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अभिरक्षा में मौत पर मुआवजा देने में देरी पर कोर्ट नाराज
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अभिरक्षा में मौत पर मुआवजा देने में देरी से हाईकोर्ट नाराज
0 कहा पांच लाख मुआवजा दें या कोर्ट में हाजिर हों डीएम शामली, प्रमुख सचिव गृह
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। न्यायिक अभिरक्षा में युवक की मौत पर उसके परिवार को मुआवजा नहीं दिए जाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने डीएम शामली को चेतावनी दी है कि मृतक की मां को पांच लाख रुपये का तत्काल भुगतान किया जाए या फिर डीएम और प्रमुख सचिव गृह अदालत में हाजिर हों। हाईकोर्ट ने चार अप्रैल 2019 को डीएम को मुआवजे के भुगतान का आदेश दिया था इसके बावजूद पीड़िता को एक रुपये नहीं दिए गए। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन नहीं करना अदालत की अवमानना है। याची मीना की याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने यह आदेश दिया।
मामले के अनुसार याची के पुत्र आदर्श भारद्वाज को जीआरपी ने एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया था। उसे न्यायिक अभिरक्षा में सहारनपुर जेल भेज दिया गया। आरोप है कि आदर्श उस समय नाबालिग था। जेल में उसे रसोई में काम करने का जिम्मा दिया। चार अगस्त 2016 को खाना बनाते एक बड़ा पतीला आदर्श पर गिर गया जिससे झुलस जाने की वजह से उसकी मौत हो गई। मानवाधिकार आयोग ने इस घटना की जांच की और पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये अंतरिम सहायता देने का आदेश दिया। याची को एक लाख रुपये दे दिए गए। इससे असंतुष्ट होकर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अधिक मुआवजे की मांग की। हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया इसके बावजूद याची को रकम नहीं दी गई।
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अभिरक्षा में मौत पर मुआवजा देने में देरी से हाईकोर्ट नाराज
0 कहा पांच लाख मुआवजा दें या कोर्ट में हाजिर हों डीएम शामली, प्रमुख सचिव गृह
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। न्यायिक अभिरक्षा में युवक की मौत पर उसके परिवार को मुआवजा नहीं दिए जाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने डीएम शामली को चेतावनी दी है कि मृतक की मां को पांच लाख रुपये का तत्काल भुगतान किया जाए या फिर डीएम और प्रमुख सचिव गृह अदालत में हाजिर हों। हाईकोर्ट ने चार अप्रैल 2019 को डीएम को मुआवजे के भुगतान का आदेश दिया था इसके बावजूद पीड़िता को एक रुपये नहीं दिए गए। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन नहीं करना अदालत की अवमानना है। याची मीना की याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने यह आदेश दिया।
मामले के अनुसार याची के पुत्र आदर्श भारद्वाज को जीआरपी ने एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया था। उसे न्यायिक अभिरक्षा में सहारनपुर जेल भेज दिया गया। आरोप है कि आदर्श उस समय नाबालिग था। जेल में उसे रसोई में काम करने का जिम्मा दिया। चार अगस्त 2016 को खाना बनाते एक बड़ा पतीला आदर्श पर गिर गया जिससे झुलस जाने की वजह से उसकी मौत हो गई। मानवाधिकार आयोग ने इस घटना की जांच की और पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये अंतरिम सहायता देने का आदेश दिया। याची को एक लाख रुपये दे दिए गए। इससे असंतुष्ट होकर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अधिक मुआवजे की मांग की। हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया इसके बावजूद याची को रकम नहीं दी गई।
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