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शहर के 30 मोहल्ले मेला प्राधिकरण के हवाले
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:32 AM IST
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संगम क्षेत्र के आसपास के दो दर्जन मोहल्ले तथा करीब आधा दर्जन गांव उत्तर प्रदेश प्रयागराज मेला प्राधिकरण के हवाले हो गए हैं। प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का निर्धारण कर लिया गया है। डीएम सुहास एलवाई ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इसमें सदर, फूलपुर और करछना तहसील के 30 गांव एवं मोहल्ले स्थायी तौर पर शामिल किए गए हैं। अब इन क्षेत्रों में विकास तथा अन्य सभी तरह के कार्य प्राधिकरण के अंतर्गत होंगे।
कुंभ, महाकुंभ तथा माघ मेला को ध्यान में रखकर प्राधिकरण का गठन किया गया है। ताकि, आयोजनों की भव्यता था महात्म्य को देखते हुए क्षेत्र के विकास की स्थाई व्यवस्था की जा सके। इसी क्रम में प्राधिकरण बोर्ड के गठन के साथ अफसरों की तैनाती भी कर दी गई है। अब क्षेत्र का निर्धारण भी हो गया है। इससे कुंभ, माघ मेला के लिहाज से विकास कार्य कराने का रास्ता साफ हो गया है। इस बार कुंभ का आयोजन 3200 हेक्टेयर में होना है। पूर्व के आयोजनों की तुलना में क्षेत्र का डेढ़गुना विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य शुरू हैं तो आयोजनों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। अधिसूचना जारी होने के बाद यह पूरा क्षेत्र स्थायी तौर पर प्राधिकरण के अंतर्गत आ गया है। इसमें सदर तहसील के 19, फूलपुर के पांच तथा करछना के छह मोहल्ले एवं गांव शामिल किए गए हैं।
सदर तहसील के अंतर्गत कुरैशी उपरहार, कुरैशी कछार, कीडगंज उपरहार, कीडगंज कछार, बाराही पट्टी कछार, बम्हन पट्टी कछार, मुस्तफाबाद मुनकरमा कछार, बक्शी कछार, अल्लापुर बक्शी कछार, चकशेर खॉ कछार, बक्शी उपरहार, बघाड़ा जहीरूद्दीन, करनपुर, बघाड़ा बालन, सादियाबाद उपरहार, सादियाबाद कछार, चांदपुर सलोरी कछार, पट्टी चिल्ला (शिवकुटी) कछार तथा आराजी बारूदखाना कछार मोहल्ले शामिल किए गए हैं। फूलपुर के बेला सैलाबी कछार, बदरा, झूंसी कोहना, हवेलिया, उस्तापुर महमूदाबाद कछार को शामिल किया गया है। करछना तहसील के अंतर्गत मवैया कछार, देवरख कछार, अरैल कछार, माधोपुर कछार, जहॉगीराबाद कछार, महेवा पट्टी पूरब कछार मोहल्ले शामिल किए गए हैं।
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आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे तीस मोहल्ले
0 प्राधिकरण के अंतर्गत पूरे क्षेत्र का होगा विकास, तैयार हो रहा खाका
0 सड़क मार्ग से जुड़ेंगे सभी 30 मोहल्ले, अन्य सुविधाएं भी बढ़ेंगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। कुंभ को यूनेस्को की सूची में पहले ही शामिल किया जा चुका है। संगम को अब विश्व पर्यटन के नक्शे में शामिल कराने की तैयारी है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले सभी 30 मोहल्लों और गांवों में इसी लिहाज से स्थायी तथा अस्थाई विकास किए जाएंगे। इसके अंतर्गत सभी मोहल्लों को सड़क मार्ग से जोड़ने की तैयारी है। कई अन्य काम भी प्रस्तावित हैं। कुंभ-2019 के अंतर्गत इसका बड़ा काम हो चुका है। शेष कार्य कुंभ के बाद किए जाएंगे।
