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लॉकडाउन में फंसी 30 जिंदगियां, कई लोगों ने 150 किमी पैदल चलकर बचाई जान
Sat, 28 Mar 2020 12:30 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 28 Mar 2020 12:30 AM IST
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- फोटो : prayagraj
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मध्यप्रदेश के रीवा, ड्रमंडगंज समेत अन्य इलाकों से मजदूरी के लिए आए 30 परिवार देश व्यापी लॉकडाउन में फंसकर जिंदगी बचाने के लिए जतन कर रहे हैं। नैनी के खरकौनी में इन राजगीर मिस्त्री परिवारों के बच्चे तीन दिन से बिना दूध के पड़े हैं तो अनाज व अन्य खाद्य सामग्री न मिलने से बड़ों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। काम तो मिल ही नहीं रहा है, दुकानें भी पूरी तरह बंद हैं। ऐसे में पेट भरने का संकट उत्पन्न हो गया। तीन परिवारों के 13 लोग शुक्रवार को जान बचाने के लिए पैदल अपने घर ड्रमंडगंज के लिए रवाना हो गए।
नैनी के खरकौनी और अन्य इलाकों में भवन निर्माण में लगे इन मजदूर परिवारों ने शुक्रवार को अपनी मुसीबत बयां की। रीवा के कोरवा गांव निवासी सूयभान अपनी पत्नी सुशीला पिछले तीन महीने से यहां निर्माण कार्यों में लगे हुए थे। उनके साथ व छह वर्षीया पुत्री अनिष्ठा व आठ वर्षीय पुत्र पीयूष भी हैं। सुशीला के मुताबिक दो दिन से दूध व ब्रेड भी नहीं मिल रहा है।
न ट्रेनें चल रही हैं न बसें। निजी वाहन भी किराए पर नहीं मिल रहे हैं। दुकानें न खुलने से राशन भी नहीं मिल पा रहा है। लॉक डाउन में काम सारे ठप हैं। ऐसे में अगर प्रशासन की ओर से उनको मदद नहीं मिली तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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इसी तरह रीवा के ही मांगी गांव निवासी छोटू धरकार, उनकी पत्नी कलावती, पुत्र विकास, पुत्री शिवानी, नंदिनी और भाई राजेश यहां फंसे हुए हैं। इन मजदूरों को खाना व अन्य सामान उपलब्ध कराने वाले रतन लाल मिश्र ने बताया कि एमपी के ही ड्रमंडगंज के 13 परिवार सुबह 11 बजे जान बचाकर यहां से पैदल ही घरों के लिए निकले हैं। रतन के मुताबिक उन्हें यह सफर पूरा करने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। यहां बचे हुए लोग भी पैदल ही घर जाने की तैयारी में जुट गए हैं, ताकि जान बचाई जा सके।
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नैनी के खरकौनी और अन्य इलाकों में भवन निर्माण में लगे इन मजदूर परिवारों ने शुक्रवार को अपनी मुसीबत बयां की। रीवा के कोरवा गांव निवासी सूयभान अपनी पत्नी सुशीला पिछले तीन महीने से यहां निर्माण कार्यों में लगे हुए थे। उनके साथ व छह वर्षीया पुत्री अनिष्ठा व आठ वर्षीय पुत्र पीयूष भी हैं। सुशीला के मुताबिक दो दिन से दूध व ब्रेड भी नहीं मिल रहा है।
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न ट्रेनें चल रही हैं न बसें। निजी वाहन भी किराए पर नहीं मिल रहे हैं। दुकानें न खुलने से राशन भी नहीं मिल पा रहा है। लॉक डाउन में काम सारे ठप हैं। ऐसे में अगर प्रशासन की ओर से उनको मदद नहीं मिली तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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इसी तरह रीवा के ही मांगी गांव निवासी छोटू धरकार, उनकी पत्नी कलावती, पुत्र विकास, पुत्री शिवानी, नंदिनी और भाई राजेश यहां फंसे हुए हैं। इन मजदूरों को खाना व अन्य सामान उपलब्ध कराने वाले रतन लाल मिश्र ने बताया कि एमपी के ही ड्रमंडगंज के 13 परिवार सुबह 11 बजे जान बचाकर यहां से पैदल ही घरों के लिए निकले हैं। रतन के मुताबिक उन्हें यह सफर पूरा करने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। यहां बचे हुए लोग भी पैदल ही घर जाने की तैयारी में जुट गए हैं, ताकि जान बचाई जा सके।