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डीयू, जेएनयू के बाद अब इविवि पर नजर
Updated Sun, 08 Oct 2017 10:15 PM IST
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जीत-हार के दावों के बीच मुद्दे भुनाने में जुटे प्रत्याशी
0 एबीवीपी को आइसा, एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा से कड़ी टक्कर मिलने के आसार
0 बीएचयू की घटना के बाद सभी के एजेंडे में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी हुआ शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और जेएनयू के बाद अब सबकी नजर इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव पर है। डीयू और जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद इविवि छात्रसंघ चुनाव में मुकाबला और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। दोनों विश्वविद्यालयों की तरह यहां भी एबीवीपी को विरोधी संगठनों से कड़ी टक्कर मिलने के आसार हैं। बीएचयू की घटना और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एबीवीपी के चार छात्रों के निष्कासन के बाद समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
छात्र हितों को मुद्दा बनाकर इविवि प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर रहे एबीवीपी के चार छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। इनमें छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष रोहित मिश्र भी शामिल हैं। इससे पूर्व 28 अप्रैल को हुए आंदोलन के बाद यहां जांच को आई केंद्रीय टीम की रिपोर्ट पर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। छात्रहित को लेकर आंदोलन कर रहे एवीबीपी की किसी मांग को विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरा नहीं किया। छात्रसंघ चुनाव में टिकट को लेकर भी एबीवीपी में खींचतान साफ दिखी। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष एवं एबीवीपी की राष्ट्रीय के सदस्य रोहित मिश्र का दावा है कि संगठन में कोई खींचतान नहीं। सब महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं लेकिन एकमात्र एबीवीपी है जिसने इस बार अध्यक्ष पद के लिए छात्रा को प्रत्याशी बनाया है। बकौल रोहित छात्रहित के लिए उन्हें जेल जाना पड़ा, निष्कासन झेलना पड़ा। आगे भी एबीवीपी के लोग छात्रहित के लिए ऐसे ही लड़ेंगे।
हालांकि छात्रहित के मुद्दे पर 28 अप्रैल को हुए आंदोलन में समाजवादी छात्रसभा ने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। इस आंदोलन के बाद जेल जाने वाले छात्रों में बड़ी संख्या समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं की थी और इनमें छात्रसंघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष अदील हमजा और समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता भी शामिल थे। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सीएम का पुतला फूंकने पर अदील हमजा को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधार्मिक होने का नोटिस दे दिया और इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की काफी किरकिरी भी हुई, सो चुनाव के दौरान समाजवादी छात्रसभा इन तमाम मुद्दों को भुनाने की कोशिश करेगी। समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता और संगठन से जुड़े एवं इविवि के वरिष्ठ छात्र नेता अभिषेक यादव का कहना है कि इविवि प्रशासन छात्र विरोधी है और अब प्रदेश एवं केंद्र में भी छात्र विरोधी सरकार आ गई है। छात्राएं असुरक्षित हैं। बीएचयू की घटना सामने है। पिछले दिनों इविवि में भी एक मामला सामने आया। केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद इविवि में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। ज्यादातर आंदोलनों की समाजवादी छात्रसभा ने अगुवाई की और इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से चुनाव लड़ रही हैं।
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समाजवादी छात्रसभा और एबीवीपी को आइसा एवं एनएसयूआई से कड़ी टक्कर मिलने के आसार हैं। वजह यह कि बीएचयू में छात्रा से छेड़खानी की घटना के बाद इलाहाबाद में हुए आंदोलन को नेतृत्व इन्हीं दोनों संगठनों ने किया। इलाहाबाद में भी इन दोनों संगठनों की ओर से लगातार जुलूस निकाले गए और पुतले फूंके गए। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्राओं की सुरक्षा के मुद्दे पर अलग से दो डिप्टी प्रॉक्टर नियुक्त कर दिए। छात्राओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए और महिला छात्रावास में बैठक कर छात्राओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। चुनाव प्रचार या दक्षता भाषण के दौरान दोनों संगठनों के पदाधिकारी इन बदलावों को श्रेय लेेने की कोशिश करेंगे। आइसा के जिला समन्वयक डॉ. विष्णु प्रभाकर उपाध्याय बताते हैं कि आइसा के 12 सूत्रीय एजेंडे में लाइब्रेरी, कैंटीन जैसे एकेडेमिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्राओं की सुरक्षा का है। आइसा लगातार मांग कर रहे हैं कि इविवि में जीएस कैश गठित हो और एक छात्रा प्रतिनिधि को उसमें शामिल किया जाए ताकि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो। यही वजह है कि आइसा ने उपाध्यक्ष पद के लिए छात्रा को प्रत्याशी बनाया है।
