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अस्पताल के निर्माण में देरी पर जवाब तलब
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बरेली के ध्यानार्थ
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अस्पताल के निर्माण में देरी
पर सरकार से जवाब तलब
0 बदायूं में अस्पताल नहीं होने से लोगों को इलाज कराने में हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने बदायूं में राजकीय मेडिकल कालेज और एसपीजी अस्पताल के निर्माण में हो रही देरी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अस्पताल का निर्माण तुलसियानी रोड, बदायूं में कराया जा रहा है। आरोप है कि तीन साल से निर्माणाधीन अस्पताल अब तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। इससे गंभीर रूप से बीमार लोगों को इलाज कराने में परेशानी होती है और मौतें भी हो रही हैं। इस मामले की अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी।
लोक हित चेतना समिति की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर का कहना था कि राज्य सरकार ने मेडिकल कालेज और अस्पताल बनाने के लिए 545 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। मगर, तीन साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बावजूद हर साल सैकड़ों लोग मलेरिया, डेंगू और दूसरी संक्रामक बीमारियों से मर रहे हैं। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता एके गोयल का कहना था कि अक्तूबर 2018 से अस्पताल कार्य करने लगा है। 345 मरीजों का इलाज हो चुका है। 2019 सत्र से मेडिकल कालेज में भी पढ़ाई शुरू हो जाएगी। कोर्ट ने सरकार को हलफनामे के साथ पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है।
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अस्पताल के निर्माण में देरी
पर सरकार से जवाब तलब
0 बदायूं में अस्पताल नहीं होने से लोगों को इलाज कराने में हो रही परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने बदायूं में राजकीय मेडिकल कालेज और एसपीजी अस्पताल के निर्माण में हो रही देरी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अस्पताल का निर्माण तुलसियानी रोड, बदायूं में कराया जा रहा है। आरोप है कि तीन साल से निर्माणाधीन अस्पताल अब तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। इससे गंभीर रूप से बीमार लोगों को इलाज कराने में परेशानी होती है और मौतें भी हो रही हैं। इस मामले की अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी।
लोक हित चेतना समिति की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर का कहना था कि राज्य सरकार ने मेडिकल कालेज और अस्पताल बनाने के लिए 545 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। मगर, तीन साल बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बावजूद हर साल सैकड़ों लोग मलेरिया, डेंगू और दूसरी संक्रामक बीमारियों से मर रहे हैं। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता एके गोयल का कहना था कि अक्तूबर 2018 से अस्पताल कार्य करने लगा है। 345 मरीजों का इलाज हो चुका है। 2019 सत्र से मेडिकल कालेज में भी पढ़ाई शुरू हो जाएगी। कोर्ट ने सरकार को हलफनामे के साथ पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है।
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