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गवाहों से दुबारा जिरह नहीं कर सकें्रे पूर्व विधायक के वकील
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:20 AM IST
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जवाहर पंडित हत्याकांड
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गवाहों से जिरह नहीं कर सकेंगे पूर्व विधायक के वकील
0 गवाहों को दुबारा बुलाने की उदयभान की अर्जी खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पूर्व विधायक उदय भान करवरिया को हाईकोर्ट से एक और झटका लगा है। जवाहर हत्याकांड के दो गवाहों को फिर से तलब कर जिरह के लिए दाखिल उनकी अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सुनवाई की। अर्जी में अभियोजन पक्ष के गवाह राम लोचन व राजेंद्र को जिरह के लिए फिर से तलब करने की मांग की गई थी। कहा गया था कि जब इन गवाहों का ट्रायल कोर्ट में बयान हुआ था, तब उदयभान करवरिया के अधिवक्ता के बीमार रहने के कारण उनसे जिरह नहीं हो सकी थी। यह भी कहा गया कि दोनों चश्मदीद गवाह हैं इसलिए उनसे जिरह किया जाना न्यायहित में आवश्यक है।
अर्जी का विरोध करते हुए अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल ने कहा कि गवाहों के बयान के दो साल बाद सीआरपीसी की धारा 311 के तहत उन्हें जिरह के लिए फिर तलाब करने की अर्जी महज ट्रायल को लटकाने की नीयत से दी गई है। दो साल पहले हुए बयान पर अब जिरह करने का कोई औचित्य भी नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से जवाहर पंडित हत्याकांड का ट्रायल अगस्त माह तक पूरा करने का निर्देश भी है। ऐसे में यह अर्जी निरस्त किए जाने योग्य है क्योंकि गवाहों से जिरह की अनुमति देने से ट्रायल अनावश्यक रूप से लटकेगा। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।
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गवाहों से जिरह नहीं कर सकेंगे पूर्व विधायक के वकील
0 गवाहों को दुबारा बुलाने की उदयभान की अर्जी खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पूर्व विधायक उदय भान करवरिया को हाईकोर्ट से एक और झटका लगा है। जवाहर हत्याकांड के दो गवाहों को फिर से तलब कर जिरह के लिए दाखिल उनकी अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सुनवाई की। अर्जी में अभियोजन पक्ष के गवाह राम लोचन व राजेंद्र को जिरह के लिए फिर से तलब करने की मांग की गई थी। कहा गया था कि जब इन गवाहों का ट्रायल कोर्ट में बयान हुआ था, तब उदयभान करवरिया के अधिवक्ता के बीमार रहने के कारण उनसे जिरह नहीं हो सकी थी। यह भी कहा गया कि दोनों चश्मदीद गवाह हैं इसलिए उनसे जिरह किया जाना न्यायहित में आवश्यक है।
अर्जी का विरोध करते हुए अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल ने कहा कि गवाहों के बयान के दो साल बाद सीआरपीसी की धारा 311 के तहत उन्हें जिरह के लिए फिर तलाब करने की अर्जी महज ट्रायल को लटकाने की नीयत से दी गई है। दो साल पहले हुए बयान पर अब जिरह करने का कोई औचित्य भी नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से जवाहर पंडित हत्याकांड का ट्रायल अगस्त माह तक पूरा करने का निर्देश भी है। ऐसे में यह अर्जी निरस्त किए जाने योग्य है क्योंकि गवाहों से जिरह की अनुमति देने से ट्रायल अनावश्यक रूप से लटकेगा। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।
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