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भूमि चिन्हांकन हेतु अपना शेयर जमा करे यूपी
Updated Tue, 13 Jun 2017 09:27 PM IST
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भूमि चिन्हांकन हेतु अपना हिस्सा जमा करे यूपी
0 यमुना की धारा बदलने से किसानों की जमीन का हो रहा सीमा परिवर्तन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
यमुना की धारा बदलने से यूपी और हरियाणा के किसानों की जमीनों की सीमाओं में होने वाले परिवर्तन के चिन्हांकन हेतु हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपना हिस्सा जमा करने का निर्देश दिया है। यूपी सरकार द्वारा इसमें होने वाले खर्च का अपना शेयर नहीं देने से चिन्हांकन का कार्य रुका है, जबकि हरियाणा सरकार अपना शेयर दे चुकी है।
इसे लेकर अलीगढ़ के शांती राम और अन्य किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति केपी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। नदी की धारा बदलने से जमीनों में होने वाले परिवर्तन की मॉनिटरिंग और सर्वे के लिए केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित की है। याचिका में कहा गया कि यमुना की धारा बदलने से अलीगढ़ के उतासनी गांव की जमीन हरियाणा के मोहाली में चली गई। इसी प्रकार से यमुना किनारे स्थित अन्य जिलों के गांवों की जमीनें हरियाणा में और हरियाणा के गांवों की जमीनें यूपी के गांवों में आ जाती हैं। इस मामले में 1975 में दीक्षित पंचाट का गठन किया गया। पंचाट ने दोनों राज्यों की सहमति से सीमांकन तय कर दिया।
इसके बाद से अभी तक जमीनों का स्वामित्व तय करने और चिन्हांकन का काम बचा है। इसका फायदा उठाकर गौतमबुद्धनगर में हाईवे के लिए अधिग्रहीत भूमि का फर्जी इंदराज कराकर भू माफिया ने मुआवजा प्राप्त कर लिया। दूसरे कई जिलों के किसानों ने भी इस मामले में याचिका दाखिल की है। चिन्हांकन के लिए हरियाणा ने अपना शेयर 36 लाख पांच हजार रुपये फरवरी 2015 में ही जमा कर दिया था। यूपी का शेयर भी 36 लाख पांच हजार रुपये है, जिसे जमा करने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2016 में पत्र लिखा था। कोर्ट ने आयुक्त उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद को निर्देश दिया है कि वह तीन माह के भीतर अपना शेयर जमा करने पर निर्णय लें।
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0 यमुना की धारा बदलने से किसानों की जमीन का हो रहा सीमा परिवर्तन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
यमुना की धारा बदलने से यूपी और हरियाणा के किसानों की जमीनों की सीमाओं में होने वाले परिवर्तन के चिन्हांकन हेतु हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपना हिस्सा जमा करने का निर्देश दिया है। यूपी सरकार द्वारा इसमें होने वाले खर्च का अपना शेयर नहीं देने से चिन्हांकन का कार्य रुका है, जबकि हरियाणा सरकार अपना शेयर दे चुकी है।
इसे लेकर अलीगढ़ के शांती राम और अन्य किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति केपी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। नदी की धारा बदलने से जमीनों में होने वाले परिवर्तन की मॉनिटरिंग और सर्वे के लिए केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित की है। याचिका में कहा गया कि यमुना की धारा बदलने से अलीगढ़ के उतासनी गांव की जमीन हरियाणा के मोहाली में चली गई। इसी प्रकार से यमुना किनारे स्थित अन्य जिलों के गांवों की जमीनें हरियाणा में और हरियाणा के गांवों की जमीनें यूपी के गांवों में आ जाती हैं। इस मामले में 1975 में दीक्षित पंचाट का गठन किया गया। पंचाट ने दोनों राज्यों की सहमति से सीमांकन तय कर दिया।
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इसके बाद से अभी तक जमीनों का स्वामित्व तय करने और चिन्हांकन का काम बचा है। इसका फायदा उठाकर गौतमबुद्धनगर में हाईवे के लिए अधिग्रहीत भूमि का फर्जी इंदराज कराकर भू माफिया ने मुआवजा प्राप्त कर लिया। दूसरे कई जिलों के किसानों ने भी इस मामले में याचिका दाखिल की है। चिन्हांकन के लिए हरियाणा ने अपना शेयर 36 लाख पांच हजार रुपये फरवरी 2015 में ही जमा कर दिया था। यूपी का शेयर भी 36 लाख पांच हजार रुपये है, जिसे जमा करने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2016 में पत्र लिखा था। कोर्ट ने आयुक्त उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद को निर्देश दिया है कि वह तीन माह के भीतर अपना शेयर जमा करने पर निर्णय लें।
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