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इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला, न्यायिक प्रक्रिया लंबित रहते नहीं मिलेगी ग्रच्युटी
Sun, 12 May 2019 03:20 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 12 May 2019 03:20 AM IST
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allahabad high court
इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक या विभागीय प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान वह ग्रेच्युटी (डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी) पाने का हकदार नहीं है।
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इस प्रश्न को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की ही दो खंडपीठों के फैसलों में मतभिन्नता थी। इसकी वजह से एकल न्यायपीठ ने इस मामले में दाखिल कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए प्रकरण तीन जजों की पूर्णपीठ को संदर्भित कर दिया।
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शिवगोपाल, कालिका प्रसाद सहित अन्य कई याचिकाओं पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल, न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की।
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याचीगण सरकारी कर्मचारी हैं और उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया लंबित रहने के कारण रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोक दी गई। इसके खिलाफ हाईकोर्ट मेें याचिकाएं दाखिल की गईं। एकल न्यायपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान पता चला कि ऐसे मामलों में ग्रेच्युटी के भुगतान को लेकर दो खंडपीठों के अलग-अलग निर्णय हैं।
जयप्रकाश केस और फेनी सिंह केस में ग्रेच्युटी नहीं दिए जाने और ग्रेच्युटी दिए जाने को लेकर निर्णय दिए गए हैं। इसके मद्देनजर एकलपीठ ने मामला पूर्णपीठ को सुनवाई के लिए संदर्भित कर दिया।
पूर्णपीठ ने इस विधिक प्रश्न पर विचार करते हुए कहा कि इस मामले में यूपी सिविल सर्विसेज (दसवां संशोधन) का रेग्युलेशन 919 (ए) महत्वपूर्ण है। रेग्युलेशन के मुताबिक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक या विभागीय प्रक्रिया या प्रशासनिक अधिकरण के समक्ष किसी जांच के लंबित रहते, जिसमें आपराधिक केस भी शामिल है, उसे डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी नहीं दी जा सकती है। जयप्रकाश केस में खंडपीठ ने इसी रेग्युलेशन के आधार पर ग्रेच्युटी नहीं दिए जाने का निर्णय दिया है।