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प्रयागराज के 54 कामगार ओमान में बंधक, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर लगाई मदद की गुहार

Thu, 16 Jul 2020 06:54 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Jul 2020 06:54 PM IST
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54 workers of Prayagraj hostage in Oman, soliciting help on social media by making videos
बंधक
रोजी रोटी और बेहतर जिंदगी की तलाश में भारत से हजारों किलोमीटर दूर ओमान में गए प्रयागराज के 54 कामगार वहां बंधक बना लिए गए हैं। उन्हें न तो भरपेट खाना दिया जा रहा है और न ही पीने के लिए साफ पानी। घूरपुर के चितौरा गांव के सुनील विश्वकर्मा ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया तो कामगारों के बारे में पता चला।
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लॉकडाउन के दौरान काम बंद हुआ तो बेरोजगार मजदूरों को एक कैंप में रखा गया। दुर्दशा से आजिज मजदूरों ने प्रदर्शन किया तो कंपनी के सुरक्षाकर्मी और स्थानीय पुलिस ने उनके साथ बर्बर व्यवहार किया। घटना के बाद से कामगारों को बंधक बनाकर रखा गया है। सोशल मीडिया के सहारे वह अपनी बात दुनिया को बता पाए हैं।

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घूरपुर के चितौरा गांव के रहने वाले सुनील विश्वकर्मा को 2018 में कुछ लोगों ने सब्जबाग दिखाया कि ओमान की एक सीमेंट कंपनी में उसे नौकरी मिलेगी और रुपये भी खूब मिलेंगे। प्लेसमेंट एजेंसी के लोगों ने उसे और उसके कुछ साथियों समेत जिले के 54 लोगों को ओमान में अल तुर्की कंपनी में काम करने के लिए भेज दिया।
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सुनील को जितना बताया गया था, इतने पैसे तो नहीं मिल रहे थे, लेकिन फिर भी जीवन चलने लगा। कोरोना संकट के बाद यकायक कंपनी में पूरी तरह से काम बंद कर दिया गया। कामगारों को बताया गया फिलहाल उनकी कोई जरूरत नहीं है। उन्हें वापस भेजने के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क किया जा रहा है। जब तक वापसी नहीं हो जाती हजारों कामगारों को अलग-अलग कैंपों में रख दिया गया था। 

16 मजदूरों को उठा ले गाए, पता नहीं चला

घूरपुर के चितौरा गांव के रहने वाले सुनील विश्वकर्मा ने अमर उजाला को बताया कि कैंप में रहने वाले मजदूरों को कंपनी की ओर से बहुत कम पैसे दिए जा रहे थे। मजदूरों को सिर्फ दाल चावल और पानी ही मिल रहा था। पांच जुलाई की रात कुछ मजदूरों और कैंप हेड के बीच विवाद हो गया। इसके अगले दिन 16 मजदूरों को सुरक्षाकर्मी उठा ले गए। फिर मजदूरों ने वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस दौरान कंपनी के सुरक्षाकर्मियों ने ओमान पुलिस को बुला लिया था। किसी तरह से मजदूरों को शांत किया गया, लेकिन उसके बाद से कंपनी ने मजदूरों के साथ और भी बुरा बर्ताव शुरू कर दिया। इसके बाद मजदूर और भड़क गए। सुनील समेत तमाम लोगों ने धरना प्रदर्शन की वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी। उन्होंने भारत सरकार और दूतावास से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द वतन वापस भेज दें। यहां उनके साथ जानवरों से भी बुरा सुलूक किया जा रहा है। जिन 16 मजदूरों को 5 जुलाई की रात पुलिस ले गई थी उनका आज तक कुछ नहीं पता चल पाया है। इस कारण से अन्य मजदूर बहुत डरे हुए भी हैं। पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया था।

कंपनी के अधिकारी ने कहा, भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं

अल तुर्की कंपनी के अधिकारी सईद अल माहिरी ने खाड़ी देश की एक वेबसाइट को बताया है कि कोरोना के कारण काम बंद है। कामगारों को कैंप में रखकर उन्हें खाना पानी दिया जा रहा है। वापसी के लिए कंपनी भारतीय दूतावास के संपर्क में है।

कंपनी में कार्यरत कामगार
प्रयागराज - 54
वाराणसी - 300
गोरखपुर - 10000
कोलकाता - 8000
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