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इविवि देगा रिपोर्ट, आदर्श गांवों में कितना हुआ काम-FIRST PAGE
Updated Mon, 07 May 2018 01:24 AM IST
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सूबे के सांसदों के आर्दश ग्राम की हकीकत परखेगा इविवि
केंद्र सरकार ने सर्वे के लिए सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी को दिया छह माह का वक्त
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
लोकसभा चुनाव-2019 से पहले केंद्र सरकार ने सांसद आदर्श गांवों में अब तक हुए कामकाज का ब्यौरा तैयार करने का निर्णय लिया है। यह काम अगले छह माह में पूरा होना है। उत्तर प्रदेश में इसकी जिम्मेदारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को सौंपी गई है। इविवि के सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी को यह प्रोजेक्ट पूरा करना है। इसके लिए छात्रों की कई टीमें तैयार की जाएंगी। मानदेय भी दिया जाएगा। प्रवेश के लिए छात्रों से 10 मई तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन फॉर्म इविवि की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
केंद्र सरकार पता लगाना चाहती है कि सांसद आदर्श गांवों का क्या हाल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि आदर्श गांवों के मूल्यांकन कार्य से युवाओं को जोड़ जाए, ताकि वे ग्रामीण परिवेश से जुड़ें। पिछली बार यह सर्वे एक निजी संस्था से कराया गया था। बाद में सर्वे की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे थे। इसी वजह से उत्तर प्रदेश में 105 आदर्श गांवों के सर्वे का जिम्मा इस बार इलाहाबाद विश्वविद्यालय को सौंपा गया है। विश्वविद्यालय का सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी छह माह में इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगा। सोसाइटी के कोऑर्डिनेटर प्रो. अनुपम दीक्षित के मुताबिक इविवि के लिए गर्व की बात है कि केंद्र सरकार ने उसे इस महत्वपूर्ण काम के लिए चुना।
प्रो. दीक्षित का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कम से कम 30 छात्रों की जरूरत पड़ेगी। छात्रों से 10 मई तक इविवि की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। छात्रों के चयन के बाद उनकी अलग-अलग टीमें बनाकर ट्रेनिंग दी जाएगी और इसके बाद उन्हें फील्ड में भेजा जाएगा। सरकार ने एक प्रारूप भी निर्धारित कर रखा है। सर्वे उसी प्रारूप के आधार पर होना है। इस योजना के तहत दो से तीन माह तक आदर्श गांवों का मूल्यांकन होगा और इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट सीधे भारत सरकार को भेजी जाएगी। सर्वे को लेकर एक कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है।
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केंद्र सरकार ने सर्वे के लिए सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी को दिया छह माह का वक्त
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
लोकसभा चुनाव-2019 से पहले केंद्र सरकार ने सांसद आदर्श गांवों में अब तक हुए कामकाज का ब्यौरा तैयार करने का निर्णय लिया है। यह काम अगले छह माह में पूरा होना है। उत्तर प्रदेश में इसकी जिम्मेदारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को सौंपी गई है। इविवि के सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी को यह प्रोजेक्ट पूरा करना है। इसके लिए छात्रों की कई टीमें तैयार की जाएंगी। मानदेय भी दिया जाएगा। प्रवेश के लिए छात्रों से 10 मई तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन फॉर्म इविवि की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
केंद्र सरकार पता लगाना चाहती है कि सांसद आदर्श गांवों का क्या हाल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा है कि आदर्श गांवों के मूल्यांकन कार्य से युवाओं को जोड़ जाए, ताकि वे ग्रामीण परिवेश से जुड़ें। पिछली बार यह सर्वे एक निजी संस्था से कराया गया था। बाद में सर्वे की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे थे। इसी वजह से उत्तर प्रदेश में 105 आदर्श गांवों के सर्वे का जिम्मा इस बार इलाहाबाद विश्वविद्यालय को सौंपा गया है। विश्वविद्यालय का सेंटर ऑफ साइंस एंड सोसाइटी छह माह में इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगा। सोसाइटी के कोऑर्डिनेटर प्रो. अनुपम दीक्षित के मुताबिक इविवि के लिए गर्व की बात है कि केंद्र सरकार ने उसे इस महत्वपूर्ण काम के लिए चुना।
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प्रो. दीक्षित का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कम से कम 30 छात्रों की जरूरत पड़ेगी। छात्रों से 10 मई तक इविवि की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। छात्रों के चयन के बाद उनकी अलग-अलग टीमें बनाकर ट्रेनिंग दी जाएगी और इसके बाद उन्हें फील्ड में भेजा जाएगा। सरकार ने एक प्रारूप भी निर्धारित कर रखा है। सर्वे उसी प्रारूप के आधार पर होना है। इस योजना के तहत दो से तीन माह तक आदर्श गांवों का मूल्यांकन होगा और इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट सीधे भारत सरकार को भेजी जाएगी। सर्वे को लेकर एक कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है।
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