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गैर राज् शें की महिला एं भी आरक्षण की हकदार
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गैर राज्यों की महिलाएं भी आरक्षण की हकदार
0 सिर्फ यूपी की मूल निवासी महिलाओं को ही आरक्षण देने संबंधी प्रावधान अवैधानिक
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की नौकरियों में गैर राज्यों की महिलाएं भी आरक्षण पाने की हकदार हैं। कोर्ट ने महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने के लिए उनका उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने की अनिवार्यता संबंधी नौ जनवरी 2007 के क्लाज चार को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। कोर्ट का कहना था कि शासनादेश संविधान के अनुच्छेद 16(2) और 16(3) के विपरीत है। यह अनुच्छेद जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने पर रोक लगाते हैं।
2015 की अवर अभियंता भर्ती के पुनरीक्षित परिणाम को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षित चयन सूची 2018 वैध है। मगर, पूर्व के परिणाम के आधार पर चयनित हो चुके ऐसे अभ्यर्थी जो पुनरीक्षित सूची जारी होने के बाद बाहर कर दिए गए हैं, सेवा में बने रहेंगे। उनको नौकरी से नहीं निकाला जाएगा और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनको वरिष्ठता क्रम में नीचे रखते हुए भविष्य में रिक्त होने वाले पदों पर समायोजित कर दिया जाए। उत्तराखंड की वर्षा सैनी और कई अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने दिया है। कोर्ट का कहना था कि पुनरीक्षित चयन सूची जारी होने के बाद बाहर हुए अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है, इसलिए उनको सेवा से निकाला न जाए।
2017 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 1377 अवर अभियंताओं की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें महिला अभ्यर्थियों के लिए 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण था। महिलाओं के 151 पदों में से सिर्फ 75 का चयन हुआ और 79 पद रिक्त रह गए। चयन में क्षैतिज आरक्षण के नियम का पालन नहीं किया गया। इसकी शिकायत पर आयोग ने पुनरीक्षित परिणाम घोषित किया। 28 अप्रैल 2018 को घोषित पुनरीक्षित सूची से पूर्व में चयनित 107 लोग बाहर हो गए। इसमें अधिकांश अभ्यर्थी चयन पा चुके हैं। इन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। दूसरी ओर महिला आरक्षण में प्रदेश के बाहर की महिलाओं को शामिल नहीं किया गया। इसके खिलाफ भी याचिका दाखिल हुई।
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याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी, एके मिश्र, राघवेंद्र मिश्र आदि ने बहस की। कहा गया कि प्रदेश के बाहर की महिलाओं को आरक्षण न देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। राज्य सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत नियम बनाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने महिला आरक्षण में प्रदेश का मूल निवासी होने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है और चयन सूची से बाहर हुए अभ्यर्थियों का हित भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
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0 सिर्फ यूपी की मूल निवासी महिलाओं को ही आरक्षण देने संबंधी प्रावधान अवैधानिक
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की नौकरियों में गैर राज्यों की महिलाएं भी आरक्षण पाने की हकदार हैं। कोर्ट ने महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने के लिए उनका उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने की अनिवार्यता संबंधी नौ जनवरी 2007 के क्लाज चार को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। कोर्ट का कहना था कि शासनादेश संविधान के अनुच्छेद 16(2) और 16(3) के विपरीत है। यह अनुच्छेद जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव करने पर रोक लगाते हैं।
2015 की अवर अभियंता भर्ती के पुनरीक्षित परिणाम को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पुनरीक्षित चयन सूची 2018 वैध है। मगर, पूर्व के परिणाम के आधार पर चयनित हो चुके ऐसे अभ्यर्थी जो पुनरीक्षित सूची जारी होने के बाद बाहर कर दिए गए हैं, सेवा में बने रहेंगे। उनको नौकरी से नहीं निकाला जाएगा और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनको वरिष्ठता क्रम में नीचे रखते हुए भविष्य में रिक्त होने वाले पदों पर समायोजित कर दिया जाए। उत्तराखंड की वर्षा सैनी और कई अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने दिया है। कोर्ट का कहना था कि पुनरीक्षित चयन सूची जारी होने के बाद बाहर हुए अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है, इसलिए उनको सेवा से निकाला न जाए।
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2017 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 1377 अवर अभियंताओं की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें महिला अभ्यर्थियों के लिए 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण था। महिलाओं के 151 पदों में से सिर्फ 75 का चयन हुआ और 79 पद रिक्त रह गए। चयन में क्षैतिज आरक्षण के नियम का पालन नहीं किया गया। इसकी शिकायत पर आयोग ने पुनरीक्षित परिणाम घोषित किया। 28 अप्रैल 2018 को घोषित पुनरीक्षित सूची से पूर्व में चयनित 107 लोग बाहर हो गए। इसमें अधिकांश अभ्यर्थी चयन पा चुके हैं। इन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। दूसरी ओर महिला आरक्षण में प्रदेश के बाहर की महिलाओं को शामिल नहीं किया गया। इसके खिलाफ भी याचिका दाखिल हुई।
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याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी, एके मिश्र, राघवेंद्र मिश्र आदि ने बहस की। कहा गया कि प्रदेश के बाहर की महिलाओं को आरक्षण न देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। राज्य सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत नियम बनाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने महिला आरक्षण में प्रदेश का मूल निवासी होने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है और चयन सूची से बाहर हुए अभ्यर्थियों का हित भी सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।