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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   38 administrative officers took command on Maghi Purnima, situation remained under control despite the crowd.

Mahakumbh : माघी पूर्णिमा पर 38 प्रशासनिक अफसरों की तैनाती रही कारगर, करोड़ों की भीड़ के बावजूद आसान रही राह

Wed, 12 Feb 2025 12:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Feb 2025 12:26 PM IST
सार

महाकुंभ पर प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त होने के कारण भीड़ बढ़ने के बावजूद यातायात सामान्य रहा। बुधवार को माघी पूर्णिमा पर पूरे मेले क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है। संगम सहित सभी 42 घाटों पर भीड़ का दबाव कम रहा और लोगों ने सुरक्षित तरीके से स्नान किया। चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात रही। 

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38 administrative officers took command on Maghi Purnima, situation remained under control despite the crowd.
संगम में स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघी पूर्णिमा स्नान पर्व पर महाकुंभ क्षेत्र में आस्था उमड़ी। हर घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। हालांकि, जोनल प्लान लागू करने का नतीजा रहा कि संगम तथा झूंसी की तरफ ऐरावत घाट पर अपेक्षाकृत दबाव कम रहा। संगम स्नान के लिए लगातार भीड़ बनी हुई है। ऐसे में माघी पूर्णिमा स्नान पर दो करोड़ लोगों के आने की उम्मीद की जा रही थी और ऐसा ही नजारा दिखा। मंगलवार रात से ही भारी भीड़ आने लगी थी और बुधवार की सुबह तो रेला उमड़ा। इसे देखते हुए डायवर्जन एवं जोनल प्लान को पूरी तरह से लागू किया गया।

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वाराणसी की तरफ से आने वाले वाहनों को अंदावा की तरफ ही रोक दिया गया था। उधर, से आने वाले लोगों को छतनाग घाट की तरफ मोड़ दिया गया। इसी तरह से झूंसी रेलवे एवं बस स्टेशन से आने वाले श्रद्धालुओं को टीकरमाफी मार्ग से मोड़कर मेले में भेजा रहा था। साथ ही इनसे नजदीकी गंगा घाट पर स्नान की अपील की जाती रही। इस बाबत जगह-जगह बेरिकेडिंग भी की गई थी।

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इसी तरह की व्यवस्था अन्य मार्गों से आने वाले स्नानार्थियों के लिए भी की गई थी। कंट्रोल रूम से भी लगातार अपील की जाती रही कि नजदीकी घाट पर ही स्नान करें। इसका नतीजा रहा कि गंगा के दोनों तट पर करीब 12 किमी में बने घाटों पर भीड़ बंट गई। इससे संगम तथा झूंसी की तरफ ऐरावत घाट पर बहुत दबाव नहीं दिखा। इसके अलावा घाटों पर सुरक्षा कर्मियों के अलावा गंगा दूतों, नागरिक सुरक्षा कोर समेत अन्य संस्थाओं के सदस्य भी मौजूद रहे जो स्नानार्थियों को स्नान के बाद रुकने नहीं दे रहे थे। इससे भी भीड़ निकलती गई।

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