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न कड़ी धूप की चिंता न धूल के उड़ते गुबार की-AZAMGARH

Tue, 19 Mar 2019 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2019 01:15 AM IST
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न कड़ी धूप की चिंता न धूल के उड़ते गुबार की-AZAMGARH
प्रयागराज। सहजता, सादगी, अपनापन के साथ लीक से हटकर करने की कोशिश। कुछ ऐसी ही छाप प्रियंका गांधी ने सोमवार को अपने चुनावी दौरे के पहले दिन जनता के जेहनोदिल पर छोड़ी। न कड़ी धूप की परवाह न उड़ते धूल के गुबार की चिंता। सिरसा में गंगा घाट से पैदल चलकर बस्ती में पहुंचीं प्रियंका ने हर जगह जनता से दूरियों को कम किया और अमीर-गरीब के फर्क मिटाए। इस दौरान उनके पीछे युवाओं, किसानों, गरीबों, महिलाओं की भीड़ उमड़ती रही, स्वागत में कहीं बैंडबाजा बजता रहा तो कहीं छतों-बारजों से गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश होती रही।
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सिरसा अतिथिगृह में जनसभा को संबोधित करने के बाद उनकी फ्लीट लग चुकी थी। एसपीजी ने सुरक्षा घेरे के बीच से उनको निकालकर कार में जैसे ही बैठाने की कोशिश की, सड़कों पर घंटों से प्रतीक्षारत प्रियंका से मिलने के लिए बेकरार भीड़ दीदी-दीदी कह कर पुकारने, शोर मचाने लगी। फिर क्या था, कार का गेट खुला ही रह गया और मुस्कुराती, हाथ हिलाकर अभिवादन करतीं प्रियंका सुरक्षा घेरा तोड़कर भीड़ के बीच से होकर लोगों के दरवाजे -दरवाजे दस्तक देने लगीं। इस दौरान एसपीजी के जवानों और पुलिस अफसरों के पसीने छूटने लगे। धक्कामुक्की से स्थिति असहज होने लगी, लेकिन वहां प्रियंका और भीड़ के बीच के फासले खत्म हो चुके थे। किसी को एहसास ही नहीं था कि प्रियंका उनके इतनी पास होंगी। गंगा पूजा के लिए हरिहरपुर गांव से सामान खरीदने के लिए सिरसा बजार आईं सुशीला, छोहारा देवी, बुंदेला देवी , गुजराती देवी उसी भीड़ में दुकान के सामने खड़ी होकर प्रियंका को अपनी ओर बुला रही थीं। प्रियंका एक पल में पुलिस का रस्सा उठाकर आगे बढ़ीं और दुकान पर पहुंचकर गांव की उन महिलाओं से हाथ मिलाने लगीं। उनके दुख-दर्द को साझा करने लगीं। सुशीला की आंखों में प्रेम के आंसू छलकने लगे। उनका कहना था कि प्रियंका से हाथ मिलाने और इतने अपनेपन के साथ बात करने का मौका मिलेगा, कभी सोचा नहीं था।
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इसी तरह रास्ते में राजकुमारी देवी आम का जूस और फूलों का गुलदस्ता लेकर उनकी राह देख रही थीं। एसपीजी की नजर पड़ी तो एक जवान ने उनके हाथ का ग्लास छीनने की कोशिश की, तभी प्रियंका लपक पड़ीं और राजकुमारी के हाथ का जूस लेकर पीने लगीं। लोग भावुक हो गए। आगे बढ़ने पर पड़ाव चौराहे पर बैसाखी के सहारे 70 वर्षीया सुशीला देवी भी प्रियंका से मिलने के लिए खड़ी थीं। प्रियंका उनके पास भी पहुंचीं। सुशीला ने बताया कि पैर टूट गया है। पैसे के अभाव में इलाज नहीं हो पा रहा है। प्रियंका ने उनके बेटे पवन का मोबाइल नंबर लिया और भरोसा दिलाया कि उनका इलाज होगा। वह घर-घर लोगों के पास पहुंचती रहीं और छतों-दुकानों, मकानों के सामने प्रियंका के जयकारे गूंजते रहे। फिर वह इसी तरह टाल चौराहे तक करीब एक किमी दूरी तक सड़क की दोनों पटरियों पर खड़े लोगों से मिलती रहीं। इस दौरान एक बच्ची उनके साथ थी। पप्पू समोसा वाले के पास उनकी कार आकर लगी और वह हाथ हिलाते हुए सवार होकर लाक्षागृह के लिए रवाना हो गईं।
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