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महिला अधिसवक्ता के खिलाफ सूरजभान की अर्जी खारिज
Updated Sat, 16 Sep 2017 08:43 PM IST
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महिला अधिवक्ता के खिलाफ सूरजभान की अर्जी खारिज
0 अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल के खिलाफ दी थी अवमानना अर्जी
इलाहाबाद। पूर्व एमएलसी सूरज भान करवरिया को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता के खिलाफ दी गई अवमानना की उनकी अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सूरजभान की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने सूरजभान की जमानत पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तिथि नियत की है।
जवाहर पंडित हत्याकांड में जेल में बंद सूरजभान करवरिया ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी है। अर्जी पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने अन्य संबंधित पक्षकारों के साथ ही प्रदेश सरकार की तत्कालीन विशेष अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल को भी नोटिस जारी किया था। जमानत पर सुनवाई के दौरान सूरजभान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में एक प्रार्थनापत्र देकर कहा कि अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल को 30 मार्च 2017 को विशेष अधिवक्ता के पद से सरकार ने हटा दिया है। इसके बावजूद वह जमानत प्रार्थनापत्र की सुनवाई पर 12 मई 2017 को स्वयं को विशेष अधिवक्ता बताते हुए उपस्थित हुईं और जमानत का विरोध किया। अर्जी में कहा गया कि ऐसा उन्होंने जानबूझकर सुनवाई को विलंबित करने के इरादे से किया है। उनका कृत्य आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
कोर्ट ने इस प्रार्थनापत्र पर अधिवक्ता स्वाती से स्पष्टीकरण मांगा था। सफाई में महिला अधिवक्ता ने कहा कि उनको स्पेशल काउंसिल के पद से हटाए जाने की कोई सूचना नहीं थी। सरकार या उसके किसी प्राधिकारी ने ऐसी सूचना नहीं दी थी। पहली बार उनको एक जून 2017 को इसकी जानकारी दी गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने तथा प्रस्तुत दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि उक्त प्रार्थनापत्र से स्पष्ट है कि याची ने अधिवक्ता पर दबाव डालने के लिए ऐसा प्रार्थनापत्र दिया है। कोर्ट ने प्रार्थनापत्र निरस्त करते हुए कहा कि अधिवक्ता स्वाती इस मामले की वादी की ओर से भी अधिवक्ता नियुक्त हैं और सरकार ने उनकी इसकी नियुक्ति पर कोई आपत्ति नहीं की है। इसलिए उनके द्वारा किसी प्रकार की अवमानना या व्यवसायिक कदाचार का मामला नहीं पाया जाता है।
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जेल में न होते तो लगता हर्जाना
प्रार्थनापत्र खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार का प्रार्थनापत्र दाखिल करने पर अदालत याची अभियुक्त पर हर्जाना लगाती, मगर चूंकि वह पहले से ही 28 अप्रैल 2015 से जेल में बंद हैं, इसलिए ऐसा आदेश नहीं दिया जा रहा है।
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0 अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल के खिलाफ दी थी अवमानना अर्जी
इलाहाबाद। पूर्व एमएलसी सूरज भान करवरिया को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता के खिलाफ दी गई अवमानना की उनकी अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सूरजभान की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने सूरजभान की जमानत पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तिथि नियत की है।
जवाहर पंडित हत्याकांड में जेल में बंद सूरजभान करवरिया ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी है। अर्जी पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने अन्य संबंधित पक्षकारों के साथ ही प्रदेश सरकार की तत्कालीन विशेष अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल को भी नोटिस जारी किया था। जमानत पर सुनवाई के दौरान सूरजभान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में एक प्रार्थनापत्र देकर कहा कि अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल को 30 मार्च 2017 को विशेष अधिवक्ता के पद से सरकार ने हटा दिया है। इसके बावजूद वह जमानत प्रार्थनापत्र की सुनवाई पर 12 मई 2017 को स्वयं को विशेष अधिवक्ता बताते हुए उपस्थित हुईं और जमानत का विरोध किया। अर्जी में कहा गया कि ऐसा उन्होंने जानबूझकर सुनवाई को विलंबित करने के इरादे से किया है। उनका कृत्य आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है।
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कोर्ट ने इस प्रार्थनापत्र पर अधिवक्ता स्वाती से स्पष्टीकरण मांगा था। सफाई में महिला अधिवक्ता ने कहा कि उनको स्पेशल काउंसिल के पद से हटाए जाने की कोई सूचना नहीं थी। सरकार या उसके किसी प्राधिकारी ने ऐसी सूचना नहीं दी थी। पहली बार उनको एक जून 2017 को इसकी जानकारी दी गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने तथा प्रस्तुत दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि उक्त प्रार्थनापत्र से स्पष्ट है कि याची ने अधिवक्ता पर दबाव डालने के लिए ऐसा प्रार्थनापत्र दिया है। कोर्ट ने प्रार्थनापत्र निरस्त करते हुए कहा कि अधिवक्ता स्वाती इस मामले की वादी की ओर से भी अधिवक्ता नियुक्त हैं और सरकार ने उनकी इसकी नियुक्ति पर कोई आपत्ति नहीं की है। इसलिए उनके द्वारा किसी प्रकार की अवमानना या व्यवसायिक कदाचार का मामला नहीं पाया जाता है।
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जेल में न होते तो लगता हर्जाना
प्रार्थनापत्र खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार का प्रार्थनापत्र दाखिल करने पर अदालत याची अभियुक्त पर हर्जाना लगाती, मगर चूंकि वह पहले से ही 28 अप्रैल 2015 से जेल में बंद हैं, इसलिए ऐसा आदेश नहीं दिया जा रहा है।