कुंभ में 192 देश के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। 400 से अधिक प्रवासी भारतीय भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। कुंभ के बाद भी संगम पर्यटकों के आकर्षण केंद्र बने रहे इसके लिए प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया किपर्यटकों के लिए आवास, प्रमुख स्थलाें का सौंदर्यीकरण, संपर्क मार्ग, आवागमन की स्थायी सुविधा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति आदि सुविधाएं बहाल की जाएंगी। मेलाधिकारी ने बताया कि ये सभी सुविधाएं विश्व पर्यटन को ध्यान में रखकर विकसित की जाएंगी।
मेला प्राधिकरण के अंतर्गत किसी तरह के निर्माण के लिए जमीन की कमी बाधा नहीं बनेगी। प्राधिकरण के अंतर्गत जो 30 मोहल्ले तथा गांव शामिल किए गए हैं उनमें से बड़ा भूभाग राजकीय आस्थान का है। कानून में संशोधन कर प्राधिकरण इन भूभाग पर स्थाई कार्य करा सकेगा। हालांकि, इन भूखंडों पर से अतिक्रमण तथा अवैध कब्जा को हटाने की चुनौती होगी।
प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले 30 मोहल्लों और गांवों में अब कोई भी निर्माण कुंभ, माघ मेला को ध्यान में रखकर होगा। ऐसा कोई भी निर्माण नहीं होगा जिससे इन आयोजनों में बाधा उत्पन्न हो। ऐसे में लोगों को किसी तरह के स्थाई निर्माण के लिए प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। क्षेत्र में उद्योग भी इन आयोजनों को ध्यान में रखकर शुरू किए जाएंगे। यानी, उद्योग के लिए भी लोगों को प्राधिकरण की अनुमति लेनी होगी।
मेला प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत द्वादश बेणी माधव समेत कई धार्मिक स्थल हैं, जहां पूरे देश से लोग आते हैं। झूंसी तथा आयोग में ध्यान एवं योग का भी बड़ा केंद्र हैं। इसके अलावा भी कई स्थल भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन सभी स्थलों का विकास किया जाएगा। बारिश के दिनों छोड़कर अन्य दिनों में संगम नोज पर बिजली, पेयजल, शौचालय, परिवहन आदि सुविधा की मुहैया कराई जाएगी। पूर्व में माघ मेला, कुंभ के बाद ये सुविधाएं भी हटा दी जाती थीं। इसके अलावा परेड तथा अन्य प्रमुख स्थलों पर पूरे वर्ष विविध आयोजन भी कराए जाएंगे।
संगम क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पहले ही मेला प्राधिकरण के हवाले हो चुकी है। आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र में इसके अलावा पेयजल, सड़क, बिजली आदि की सुविधा प्राधिकरण मुहैया कराएगा। इसके लिए जरूरी राजस्व का इंतजाम भी प्राधिकरण को खुद करना होगा। इसके लिए भी प्राधिकरण कई प्रावधान लागू करेगा। हालांकि, इसमें गृहकर, पेयजल पर कर आदि कौन लेगा, क्या कैंटोमेंट बोर्ड की तरह वहां पार्षदों-प्रधानों की अलग व्यवस्था होगी, पुलिस प्रशासन किसके अधिकार में होगा समेत कई सवाल अब भी बने हुए हैं। किसके पास क्या-क्या अधिकार होंगे, कार्यों का वर्गीकरण आदि बिंदुओं पर जिला प्रशासन, एडीए तथा नगर निगम के अफसरों से वार्ता की जा रही है। कुंभ मेलाधिकारी का कहना है कि प्राधिकरण की नियमावली तैयार की जा रही है। उसमें सभी प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
