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अदालतें न्याय नहीं निर्णय देेती हैं
Updated Fri, 21 Sep 2018 01:56 AM IST
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निैंर्णय नहीं न्याय करें अदालतें : जगदगुरू रामानंदाचार्य
0 हाईकोर्ट बार में ‘न्यायोमम् धर्म:’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
इलाहाबाद। जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामनरेश आचार्य ने ने कहा है कि आज की अदालतें न्याय नहीं निर्णय करती हैं जो भारतीय न्याय दर्शन की परिकल्पना को पूरा नहीं करता। न्याय देना धर्म है और यदि हम न्याय देने में सफल नहीं है तो हमें अपनी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए। जगद्गुरु भारतीय न्यायदर्शन पर आधारित ‘न्यायोमम् धर्म:’ विषयक संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने किया था।
रामानंदाचार्य ने आहार की शुद्धता पर जोर देते हुए कहा कि आहार शुद्ध होने से मन शुद्ध होता है। और मन शुद्ध होने पर ज्ञान, प्रेम, वैराग्य, उदारता स्वयं आ जाती है। संगोष्ठी को न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने भी संबोधित किया। वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने कहा कि धर्म के बिना न्याय की परिकल्पना निरर्थक है। हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश नारायण शर्मा ने भी अपने विचार रखे। संगोष्ठी का संचालन बार के महासचिव एसी तिवारी ने किया। कार्यक्रम में बार के सभी पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे।
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0 हाईकोर्ट बार में ‘न्यायोमम् धर्म:’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
इलाहाबाद। जगद्गुरु रामानंदाचार्य रामनरेश आचार्य ने ने कहा है कि आज की अदालतें न्याय नहीं निर्णय करती हैं जो भारतीय न्याय दर्शन की परिकल्पना को पूरा नहीं करता। न्याय देना धर्म है और यदि हम न्याय देने में सफल नहीं है तो हमें अपनी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए। जगद्गुरु भारतीय न्यायदर्शन पर आधारित ‘न्यायोमम् धर्म:’ विषयक संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने किया था।
रामानंदाचार्य ने आहार की शुद्धता पर जोर देते हुए कहा कि आहार शुद्ध होने से मन शुद्ध होता है। और मन शुद्ध होने पर ज्ञान, प्रेम, वैराग्य, उदारता स्वयं आ जाती है। संगोष्ठी को न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने भी संबोधित किया। वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने कहा कि धर्म के बिना न्याय की परिकल्पना निरर्थक है। हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश नारायण शर्मा ने भी अपने विचार रखे। संगोष्ठी का संचालन बार के महासचिव एसी तिवारी ने किया। कार्यक्रम में बार के सभी पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे।
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