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चौदह साल पहले भी हुआ था सीबीआइऱ् जांच का आदेश
Updated Fri, 22 Dec 2017 01:03 AM IST
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चौदह साल पहले भी हुआ था सीबीआई जांच का निर्णय
0 एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में लगाया था धांधली का आरोप
0 शासन ने जांच के लिए केंद्र को भेजा था पत्र, पर सीबीआई ने ही कर दिया था इनकार
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में भर्तियों में धांधली कोई नहीं बात नहीं है। चौदह साल पहले भी राज्य सेवा परीक्षा, 1985 के आधार पर अपर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (महिला) के पदों पर हुई भर्ती को लेकर काफी विवाद हुआ था और इसके बाद शासन को सीबीआई जांच का निर्णय लेना पड़ा था। इसके लिए केंद्र सरकार से पत्र व्यवहार भी शुरू कर दिया गया था लेकिन अचानक यह मामला दब गया और सीबीआई ने नियमों का हवाला देते हुए जांच से इनकार कर दिया।
राज्य सेवा परीक्षा, 1985 के आधार पर अपर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (महिला) के पदों पर हुई भर्ती में धांधली का मुद्दा तत्कालीन एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने उठाया था। उन्होंने मुद्दा सदन में उठाने के साथ अगस्त 2002 में प्रधानमंत्री और दिसंबर 2002 में राष्ट्रपति को पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया था। एमएलसी ने अपने पत्र के जरिये आरोप लगाया था कि यूपीपीएससी की ओर से वर्ष 1985 में राज्य सम्मिलित सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से उत्तर प्रदेश शैक्षिक सेवा कनिष्ठ वेतनमान महिला शाखा के तहत पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पदों को भरने में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। उच्च अंक प्राप्त अभ्यर्थियों के उपलब्ध होते हुए न्यूनतम अंक वालों का चयन कर लिया गया। कई परीक्षार्थियों के अंक दूसरे परीक्षार्थियों के मुकाबले अधिक होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया जबकि कम अंक पाने वालों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसके अलावा 1987 में आयोग ने भूतपूर्व सैनिक के लिए आरक्षित दो और विकलांग के लिए आरक्षित एक पद पर योग्य अभ्यर्थियों के न मिलने पर रिक्त पदों पर सामान्य का चयन कर लिया, जबकि व्यवस्था है कि आरक्षित पदों के विरुद्ध अगर अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं तो संबंधित रिक्तियों को कम से कम तीन बार आयोग की ओर से आयोजित परीक्षाओं में विज्ञापित कराया जाए।
कि एमएलसी ने गड़बड़ियों से जुड़े तमाम साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने मई 2003 में सीबीआई जांच कराने का निर्णय लिया। इसके लिए नौ मई 2003 को यूपी के तत्कालीन गृह सचिव डॉ. राजाराम की ओर से गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया कि एमएलसी की ओर से लगाए गए आरोपों के मद्देनजर आयोग में हुई भर्तियों में धांधली की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश जारी करें। हालांकि शासन की ओर से सीबीआई जांच कराए जाने के निर्णय का कुछ नहीं हुआ और सितंबर 2004 में सीबीआई ने पत्र जारी कर यह कहते हुए जांच से इनकार कर दिया कि यूपीपीएससी एवं उसके कर्मचारी सीबीआई के दायरे में नहीं आते हैं, ऐसे में शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
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इस बार भी धीमी है प्रक्रिया
- उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर आयोजित पीसीएस समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच का निर्णय तो ले लिया गया लेकिन इस बार भी प्रक्रिया धीमी चल रही है। इस दौरान आयोग की ओर से तमाम पुरानी परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए गए हैं। वहीं, अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि सीबीआई जांच जल्द शुरू की जाए ताकि गड़बड़ियों पर लगाम कसी जा सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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पुरानी परीक्षाएं भी आ सकती हैं जांच के दायरे में
- इस बार अगर सीबीआई जांच शुरू होती हैं तो उसके निशाने पर प्रमुख तौर से वे भर्तियां होंगी, जिनका आयोजन पिछले आठ से दस वर्षों में कराया गया। हालांकि भर्तियों में विवाद के कई मामले इससे भी ज्यादा पुराने हैं। ऐसी विवादित परीक्षा का क्या होगा, यह तो सीबीआई जांच शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा लेकिन सीबीआई ऐसी पुरानी भर्तियों की जांच करती है तो कई दूसरी बड़ी गड़बड़ियां भी सामने आ सकती हैं।