कुंभ में प्रशासन के साथ संस्थाओं और क्लबों की सीधी भागीदारी होगी। रोटरी, इनरव्हील, लायंस क्लब आदि संस्थाओं को आयोजन से जोड़ने की योजना है। जागरूकता अभियान में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। लोगों की मदद के लिए भी प्रशासन की ओर से अलग-अलग टीम बनाई जा रही है। इसमें भी इन संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इस मकसद से संस्था प्रतिनिधियों के साथ जल्द बैठक होगी।
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कुंभ, महाकुंभ तथा माघ मेला को ध्यान में रखकर प्राधिकरण का गठन किया गया है। ताकि, आयोजनों की भव्यता था महात्म्य को देखते हुए क्षेत्र के विकास की स्थाई व्यवस्था की जा सके। इसी क्रम में प्राधिकरण बोर्ड के गठन के साथ अफसरों की तैनाती भी कर दी गई है। अब क्षेत्र का निर्धारण भी हो गया है। इससे कुंभ, माघ मेला के लिहाज से विकास कार्य कराने का रास्ता साफ हो गया है। इस बार कुंभ का आयोजन 3200 हेक्टेयर में होना है। पूर्व के आयोजनों की तुलना में क्षेत्र का डेढ़गुना विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य शुरू हैं तो आयोजनों की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। अधिसूचना जारी होने के बाद यह पूरा क्षेत्र स्थायी तौर पर प्राधिकरण के अंतर्गत आ गया है। इसमें सदर तहसील के 19, फूलपुर के पांच तथा करछना के छह मोहल्ले एवं गांव शामिल किए गए हैं।
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सदर तहसील के अंतर्गत कुरैशी उपरहार, कुरैशी कछार, कीडगंज उपरहार, कीडगंज कछार, बाराही पट्टी कछार, बम्हन पट्टी कछार, मुस्तफाबाद मुनकरमा कछार, बक्शी कछार, अल्लापुर बक्शी कछार, चकशेर खॉ कछार, बक्शी उपरहार, बघाड़ा जहीरूद्दीन, करनपुर, बघाड़ा बालन, सादियाबाद उपरहार, सादियाबाद कछार, चांदपुर सलोरी कछार, पट्टी चिल्ला (शिवकुटी) कछार तथा आराजी बारूदखाना कछार मोहल्ले शामिल किए गए हैं। फूलपुर के बेला सैलाबी कछार, बदरा, झूंसी कोहना, हवेलिया, उस्तापुर महमूदाबाद कछार को शामिल किया गया है। करछना तहसील के अंतर्गत मवैया कछार, देवरख कछार, अरैल कछार, माधोपुर कछार, जहॉगीराबाद कछार, महेवा पट्टी पूरब कछार मोहल्ले शामिल किए गए हैं।
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0 प्राधिकरण के अंतर्गत पूरे क्षेत्र का होगा विकास, तैयार हो रहा खाका
0 सड़क मार्ग से जुड़ेंगे सभी 30 मोहल्ले, अन्य सुविधाएं भी बढ़ेंगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। कुंभ को यूनेस्को की सूची में पहले ही शामिल किया जा चुका है। संगम को अब विश्व पर्यटन के नक्शे में शामिल कराने की तैयारी है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले सभी 30 मोहल्लों और गांवों में इसी लिहाज से स्थायी तथा अस्थाई विकास किए जाएंगे। इसके अंतर्गत सभी मोहल्लों को सड़क मार्ग से जोड़ने की तैयारी है। कई अन्य काम भी प्रस्तावित हैं। कुंभ-2019 के अंतर्गत इसका बड़ा काम हो चुका है। शेष कार्य कुंभ के बाद किए जाएंगे।
कुंभ में 192 देश के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। 400 से अधिक प्रवासी भारतीय भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। कुंभ के बाद भी संगम पर्यटकों के आकर्षण केंद्र बने रहे इसके लिए प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया किपर्यटकों के लिए आवास, प्रमुख स्थलाें का सौंदर्यीकरण, संपर्क मार्ग, आवागमन की स्थायी सुविधा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति आदि सुविधाएं बहाल की जाएंगी। मेलाधिकारी ने बताया कि ये सभी सुविधाएं विश्व पर्यटन को ध्यान में रखकर विकसित की जाएंगी।
