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विश्व पटल पर कुंभ, दुनिया के 64 देशों के लहराए ध्वज
Sun, 16 Dec 2018 01:56 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 16 Dec 2018 01:56 AM IST
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गंगा-यमुना की सुरम्य लहरों पर अठखेलियां करते प्रवासी पक्षियों के कलरव के बीच शनिवार की दोपहर अरैल में दिव्य कुंभ की परिकल्पना को विश्व पटल पर साकार करने के लिए 64 देशों का एक साथ ध्वजारोहण हुआ। विदेशी राजनयिकों व उनके प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों के ध्वज फहराए। कुंभ-2019 के ध्वज परिसर में उन अद्भुत क्षणों को निहारने के लिए आसपास के घाटों से लेकर सड़कों की पटरियों तक भीड़ उमड़ पड़ी थी। यहां कुंभ की महिमा को विश्व भर में पहुंचाने का संदेश दिया गया। साथ ही दुनिया के इस सबसे बड़े आध्यात्मिक मेले को पूरी मानवता के विकास और कल्याण से जोड़ने की कोशिश की गई।
कोलकाता से आए सुसज्जित क्रूज पर सवार विदेशी राजनयिकों का दल उस पार अरैल के त्रिवेणी तट पर दोपहर 12:35 बजे पहुंचा। वहां भारतीय बैंड की धुनों के साथ उनकी अगवानी की गई। यहां रेती पर बनाए गए कुंभ -2019 के प्रांगण में हर देश के ध्वज पहले से लगाए गए थे। दाहिने से सबसे पहले भारत का ध्वज लगा था। इस दौरान हर ध्वज के पास बने मंच पर संबंधित देशों के राजदूतों और प्रतिनिधियों को ले जाया गया। हर देश के ध्वज स्तंभ पर उस देश की पट्टिका लगी हुई थी। इस दौरान बैंड की धुनों के बीच एक साथ ध्वजारोहण हुआ और परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कुंभ का यह आयोजन पूरी मानवता के विकास का पथ तो प्रदर्शित करेगा ही, कल्याणकारी भी होगा। विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने विदेशी अतिथियों को बताया कि प्रयागराज के कुंभ का सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। उन्होंने गंगा जल की महिमा का बखान भी किया। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को बताया कि गंगा जल की विशेषता है कि इसमें अशुद्धियां भी मिलकर शुद्ध हो जाती हैं। सचिव प्रोटोकाल मृत्युंजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोलकाता से आए सुसज्जित क्रूज पर सवार विदेशी राजनयिकों का दल उस पार अरैल के त्रिवेणी तट पर दोपहर 12:35 बजे पहुंचा। वहां भारतीय बैंड की धुनों के साथ उनकी अगवानी की गई। यहां रेती पर बनाए गए कुंभ -2019 के प्रांगण में हर देश के ध्वज पहले से लगाए गए थे। दाहिने से सबसे पहले भारत का ध्वज लगा था। इस दौरान हर ध्वज के पास बने मंच पर संबंधित देशों के राजदूतों और प्रतिनिधियों को ले जाया गया। हर देश के ध्वज स्तंभ पर उस देश की पट्टिका लगी हुई थी। इस दौरान बैंड की धुनों के बीच एक साथ ध्वजारोहण हुआ और परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे पहले सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने विदेशी मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कुंभ का यह आयोजन पूरी मानवता के विकास का पथ तो प्रदर्शित करेगा ही, कल्याणकारी भी होगा। विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने विदेशी अतिथियों को बताया कि प्रयागराज के कुंभ का सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है। उन्होंने गंगा जल की महिमा का बखान भी किया। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को बताया कि गंगा जल की विशेषता है कि इसमें अशुद्धियां भी मिलकर शुद्ध हो जाती हैं। सचिव प्रोटोकाल मृत्युंजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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