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सीओ करछना को हाईकोर्ट की फटकार
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सीओ करछना को हाईकोर्ट की फटकार
0 बिना मुकदमा दर्ज किए कंपनी निदेशकों को प्रताड़ित करने पर जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीओ करछना सच्चिदानंद को बिना आपराधिक केस या प्राथमिकी दर्ज किए हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों को प्रताड़ित करने पर कड़ी फटकार लगाई है। सीओ की कम आयु को देखते हुए कोर्ट ने कोई दंडात्मक आदेश तो नहीं दिया, मगर उनको नसीहत दी कि भविष्य में ऐसी गलती न दोहराएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में कंपनी के खिलाफ केस दर्ज होने की स्थिति में सीओ खुद को विवेचना से अलग रखें। अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी सीओ के करियर में बाधक नहीं बनेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत और तरुण अग्रवाल ने बहस की। इनका कहना था कि याची और विपक्षी में समझौता हो गया है। याची ने बकाए का भुगतान कर दिया है। उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं चल रही है । इसके बावजूद बिना विधिक अधिकार के सीओ करछना उन्हें परेशान कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर सीओ अदालत में हाजिर हुए। सरकारी वकील डीके तिवारी ने कहा कि पक्षकारों में समझौता याची के दबाव में हुआ है, लेकिन ब्याज का भुगतान नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित विपक्षी वसूली वाद दायर कर सकता है। आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है या एफआईआर कर सकता है, मगर बिना किसी आपराधिक केस के पुलिस को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। सीओ यह नहीं बता पाए कि बिना एफआईआर या जीडी में प्रविष्टि के वह किस कानून के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। युवा सीओ के कॅरियर को देखते हुए उन्हें भविष्य में सावधान रहने की कोर्ट ने नसीहत दी और कहा है कि कंपनी के खिलाफ वह विवेचना नही करेंगे।
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0 बिना मुकदमा दर्ज किए कंपनी निदेशकों को प्रताड़ित करने पर जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीओ करछना सच्चिदानंद को बिना आपराधिक केस या प्राथमिकी दर्ज किए हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों को प्रताड़ित करने पर कड़ी फटकार लगाई है। सीओ की कम आयु को देखते हुए कोर्ट ने कोई दंडात्मक आदेश तो नहीं दिया, मगर उनको नसीहत दी कि भविष्य में ऐसी गलती न दोहराएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में कंपनी के खिलाफ केस दर्ज होने की स्थिति में सीओ खुद को विवेचना से अलग रखें। अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी यह टिप्पणी सीओ के करियर में बाधक नहीं बनेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत और तरुण अग्रवाल ने बहस की। इनका कहना था कि याची और विपक्षी में समझौता हो गया है। याची ने बकाए का भुगतान कर दिया है। उसके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं चल रही है । इसके बावजूद बिना विधिक अधिकार के सीओ करछना उन्हें परेशान कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर सीओ अदालत में हाजिर हुए। सरकारी वकील डीके तिवारी ने कहा कि पक्षकारों में समझौता याची के दबाव में हुआ है, लेकिन ब्याज का भुगतान नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित विपक्षी वसूली वाद दायर कर सकता है। आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सकता है या एफआईआर कर सकता है, मगर बिना किसी आपराधिक केस के पुलिस को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। सीओ यह नहीं बता पाए कि बिना एफआईआर या जीडी में प्रविष्टि के वह किस कानून के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। युवा सीओ के कॅरियर को देखते हुए उन्हें भविष्य में सावधान रहने की कोर्ट ने नसीहत दी और कहा है कि कंपनी के खिलाफ वह विवेचना नही करेंगे।
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