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सीबीआई पहले भी आयोग से ले जा चुकी है दस्तावेज
Updated Mon, 25 Dec 2017 01:49 AM IST
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सीबीआई पहले भी आयोग से ले जा चुकी है दस्तावेज
0 उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में खंगाले गए थे पीसीएस परीक्षा के अभिलेख
0 भर्ती में बड़े पैमाने पर लगे थे धांधली के आरोप, जांच तो हुई पर कार्रवाई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में भर्तियों में धांधली के आरोप अनिल यादव के कार्यकाल के पहले से लगते रहे हैं। 12 साल पहले सीबीआई ने आयोग में पीसीएस परीक्षा से जुड़े अभिलेख खंगाले थे। सीबीआई के अफसर कई दस्तावेज अपने साथ ले गए थे। जांच तो हुई थी लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि काफी दबाव के बाद सीबीआई ने आयोग में जांच की थी। पहले तो सीबीआई ने भी जांच से इनकार कर दिया था लेकिन मुद्दा जब सदन में उठा और सरकार पर सवाल उठने लगे तो सीबीआई के अफसरों ने आयोग में पहुंचकर जांच की थी।
तत्कालीन एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने आरोप लगाया था कि 1995 में राज्य सम्मिलित सेवा प्रतियोगी परीक्षा में शैक्षिक सेवा महिला शाखा के तहत पिछड़ा वर्ग के 38 और अनुसूचित जाति के 42 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। लिखित परीक्षा में 288 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को तो साक्षात्कार के लिए बुलाया गया लेकिन उनसे अधिक अंक पाने वाले 13 अभ्यर्थियों को नहीं बुलाया गया। सीएम और पीएम को पत्र लिखे जाने के बाद शासन ने सीबीआई जांच का निर्णय लिया था। इसके लिए नौ मई 2003 को केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर जांच शुरू कराने का आग्रह किया गया था। हालांकि 13 सितंबर 2004 को सीबीआई की ओर से यह कहते हुए जांच से इनकार कर दिया गया था कि आयोग और उसके कर्मचारी सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आते हैं।
सीबीआई का जवाब मिलने के बाद विवाद बढ़ गया और एमएलसी ने मुद्दा सदन में उठा दिया। साथ ही सीबीआई के निदेशक को भी साक्ष्य सहित पत्र भेजकर जांच की मांग की। मामला बढ़ने पर 2005 में सीबीआई के अफसरों ने आयोग में जाकर संबंधित परीक्षा से जुड़े दस्तावेज खंगाले। आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. जेबी सिन्हा ने 22 जुलाई 2005 को विशेष सचिव कार्मिक अनुभाग को पत्र लिखकर बताया कि सीबीआई के इंस्पेक्टर ने चार जनवरी 2005 को आयोग कार्यालय से संपर्क किया था और सात दिन बाद यानी 11 फरवरी को सभी अभिलेख सीबीआई की ओर प्रतिनियुक्त कांस्टेबल को उपलब्ध करा दिए गए लेकिन इसके बाद मामले की जांच के संदर्भ में सीबीआई की ओर से कार्रवाई की कोई सूचना आयोग को नहीं दी गई। फिलहाल एक बार और सीबीआई ने जांच की तैयारी कर ली है। अब देखना है कि सीबीआई जांच के दायरे में ये पुराने मामले आते हैं या नहीं।
0 उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में खंगाले गए थे पीसीएस परीक्षा के अभिलेख
0 भर्ती में बड़े पैमाने पर लगे थे धांधली के आरोप, जांच तो हुई पर कार्रवाई नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में भर्तियों में धांधली के आरोप अनिल यादव के कार्यकाल के पहले से लगते रहे हैं। 12 साल पहले सीबीआई ने आयोग में पीसीएस परीक्षा से जुड़े अभिलेख खंगाले थे। सीबीआई के अफसर कई दस्तावेज अपने साथ ले गए थे। जांच तो हुई थी लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि काफी दबाव के बाद सीबीआई ने आयोग में जांच की थी। पहले तो सीबीआई ने भी जांच से इनकार कर दिया था लेकिन मुद्दा जब सदन में उठा और सरकार पर सवाल उठने लगे तो सीबीआई के अफसरों ने आयोग में पहुंचकर जांच की थी।
तत्कालीन एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने आरोप लगाया था कि 1995 में राज्य सम्मिलित सेवा प्रतियोगी परीक्षा में शैक्षिक सेवा महिला शाखा के तहत पिछड़ा वर्ग के 38 और अनुसूचित जाति के 42 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। लिखित परीक्षा में 288 अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को तो साक्षात्कार के लिए बुलाया गया लेकिन उनसे अधिक अंक पाने वाले 13 अभ्यर्थियों को नहीं बुलाया गया। सीएम और पीएम को पत्र लिखे जाने के बाद शासन ने सीबीआई जांच का निर्णय लिया था। इसके लिए नौ मई 2003 को केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर जांच शुरू कराने का आग्रह किया गया था। हालांकि 13 सितंबर 2004 को सीबीआई की ओर से यह कहते हुए जांच से इनकार कर दिया गया था कि आयोग और उसके कर्मचारी सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आते हैं।
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सीबीआई का जवाब मिलने के बाद विवाद बढ़ गया और एमएलसी ने मुद्दा सदन में उठा दिया। साथ ही सीबीआई के निदेशक को भी साक्ष्य सहित पत्र भेजकर जांच की मांग की। मामला बढ़ने पर 2005 में सीबीआई के अफसरों ने आयोग में जाकर संबंधित परीक्षा से जुड़े दस्तावेज खंगाले। आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. जेबी सिन्हा ने 22 जुलाई 2005 को विशेष सचिव कार्मिक अनुभाग को पत्र लिखकर बताया कि सीबीआई के इंस्पेक्टर ने चार जनवरी 2005 को आयोग कार्यालय से संपर्क किया था और सात दिन बाद यानी 11 फरवरी को सभी अभिलेख सीबीआई की ओर प्रतिनियुक्त कांस्टेबल को उपलब्ध करा दिए गए लेकिन इसके बाद मामले की जांच के संदर्भ में सीबीआई की ओर से कार्रवाई की कोई सूचना आयोग को नहीं दी गई। फिलहाल एक बार और सीबीआई ने जांच की तैयारी कर ली है। अब देखना है कि सीबीआई जांच के दायरे में ये पुराने मामले आते हैं या नहीं।
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