मेला प्राधिकरण के अंतर्गत किसी तरह के निर्माण के लिए जमीन की कमी बाधा नहीं बनेगी। प्राधिकरण के अंतर्गत जो 30 मोहल्ले तथा गांव शामिल किए गए हैं उनमें से बड़ा भूभाग राजकीय आस्थान का है। कानून में संशोधन कर प्राधिकरण इन भूभाग पर स्थाई कार्य करा सकेगा। हालांकि, इन भूखंडों पर से अतिक्रमण तथा अवैध कब्जा को हटाने की चुनौती होगी।
प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले 30 मोहल्लों और गांवों में अब कोई भी निर्माण कुंभ, माघ मेला को ध्यान में रखकर होगा। ऐसा कोई भी निर्माण नहीं होगा जिससे इन आयोजनों में बाधा उत्पन्न हो। ऐसे में लोगों को किसी तरह के स्थाई निर्माण के लिए प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। क्षेत्र में उद्योग भी इन आयोजनों को ध्यान में रखकर शुरू किए जाएंगे। यानी, उद्योग के लिए भी लोगों को प्राधिकरण की अनुमति लेनी होगी।
मेला प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत द्वादश बेणी माधव समेत कई धार्मिक स्थल हैं, जहां पूरे देश से लोग आते हैं। झूंसी तथा आयोग में ध्यान एवं योग का भी बड़ा केंद्र हैं। इसके अलावा भी कई स्थल भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन सभी स्थलों का विकास किया जाएगा। बारिश के दिनों छोड़कर अन्य दिनों में संगम नोज पर बिजली, पेयजल, शौचालय, परिवहन आदि सुविधा की मुहैया कराई जाएगी। पूर्व में माघ मेला, कुंभ के बाद ये सुविधाएं भी हटा दी जाती थीं। इसके अलावा परेड तथा अन्य प्रमुख स्थलों पर पूरे वर्ष विविध आयोजन भी कराए जाएंगे।
संगम क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पहले ही मेला प्राधिकरण के हवाले हो चुकी है। आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र में इसके अलावा पेयजल, सड़क, बिजली आदि की सुविधा प्राधिकरण मुहैया कराएगा। इसके लिए जरूरी राजस्व का इंतजाम भी प्राधिकरण को खुद करना होगा। इसके लिए भी प्राधिकरण कई प्रावधान लागू करेगा। हालांकि, इसमें गृहकर, पेयजल पर कर आदि कौन लेगा, क्या कैंटोमेंट बोर्ड की तरह वहां पार्षदों-प्रधानों की अलग व्यवस्था होगी, पुलिस प्रशासन किसके अधिकार में होगा समेत कई सवाल अब भी बने हुए हैं। किसके पास क्या-क्या अधिकार होंगे, कार्यों का वर्गीकरण आदि बिंदुओं पर जिला प्रशासन, एडीए तथा नगर निगम के अफसरों से वार्ता की जा रही है। कुंभ मेलाधिकारी का कहना है कि प्राधिकरण की नियमावली तैयार की जा रही है। उसमें सभी प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
कुंभ में प्रशासन के साथ संस्थाओं और क्लबों की सीधी भागीदारी होगी। रोटरी, इनरव्हील, लायंस क्लब आदि संस्थाओं को आयोजन से जोड़ने की योजना है। जागरूकता अभियान में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। लोगों की मदद के लिए भी प्रशासन की ओर से अलग-अलग टीम बनाई जा रही है। इसमें भी इन संस्थाओं को शामिल किया जाएगा। इस मकसद से संस्था प्रतिनिधियों के साथ जल्द बैठक होगी।