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बार कौंसिल ऑफ यूपी के सचिव निलंबित
Updated Mon, 31 Jul 2017 10:18 PM IST
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बार कौंसिल ऑफ यूपी के सचिव निलंबित
कार्यों में लापरवाही और नियमविरुद्ध कार्य करने का आरोप
रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को सौंपी गई जांच
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव डा. रामजीत सिंह यादव को कौंसिल की कार्यकारिणी ने निलंबित कर दिया है। रिटायर्ड अपर जिला जज आरसी मिश्र को उनके स्थान पर अस्थायी सचिव नियुक्त किया गया है। कौंसिल ने सचिव के कार्यों की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति से कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायमूर्ति एपी सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है।
बार कौंसिल के अध्यक्ष पांचू राम मौर्य के मुताबिक काउंसिल की आपात सामान्य बैठक में निर्णय लिया गया कि सचिव रामजीत सिंह यादव द्वारा अपने कर्तव्यों के पालन और ऋण वितरण तथा ओवर टाइम भुगतान में गंभीर अनियमितता बरती गई है। उनको कार्यों के प्रति लापरवाही और नियमविरुद्ध तरीके से काम करने का दोषी पाया गया है। इसलिए उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए जांच हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एपी सिंह से कराने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में इस प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई कि गत 16 जुलाई को हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में को पूर्व अध्यक्ष ने बिना किसी अधिकार के रोक दिया। चुनाव अधिकारी की भूमिका में इसमें आश्चर्य जनक रही। उनकी जिम्मेदारी थी कि चुनाव समय से कराते मगर इसके बजाए वह 16 जुलाई तक छुट्टी पर चले गए। उल्लेखनीय है बार कौंसिल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर संपन्न हुआ।
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कार्यों में लापरवाही और नियमविरुद्ध कार्य करने का आरोप
रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को सौंपी गई जांच
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव डा. रामजीत सिंह यादव को कौंसिल की कार्यकारिणी ने निलंबित कर दिया है। रिटायर्ड अपर जिला जज आरसी मिश्र को उनके स्थान पर अस्थायी सचिव नियुक्त किया गया है। कौंसिल ने सचिव के कार्यों की जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायमूर्ति से कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायमूर्ति एपी सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है।
बार कौंसिल के अध्यक्ष पांचू राम मौर्य के मुताबिक काउंसिल की आपात सामान्य बैठक में निर्णय लिया गया कि सचिव रामजीत सिंह यादव द्वारा अपने कर्तव्यों के पालन और ऋण वितरण तथा ओवर टाइम भुगतान में गंभीर अनियमितता बरती गई है। उनको कार्यों के प्रति लापरवाही और नियमविरुद्ध तरीके से काम करने का दोषी पाया गया है। इसलिए उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए जांच हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति एपी सिंह से कराने का निर्णय लिया गया है।
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बैठक में इस प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई कि गत 16 जुलाई को हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में को पूर्व अध्यक्ष ने बिना किसी अधिकार के रोक दिया। चुनाव अधिकारी की भूमिका में इसमें आश्चर्य जनक रही। उनकी जिम्मेदारी थी कि चुनाव समय से कराते मगर इसके बजाए वह 16 जुलाई तक छुट्टी पर चले गए। उल्लेखनीय है बार कौंसिल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर संपन्न हुआ।
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