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जवाहर हत्यराकांड मुकदमा वापसी पर निर्णय सुरक्षित
Updated Thu, 06 Dec 2018 10:15 PM IST
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जवाहर हत्याकांड
मुकदमा वापसी पर फैसला सुरक्षित
प्रयागराज। जवाहर हत्याकांड का मुकदमा वापस लेने की अभियोजन की अर्जी पर स्पेशल कोर्ट एमपीएमएल ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में अभियोजन, वादी और बचाव पक्ष की बहस पूरी हो गई। प्रकरण की सुुनवाई कर रहे एडीजे रमेश चन्द्र ने आदेश सुरक्षित कर लिया है और 10 दिसंबर को फैसला सुनाए जाने की तारीख नियत की है। बृहस्पतिवार को बहस का समापन करते हुए विशेष अधिवक्ता रणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 321 के तहत सरकार को अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी मुकदमे को निर्णय के पूर्व वापस ले सकती है।
जवाहर हत्याकांड के मुकदमा वापसी के लिए अभियोजन ने तीन नवंबर 2018 को प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। जिस पर पीड़िता की ओर से पांच नवंबर को आपत्ति दाखिल की गई थी। इसके बाद अभियोजन, वादी और बचाव पक्ष की ओर से बहस की जा रही थी।
सुनवाई के दौरान डीजीसी गुलाब चन्द्र अग्रहरि, पीड़िता की ओर से अधिवक्ता धारा सिंह और लल्लन सिंह यादव, बचाव पक्ष की ओर से तारा चन्द गुप्ता, एलपी द्विवेदी, ओपी दुबे, दयाशंकर मिश्र आदि अधिवक्ताओं ने बहस की। जेल से करवरिया बंधु कोर्ट में उपस्थित हुए।
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मुकदमा वापसी पर फैसला सुरक्षित
प्रयागराज। जवाहर हत्याकांड का मुकदमा वापस लेने की अभियोजन की अर्जी पर स्पेशल कोर्ट एमपीएमएल ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में अभियोजन, वादी और बचाव पक्ष की बहस पूरी हो गई। प्रकरण की सुुनवाई कर रहे एडीजे रमेश चन्द्र ने आदेश सुरक्षित कर लिया है और 10 दिसंबर को फैसला सुनाए जाने की तारीख नियत की है। बृहस्पतिवार को बहस का समापन करते हुए विशेष अधिवक्ता रणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 321 के तहत सरकार को अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी मुकदमे को निर्णय के पूर्व वापस ले सकती है।
जवाहर हत्याकांड के मुकदमा वापसी के लिए अभियोजन ने तीन नवंबर 2018 को प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। जिस पर पीड़िता की ओर से पांच नवंबर को आपत्ति दाखिल की गई थी। इसके बाद अभियोजन, वादी और बचाव पक्ष की ओर से बहस की जा रही थी।
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सुनवाई के दौरान डीजीसी गुलाब चन्द्र अग्रहरि, पीड़िता की ओर से अधिवक्ता धारा सिंह और लल्लन सिंह यादव, बचाव पक्ष की ओर से तारा चन्द गुप्ता, एलपी द्विवेदी, ओपी दुबे, दयाशंकर मिश्र आदि अधिवक्ताओं ने बहस की। जेल से करवरिया बंधु कोर्ट में उपस्थित हुए।
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