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यूपी ार काउंसिल के 25 सदस्यों को हाईकोट्र का नोटिस
Updated Wed, 01 Nov 2017 01:07 AM IST
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यूपी बार कौंसिल के 25 सदस्यों को नोटिस
0 हाईकोर्ट ने कौंसिल के सचिव के निलंबन पर सभी से मांगा व्यक्तिगत जवाब
0 बार कौंसिल के दस्तावेज सील करने का भी आदेश दिया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. रामजीत यादव के निलंबन पर हाईकोर्ट ने कौंसिल के सभी 25 सदस्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही कौंसिल के अप्रैल 2017 से लेकर तीन अगस्त 2017 तक इससे संबंधित सभी दस्तावेज सील करने को कहा है। कोर्ट ने महानिबंधक को आदेश दिया है कि दस्तावेजों को सील करवा दें। डा. रामजीत ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति इरशाद अली की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि यूपी बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन पांचू राम मौर्य 25 जुलाई 2017 को अध्यक्ष चुने गए। तीन अगस्त 2017 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। तीन अगस्त को ही उन्होंने रात में अपनी व्यक्तिगत मेल आईडी से बार कौंसिल की आधिकारिक मेल आईडी पर एक मेल भेज कर सचिव के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। निलंबन के लिए एक्जीक्यूटिव कौंसिल की 25 जुलाई 2017 को हुई बैठक का आधार लिया गया। इस मेल के साथ एक्जीक्यूटिव कौंसिल का आदेश और मीटिंग के मिनट्स की प्रति भी लगाई गई है।
अधिवक्ता का तर्क था कि एक्जीक्यूटिव कौंसिल को सचिव को निलंबित करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह कौंसिल सचिव पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं रखती है। दूसरे, कौंसिल की बैठक में लखनऊ में विधायक आवास में आयोजित की गई, जिसके प्रस्ताव पर पांच में से सिर्फ दो सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। 25 जुलाई के इस आदेश को तत्कालीन बार कौंसिल अध्यक्ष ने 18 जून 2017 के आदेश से खंडित कर दिया था। हाईकोर्ट ने सभी सदस्यों से जवाब मांगते हुए संबंधित दस्तावेजों को सील करने का आदेश दिया है।
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0 हाईकोर्ट ने कौंसिल के सचिव के निलंबन पर सभी से मांगा व्यक्तिगत जवाब
0 बार कौंसिल के दस्तावेज सील करने का भी आदेश दिया
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. रामजीत यादव के निलंबन पर हाईकोर्ट ने कौंसिल के सभी 25 सदस्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही कौंसिल के अप्रैल 2017 से लेकर तीन अगस्त 2017 तक इससे संबंधित सभी दस्तावेज सील करने को कहा है। कोर्ट ने महानिबंधक को आदेश दिया है कि दस्तावेजों को सील करवा दें। डा. रामजीत ने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति इरशाद अली की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि यूपी बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन पांचू राम मौर्य 25 जुलाई 2017 को अध्यक्ष चुने गए। तीन अगस्त 2017 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। तीन अगस्त को ही उन्होंने रात में अपनी व्यक्तिगत मेल आईडी से बार कौंसिल की आधिकारिक मेल आईडी पर एक मेल भेज कर सचिव के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। निलंबन के लिए एक्जीक्यूटिव कौंसिल की 25 जुलाई 2017 को हुई बैठक का आधार लिया गया। इस मेल के साथ एक्जीक्यूटिव कौंसिल का आदेश और मीटिंग के मिनट्स की प्रति भी लगाई गई है।
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अधिवक्ता का तर्क था कि एक्जीक्यूटिव कौंसिल को सचिव को निलंबित करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह कौंसिल सचिव पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं रखती है। दूसरे, कौंसिल की बैठक में लखनऊ में विधायक आवास में आयोजित की गई, जिसके प्रस्ताव पर पांच में से सिर्फ दो सदस्यों के हस्ताक्षर हैं। 25 जुलाई के इस आदेश को तत्कालीन बार कौंसिल अध्यक्ष ने 18 जून 2017 के आदेश से खंडित कर दिया था। हाईकोर्ट ने सभी सदस्यों से जवाब मांगते हुए संबंधित दस्तावेजों को सील करने का आदेश दिया है।
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