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छोटू उस्तादों ने जिंदादिली से दी कोरोना को मात, 3156 बच्चे हुए स्वस्थ, सिर्फ पांच पहुंचे अस्पताल

Sat, 22 May 2021 01:11 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 22 May 2021 01:11 AM IST
सार

  • 3151 बच्चे होम आइसोलेशन में रहकर संक्रमणमुक्त हुए

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3156 children beat Corona, only five reach in hospital
कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर के खौफनाफ आंकड़े गवाह हैं कि बच्चों ने जिंदादिली से संक्रमण को मात दी। अप्रैल और मई महीने के 51 दिनों में 3156 बच्चों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इन छोटू उस्तादों में सिर्फ पांच अस्पतालों तक पहुंचे, कारण बनी थी अन्य बीमारियां। 3151 बच्चे होम आइसोलेशन में रहकर संक्रमणमुक्त हुए। बड़ों की तुलना में बच्चों के स्वस्थ होने का ग्राफ राहत देने वाला है। 

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3156 children beat Corona, only five reach in hospital
बच्चों में कोरोना के लक्षण - फोटो : Pixabay

जिले में कुल संक्रमितों के आंकड़ों में एक से 12 वर्ष और 13 से 18 वर्ष तक के बच्चों में संक्रमण का प्रसार कम हुआ। कुल संक्रमितों 45972 में बच्चों का प्रतिशत लगभग आठ यानी 3156 रहा। दूसरी लहर में बच्चों के कोरोना संक्रमित होने के मामले खंगालने पर पता चला कि एक से 30 अप्रैल के बीच संक्रमित 2851 में एक से 12 वर्ष आयु वर्ग के 1308 बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जबकि मई के 21 दिनों में 13 से 18 आयु वर्ग के 1553 बच्चे कोरोना संक्रमित हुए। वहीं मई के 21 दिनों में कुल संक्रमित 5558 में सिर्फ 305 बच्चों में कोरोना की पुष्टि हुई। इन बच्चों में एक को भी अस्पताल ले जाने की नौबत नहीं आई। मामूली सर्दी-जुकाम, बुखार की शिकायत या संक्रमित परिवारीजनों के संपर्क में आने के कारण वे संक्रमित हुए। इनमें एक से 12 वर्ष आयु वर्ग के 143 और 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 162 बच्चे शामिल हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : prayagraj

पांच भर्ती बाल संक्रमितों में चार हुए स्वस्थ, एक की बुखार से गई जान

अप्रैल महीने में 2851 बच्चों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई पर पांच ही एलथ्री एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराए गए। सभी निर्धारित अवधि से पहले स्वस्थ होकर घर गए। बुखार, दौरे आने की शिकायत पर भर्ती एक ढाई साल के बच्चे की मौत उपचार के दौरान हुई। उसकी मौत का कारण फेफड़ों का संक्रमण नहीं बल्कि बार-बार आने वाले दौरों से बढ़ी दुश्वारियां रहीं।

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children - फोटो : istock

मजबूत मेटाबोलिक सिस्टम से जीते कोरोना संक्रमण से जंग

सरोजनी नायडू बाल रोग चिकित्सालय (चिल्ड्रेन अस्पताल) के अधीक्षक डॉ. मुकेश बीर सिंह के मुताबिक बच्चों का मेटाबोलिक सिस्टम बहुत मजबूत होता है। वे संक्रमित तो होते हैं, लेकिन रिकवरी रेट भी अच्छा रहता है। अस्पताल की ओपीडी में आए कोरोना लक्षण वाले बच्चों को एसआरएन ही भेजा जाता है। कुछ बच्चों में निमोनिया के लक्षण थे, जिनकी जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई पर वे ठीक भी तेजी से हुए।

तेज रही रिकवरी, पोस्ट कोविड दिक्कतें भी न के बराबर एलथ्री एसआरएन अस्पताल के सह प्रभारी कोविड डॉ. सुजीत वर्मा के मुताबिक अप्रैल में जब कोरोना संक्रमण पीक पर था तब पांच कोरोना संक्रमित बच्चे भर्ती किए गए। एक नवजात सहित चार बच्चे स्वस्थ हुए और उनकी रिपोर्ट भी निगेटिव आई। वहीं एक ढाई साल के बच्चे की अन्य बीमारियों से जान गई। उसे दौरे आ रहे थे, बुखार था, जो संक्रमण पर भारी पड़ा। डिस्चार्ज किए गए बच्चों में पोस्ट कोविड समस्याएं सामने नहीं आई हैं।

कोरोना संक्रमण काल के अप्रैल और मई महीने में जिन बच्चों की कोविड रिपोर्ट आई, उनमें जटिलताएं कम रहीं। बच्चों ने जिस तरह कोरोना को मात दी, वह मिसाल बनी है। संक्रमणमुक्त होने के बाद वह फिर अस्पताल नहीं गए। कोरोना से बच्चों की मौतें तो नहीं हुई अन्य बीमारियों से जान गंवाने वालों बच्चों की मृत्यु दर में भी कमी आई। - डॉ. ऋषि सहाय, जिला सर्विलांस अधिकारी
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