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महाधिवक्ता कार्यज्ञलय को सुविधाएं देने का आदेश
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महाधिवक्ता कार्यालय को 30
जून तक सुविधाएं देने का आदेश
0 मूलभूत सुविधाएं न होने से प्रभावित हो रहा वादकारियों और सरकार का हित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह महाधिवक्ता कार्यालय को 30 जून तक मूलभूत सुविधाएं, स्टाफ आदि उपलब्ध करा दें। कोर्ट ने कहा कि महाधिवक्ता कार्यालय के पास मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से वादकारियों और खुद सरकार का हित प्रभावित हो रहा है। मुकदमों से संबंधित सूचनाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं और याचिकाओं पर प्रदेश सरकार समय से जवाब दाखिल नहीं करती है। इससे सरकार की खुद की मुकदमा नीति का उल्लंघन हो रहा है।
प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार से मांगी गई जानकारियां उपलब्ध न करा पाने पर महाधिवक्ता कार्यालय की दशा में सुधार करने के लिए कहा है। प्रमुख सचिव न्याय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि महाधिवक्ता की ओर से भेजा गया प्रस्ताव अपूर्ण है। इसमें कंप्यूटर, स्कैनर आदि उपकरणों के संचालन हेतु भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों का वेतनमान और भर्ती स्रोत नहीं बताया गया है। कोर्ट ने सरकार के लचर रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार सही मंशा से काम नहीं कर रही है। याचिका पर 28 मार्च को सुनवाई होगी।
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जून तक सुविधाएं देने का आदेश
0 मूलभूत सुविधाएं न होने से प्रभावित हो रहा वादकारियों और सरकार का हित
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह महाधिवक्ता कार्यालय को 30 जून तक मूलभूत सुविधाएं, स्टाफ आदि उपलब्ध करा दें। कोर्ट ने कहा कि महाधिवक्ता कार्यालय के पास मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से वादकारियों और खुद सरकार का हित प्रभावित हो रहा है। मुकदमों से संबंधित सूचनाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं और याचिकाओं पर प्रदेश सरकार समय से जवाब दाखिल नहीं करती है। इससे सरकार की खुद की मुकदमा नीति का उल्लंघन हो रहा है।
प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार से मांगी गई जानकारियां उपलब्ध न करा पाने पर महाधिवक्ता कार्यालय की दशा में सुधार करने के लिए कहा है। प्रमुख सचिव न्याय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि महाधिवक्ता की ओर से भेजा गया प्रस्ताव अपूर्ण है। इसमें कंप्यूटर, स्कैनर आदि उपकरणों के संचालन हेतु भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों का वेतनमान और भर्ती स्रोत नहीं बताया गया है। कोर्ट ने सरकार के लचर रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार सही मंशा से काम नहीं कर रही है। याचिका पर 28 मार्च को सुनवाई होगी।
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