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निलंबित पुलिसकर्मियों की गैरजिलों में संबद्धता पर जवाब तलब
Updated Thu, 23 Aug 2018 01:13 AM IST
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निलंबित पुलिसकर्मियों की गैर जिलों में संबद्धता पर जवाब तलब
0 शासनादेश को चुनौती, एसआई की संबद्धता पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पुलिस महकमे में कर्मचारियों के निलंबन के बाद उनको गैर जिले में संबद्ध किए जाने को हाईकोर्ट ने मनमाना कार्य माना है। कोर्ट ने इससे संबंधित शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है तथा गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में तैनात एसआई देवेंद्र सिंह की संबद्धता पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता विजय गौतम की दलील थी कि प्रदेश सरकार ने 12 अगस्त 2010 को शासनादेश जारी कर निलंबित पुलिसकर्मियों को इस आधार पर गैर जनपद में संबद्ध करने का आदेश दिया कि उसी जनपद में तैनात रहने से वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे। अधिवक्ता का कहना था कि यह आधार उचित नहीं है। यदि अनुशासनात्मक कार्यवाही दूसरे जिले में चल रही है तो दूर से जिले में आकर कर्मचारी को अपना बचाव करने में परेशानी होगी। याचिका में 12 अगस्त 2010 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने याची के संबद्धता आदेश पर रोक लगाते हुए अपर मुख्य सचिव गृह से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याची देवेंद्र सिंह को एक महिला पत्रकार श्वेता गोस्वामी की शिकायत पर निलंबित कर दिया गया था। आरोप है कि याची महिला पत्रकार के पासपोर्ट सत्यापन हेतु उनके घर पर बिना वर्दी के गया और उसके साथ कोई महिला पुलिस भी नहीं थी। पत्रकार के ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी ने उसे निलंबित कर पुलिस लाइन गाजियाबाद से संबद्ध कर दिया था। बाद में डीजीपी हेडक्वार्टर ने उसे जौनपुर में संबद्ध कर दिया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
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निलंबित पुलिसकर्मियों की गैर जिलों में संबद्धता पर जवाब तलब
0 शासनादेश को चुनौती, एसआई की संबद्धता पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पुलिस महकमे में कर्मचारियों के निलंबन के बाद उनको गैर जिले में संबद्ध किए जाने को हाईकोर्ट ने मनमाना कार्य माना है। कोर्ट ने इससे संबंधित शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है तथा गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में तैनात एसआई देवेंद्र सिंह की संबद्धता पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता विजय गौतम की दलील थी कि प्रदेश सरकार ने 12 अगस्त 2010 को शासनादेश जारी कर निलंबित पुलिसकर्मियों को इस आधार पर गैर जनपद में संबद्ध करने का आदेश दिया कि उसी जनपद में तैनात रहने से वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित करेंगे। अधिवक्ता का कहना था कि यह आधार उचित नहीं है। यदि अनुशासनात्मक कार्यवाही दूसरे जिले में चल रही है तो दूर से जिले में आकर कर्मचारी को अपना बचाव करने में परेशानी होगी। याचिका में 12 अगस्त 2010 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी।
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कोर्ट ने याची के संबद्धता आदेश पर रोक लगाते हुए अपर मुख्य सचिव गृह से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याची देवेंद्र सिंह को एक महिला पत्रकार श्वेता गोस्वामी की शिकायत पर निलंबित कर दिया गया था। आरोप है कि याची महिला पत्रकार के पासपोर्ट सत्यापन हेतु उनके घर पर बिना वर्दी के गया और उसके साथ कोई महिला पुलिस भी नहीं थी। पत्रकार के ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी ने उसे निलंबित कर पुलिस लाइन गाजियाबाद से संबद्ध कर दिया था। बाद में डीजीपी हेडक्वार्टर ने उसे जौनपुर में संबद्ध कर दिया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।
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