पाए 49 अभ्यर्थी यदि साल भर का अपना प्रोबेशन पूरा कर लेते हैं तो उन्हें हटाना मुश्किल हो जाएगा। संदिग्ध सूची में शामिल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शासन स्तर से प्रयास में हैं कि किसी प्रकार से उनकी नियुक्ति का एक वर्ष पूरा हो जाए। इसके बाद उन्हें कोर्ट से छूट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।