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बिना मेडिकल नियुक्ति को चुनौती
Updated Sat, 13 Oct 2018 07:40 PM IST
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सिपाही भर्ती 2013
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6786 अभ्यर्थियों की बिना
मेडिकल नियुक्ति कोे चुनौती
- कोर्ट ने कहा, बोर्ड को प्रक्रिया का उल्लंघन कर नियुक्ति करने का अधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। सिपाही भर्ती 2013 के 6,786 अभ्यर्थियों को दुबारा मेडिकल कराए बिना नियुक्ति के लिए बुलाए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब तलब किया है। कोर्ट का कहना है कि पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करने का कोई अधिकार नहीं है। संजय कुमार गोंड और पांच अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा सुनवाई कर रही हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 2013 में विज्ञापित 41,610 कांस्टेबल भर्ती में 19 मार्च 2015 को मेडिकल टेस्ट और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था। इसमें 6,786 अभ्यर्थी ऐसे थे जो कट ऑफ मेरिट में थे। मगर 16 जुलाई 2015 को घोषित परिणाम में इनका नाम चयन सूची में नहीं था। अंतिम परिणाम में गलत क्षैतिज आरक्षण लागू करने के कारण मामला कोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने क्षैतिज आरक्षण सही से लागू कर संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया।
परिणाम संशोधित करने के बाद 8,678 नए अभ्यर्थियों को मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया। साथ पुलिस बोर्ड ने 6,786 उन अभ्यर्थियोें को भी बुला लिया, जिनका मेडिकल हो चुका था। याचीगण का कहना था कि इन अभ्यर्थियों का मेडिकल तीन वर्ष पूर्व हुआ है। जबकि शासनादेश के अनुसार यदि मेडिकल कराने के छह माह के भीतर नियुक्ति प्रदान नहीं की जाती है तो दुबारा मेडिकल कराना होगा। बिना मेडिकल के नियु़क्ति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा है कि बोर्ड को शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन कर नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। याचिका पर 20 नवंबर के बाद सुनवाई होगी।
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6786 अभ्यर्थियों की बिना
मेडिकल नियुक्ति कोे चुनौती
- कोर्ट ने कहा, बोर्ड को प्रक्रिया का उल्लंघन कर नियुक्ति करने का अधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। सिपाही भर्ती 2013 के 6,786 अभ्यर्थियों को दुबारा मेडिकल कराए बिना नियुक्ति के लिए बुलाए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब तलब किया है। कोर्ट का कहना है कि पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करने का कोई अधिकार नहीं है। संजय कुमार गोंड और पांच अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा सुनवाई कर रही हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 2013 में विज्ञापित 41,610 कांस्टेबल भर्ती में 19 मार्च 2015 को मेडिकल टेस्ट और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था। इसमें 6,786 अभ्यर्थी ऐसे थे जो कट ऑफ मेरिट में थे। मगर 16 जुलाई 2015 को घोषित परिणाम में इनका नाम चयन सूची में नहीं था। अंतिम परिणाम में गलत क्षैतिज आरक्षण लागू करने के कारण मामला कोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने क्षैतिज आरक्षण सही से लागू कर संशोधित परिणाम जारी करने का आदेश दिया।
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परिणाम संशोधित करने के बाद 8,678 नए अभ्यर्थियों को मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया। साथ पुलिस बोर्ड ने 6,786 उन अभ्यर्थियोें को भी बुला लिया, जिनका मेडिकल हो चुका था। याचीगण का कहना था कि इन अभ्यर्थियों का मेडिकल तीन वर्ष पूर्व हुआ है। जबकि शासनादेश के अनुसार यदि मेडिकल कराने के छह माह के भीतर नियुक्ति प्रदान नहीं की जाती है तो दुबारा मेडिकल कराना होगा। बिना मेडिकल के नियु़क्ति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा है कि बोर्ड को शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन कर नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। याचिका पर 20 नवंबर के बाद सुनवाई होगी।
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