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अफरातफरी के बीच लिए सात फेरे

Fri, 12 Jul 2019 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2019 12:54 AM IST
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62 couples marriage between mismanagement
जीआईसी में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान धक्का-मुक्की करते लोग। - फोटो : PRATAPGARH
भारी अफरातफरी के बीच 62 जोड़ों ने लिए सात फेरे
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शादी के लिए प्रशासन ने बंद कर दिया स्कूल, जीआईसी के गलियारे में जोड़ों को बैठाकर कराई शादी
खाना खाने के लिए जमकर हुई धक्कामुक्की, किसी के कपड़े, तो किसी के सिर पर गिरी सब्जी
दूल्हा-दुल्हन और परिजनों के अलावा नहीं घुसने पाया कोई, बरसात में बाहर भीगते रहे परिजन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। गुरुवार को जीआईसी में भारी अफरातफरी के बीच 62 जोड़ों ने सात फेरे लिए। विवाह कराने के लिए प्रशासन ने गुरुवार को स्कूल बंद करा दिया। कालेज के गलियारे में जोड़ों को शादी कराने के लिए बैठा दिया गया। इससे उन्हें फेरे लेने में भी दिक्कत आई। विवाह स्थल पर जगह नहीं होने के कारण दूल्हा-दुल्हन के साथ आए परिजनों को बाहर कर दिया गया, इससे वह बाहर भीगते रहे। डीएम मार्कण्डेय शाही दो मिनट के लिए जीआईसी पहुंचे और फिर बैठक में शामिल होने के लिए प्रयागराज निकल गए। शादी के बाद खाना खाने के लिए धक्कामुक्की होने लगी। इससे अधिकांश लोग बगैर खाना खाए ही लौट गए। आलम यह रहा कि किसी के कपड़े तो किसी के सिर पर सब्जी गिरी।

शहर के जीआईसी में गुरुवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। शासन से प्रत्येक शादी के लिए 35 हजार रुपये नगद बेटियों के खाते में भेजा जाना है, दस हजार रुपये में दुल्हन की विदाई की सामग्री और छह हजार रुपये शादी समारोह के आयोजन के लिए मिले थे। अफसरों का दावा है कि 62 जोड़ों ने फेरे लिए। इसका मतलब है कि 3,72,000 रुपये विभाग को शादी के आयोजन के लिए मिले थे। अगर जिला प्रशासन चाहता तो वाटरप्रूफ पंडाल की व्यवस्था करके शादी समारोह को भव्यता प्रदान कर सकता था। मगर रुपये की बंदरबांट करने के लिए कार्यक्रम स्थल के रूप में जीआईसी को चुना गया। जगह कम होने के कारण बरामदे में ही दूल्हा-दुल्हन और पंडितों को बैठा दिया गया। उसी बरामदे में व्यवस्था देख रहे लोगों का भी आना-जाना लगा रहा। पांच फीट के बरामदे में दो फिट की जगह आने-जाने वालों के लिए निकल गई और तीन फिट में दुल्हन-दूल्हा को सात फेरे लेना मुश्किल हो रहा था। यह सब कार्यक्रम इतनी जल्दबाजी में हुआ कि पंडितजी ने बगैर गौर-गणेश की पूजा और अग्नि को साक्षी मानें ही सात फेरे करा दिए। शादी संपन्न होने के बाद खाने के लिए महाभारत होता रहा। प्लेट लेने से लेकर खाने तक के लिए धक्का-मुक्की होती रही। बरामदे में ही खाना लगाया था, जहां खड़े होने तक की व्यवस्था नहीं थी।

जीआईसी में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के भोजन के दौरान उमड़ी भीड़।

जीआईसी में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के भोजन के दौरान उमड़ी भीड़।- फोटो : PRATAPGARH

जीआईसी में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान बरामदे में हो रही शादी।

जीआईसी में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान बरामदे में हो रही शादी।- फोटो : PRATAPGARH

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