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प्रधानाचार्य-दरोगा पर लगा 50-50 हजार हर्जाना

Sat, 27 Jul 2019 12:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2019 12:27 AM IST
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50-50 thousand damages on Principal
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प्रधानाचार्य, दरोगा पर लगा 50-50 हजार हर्जाना
झूठी शिकायत पर प्रधानाचार्य, बिना जांच चार्जशीट दाखिल करने वाले दरोगा पर हाईकोर्ट ने की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। झूठी शिकायत और मनमानी विवेचना करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केएन काटजू इंटर कॉलेज प्रयागराज के प्रधानाचार्य राम नारायन द्विवेदी और शिवकुटी थाने में तैनात दरोगा विवेचनाधिकारी शिवचरण राम पर 50-50 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने दोनों के कार्य को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार देते हुए याची के खिलाफ दाखिल चार्जशीट और न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी सम्मन आदेश को रद्द कर दिया है।
नवल डे भारती की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एसके सिंह ने कहा कि लोगों का कानून-व्यवस्था में भरोसा बना रहे इसके लिए डीजीपी पुलिस विवेचना के तरीके पर दिशा निर्देश जारी करें। याची के खिलाफ प्रधानाचार्य ने राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा 2016 की द्वितीय पाली में उत्तर पुस्तिका लेकर भाग जाने के आरोप में कीडगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। याची का कहना था कि उसने परीक्षा के बाद पुस्तिका परीक्षक को दे दी थी। विवेचना कर रही पुलिस ने उत्तर पुस्तिका बरामद नहीं की। बिना ठोस दस्तावेजी साक्ष्य के सिर्फ बयान के आधार पर चार्जशीट दाखिल कर दी और मजिस्ट्रेट ने प्रोफार्मा आदेश भरकर सम्मन जारी कर दिया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक आदेश प्रोफार्मा आदेश नहीं होने चाहिए। विवेक का इस्तेमाल कर आदेश जारी किया जाना चाहिए। विवेचक ने किसी प्रकार का साक्ष्य एकत्र करने की कोशिश नहीं की। यह भी नहीं देखा कि परीक्षा स्थल पर सीसीटीवी कैमरा लगा था या नहीं। बिना सबूत चार्जशीट दाखिल कर दी।
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कोर्ट का कहना था कि अपराध की विवेचना संविधान के अनुच्छेद 20 एवं 21 के तहत जीवन के मूल अधिकार का हिस्सा है। विवेचना निष्पक्ष, भेदभाव रहित और कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। इस मामले में परीक्षा अधिनियम 1982 की धारा 3/10 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जो अस्तित्व में ही नहीं है। इस स्थिति में किसी प्रकार का अपराध नहीं बनता है।
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कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के मामले में पीड़ित को हर्जाना पाने का अधिकार है। कोर्ट ने दो माह में हर्जाना बैंक ड्राफ्ट के जरिये महानिबंधक के समक्ष जमा करने का आदेश दिया है। हर्जाने की राशि में से 80 हजार रुपये याची को और 20 हजार रुपये लीगल एड कमेटी को देने का निर्देश दिया है।
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