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0 एबीवीपी को आइसा, एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा से कड़ी टक्कर मिलने के आसार
0 बीएचयू की घटना के बाद सभी के एजेंडे में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी हुआ शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और जेएनयू के बाद अब सबकी नजर इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव पर है। डीयू और जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद इविवि छात्रसंघ चुनाव में मुकाबला और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। दोनों विश्वविद्यालयों की तरह यहां भी एबीवीपी को विरोधी संगठनों से कड़ी टक्कर मिलने के आसार हैं। बीएचयू की घटना और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एबीवीपी के चार छात्रों के निष्कासन के बाद समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
छात्र हितों को मुद्दा बनाकर इविवि प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर रहे एबीवीपी के चार छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। इनमें छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष रोहित मिश्र भी शामिल हैं। इससे पूर्व 28 अप्रैल को हुए आंदोलन के बाद यहां जांच को आई केंद्रीय टीम की रिपोर्ट पर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। छात्रहित को लेकर आंदोलन कर रहे एवीबीपी की किसी मांग को विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरा नहीं किया। छात्रसंघ चुनाव में टिकट को लेकर भी एबीवीपी में खींचतान साफ दिखी। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष एवं एबीवीपी की राष्ट्रीय के सदस्य रोहित मिश्र का दावा है कि संगठन में कोई खींचतान नहीं। सब महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं लेकिन एकमात्र एबीवीपी है जिसने इस बार अध्यक्ष पद के लिए छात्रा को प्रत्याशी बनाया है। बकौल रोहित छात्रहित के लिए उन्हें जेल जाना पड़ा, निष्कासन झेलना पड़ा। आगे भी एबीवीपी के लोग छात्रहित के लिए ऐसे ही लड़ेंगे।
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हालांकि छात्रहित के मुद्दे पर 28 अप्रैल को हुए आंदोलन में समाजवादी छात्रसभा ने भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। इस आंदोलन के बाद जेल जाने वाले छात्रों में बड़ी संख्या समाजवादी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं की थी और इनमें छात्रसंघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष अदील हमजा और समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता भी शामिल थे। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सीएम का पुतला फूंकने पर अदील हमजा को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधार्मिक होने का नोटिस दे दिया और इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन की काफी किरकिरी भी हुई, सो चुनाव के दौरान समाजवादी छात्रसभा इन तमाम मुद्दों को भुनाने की कोशिश करेगी। समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता और संगठन से जुड़े एवं इविवि के वरिष्ठ छात्र नेता अभिषेक यादव का कहना है कि इविवि प्रशासन छात्र विरोधी है और अब प्रदेश एवं केंद्र में भी छात्र विरोधी सरकार आ गई है। छात्राएं असुरक्षित हैं। बीएचयू की घटना सामने है। पिछले दिनों इविवि में भी एक मामला सामने आया। केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद इविवि में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। ज्यादातर आंदोलनों की समाजवादी छात्रसभा ने अगुवाई की और इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से चुनाव लड़ रही हैं।
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समाजवादी छात्रसभा और एबीवीपी को आइसा एवं एनएसयूआई से कड़ी टक्कर मिलने के आसार हैं। वजह यह कि बीएचयू में छात्रा से छेड़खानी की घटना के बाद इलाहाबाद में हुए आंदोलन को नेतृत्व इन्हीं दोनों संगठनों ने किया। इलाहाबाद में भी इन दोनों संगठनों की ओर से लगातार जुलूस निकाले गए और पुतले फूंके गए। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्राओं की सुरक्षा के मुद्दे पर अलग से दो डिप्टी प्रॉक्टर नियुक्त कर दिए। छात्राओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए और महिला छात्रावास में बैठक कर छात्राओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। चुनाव प्रचार या दक्षता भाषण के दौरान दोनों संगठनों के पदाधिकारी इन बदलावों को श्रेय लेेने की कोशिश करेंगे। आइसा के जिला समन्वयक डॉ. विष्णु प्रभाकर उपाध्याय बताते हैं कि आइसा के 12 सूत्रीय एजेंडे में लाइब्रेरी, कैंटीन जैसे एकेडेमिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्राओं की सुरक्षा का है। आइसा लगातार मांग कर रहे हैं कि इविवि में जीएस कैश गठित हो और एक छात्रा प्रतिनिधि को उसमें शामिल किया जाए ताकि छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो। यही वजह है कि आइसा ने उपाध्यक्ष पद के लिए छात्रा को प्रत्याशी बनाया है।