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0 एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में लगाया था धांधली का आरोप
0 शासन ने जांच के लिए केंद्र को भेजा था पत्र, पर सीबीआई ने ही कर दिया था इनकार
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में भर्तियों में धांधली कोई नहीं बात नहीं है। चौदह साल पहले भी राज्य सेवा परीक्षा, 1985 के आधार पर अपर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (महिला) के पदों पर हुई भर्ती को लेकर काफी विवाद हुआ था और इसके बाद शासन को सीबीआई जांच का निर्णय लेना पड़ा था। इसके लिए केंद्र सरकार से पत्र व्यवहार भी शुरू कर दिया गया था लेकिन अचानक यह मामला दब गया और सीबीआई ने नियमों का हवाला देते हुए जांच से इनकार कर दिया।
राज्य सेवा परीक्षा, 1985 के आधार पर अपर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (महिला) के पदों पर हुई भर्ती में धांधली का मुद्दा तत्कालीन एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने उठाया था। उन्होंने मुद्दा सदन में उठाने के साथ अगस्त 2002 में प्रधानमंत्री और दिसंबर 2002 में राष्ट्रपति को पत्र भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया था। एमएलसी ने अपने पत्र के जरिये आरोप लगाया था कि यूपीपीएससी की ओर से वर्ष 1985 में राज्य सम्मिलित सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से उत्तर प्रदेश शैक्षिक सेवा कनिष्ठ वेतनमान महिला शाखा के तहत पिछड़ा वर्ग एवं अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पदों को भरने में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। उच्च अंक प्राप्त अभ्यर्थियों के उपलब्ध होते हुए न्यूनतम अंक वालों का चयन कर लिया गया। कई परीक्षार्थियों के अंक दूसरे परीक्षार्थियों के मुकाबले अधिक होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया जबकि कम अंक पाने वालों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसके अलावा 1987 में आयोग ने भूतपूर्व सैनिक के लिए आरक्षित दो और विकलांग के लिए आरक्षित एक पद पर योग्य अभ्यर्थियों के न मिलने पर रिक्त पदों पर सामान्य का चयन कर लिया, जबकि व्यवस्था है कि आरक्षित पदों के विरुद्ध अगर अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं तो संबंधित रिक्तियों को कम से कम तीन बार आयोग की ओर से आयोजित परीक्षाओं में विज्ञापित कराया जाए।
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कि एमएलसी ने गड़बड़ियों से जुड़े तमाम साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने मई 2003 में सीबीआई जांच कराने का निर्णय लिया। इसके लिए नौ मई 2003 को यूपी के तत्कालीन गृह सचिव डॉ. राजाराम की ओर से गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया कि एमएलसी की ओर से लगाए गए आरोपों के मद्देनजर आयोग में हुई भर्तियों में धांधली की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश जारी करें। हालांकि शासन की ओर से सीबीआई जांच कराए जाने के निर्णय का कुछ नहीं हुआ और सितंबर 2004 में सीबीआई ने पत्र जारी कर यह कहते हुए जांच से इनकार कर दिया कि यूपीपीएससी एवं उसके कर्मचारी सीबीआई के दायरे में नहीं आते हैं, ऐसे में शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
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इस बार भी धीमी है प्रक्रिया
- उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर आयोजित पीसीएस समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच का निर्णय तो ले लिया गया लेकिन इस बार भी प्रक्रिया धीमी चल रही है। इस दौरान आयोग की ओर से तमाम पुरानी परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए गए हैं। वहीं, अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि सीबीआई जांच जल्द शुरू की जाए ताकि गड़बड़ियों पर लगाम कसी जा सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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पुरानी परीक्षाएं भी आ सकती हैं जांच के दायरे में
- इस बार अगर सीबीआई जांच शुरू होती हैं तो उसके निशाने पर प्रमुख तौर से वे भर्तियां होंगी, जिनका आयोजन पिछले आठ से दस वर्षों में कराया गया। हालांकि भर्तियों में विवाद के कई मामले इससे भी ज्यादा पुराने हैं। ऐसी विवादित परीक्षा का क्या होगा, यह तो सीबीआई जांच शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा लेकिन सीबीआई ऐसी पुरानी भर्तियों की जांच करती है तो कई दूसरी बड़ी गड़बड़ियां भी सामने आ सकती हैं।