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गंगा की बदली धारा की वजह से महावीर, त्रिवेणी काली पर कम हुई भूमि
Updated Thu, 07 Dec 2017 01:58 AM IST
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कई संस्थाओं को संगम के पास नहीं मिलेगी भूमि
0 गंगा की धारा बदलने से महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर कम हुई जमीन
0 मेला प्रशासन जीटी रोड गंगोली शिवाला की ओर भूमि आवंटित करने क ी तैयारी में
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
मेला क्षेत्र के संगम तट के पास इस बार कई संस्थाओं को भूमि मिलना मुश्किल है। गंगा की धारा बदलने से महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर भूमि कम हो गई है। इसके चलते मेला प्रशासन संस्थाओं को जीटी रोड गंगोली शिवाला की ओर भूमि आवंटन की तैयारी कर रहा है।
महावीर मार्ग, त्रिवेणी और काली सड़क पर पिछले साल गंगा की धारा एक ही स्थान से बह रही थी। इसके चलते भूमि अधिक थी। इस बार गंगा दो धारा में बह रहीं हैं, जिससे इन मार्गों पर जमीन कम हो गई है। मेला प्रशासन चार दिसंबर से भूमि आवंटन कर रहा है। ज्यादातर संस्थाएं महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर ही भूमि की मांग कर रहीं हैं। पिछले वर्ष इन मार्गों पर 11 हजार, 800 वर्ग फीट भूमि पर 350 संस्थाओं को बसाया गया था। लेकिन इस बार गंगा के बहाव से इन मार्गों पर 6900 वर्ग गज भूमि ही रह गई है। इससे इस बार 350 संस्थाओं को भूमि आवंटित होना मुश्किल हो गया है। मेला प्रशासन इस आकलन में जुटा है कि इस बार वह इन मार्गों पर किन-किन संस्थाओं को भूमि आवंटित करे। प्रभारी मेलाधिकारी राजीव कुमार राय का कहना है कि महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर जिन संस्थाओं को भूमि नहीं मिल सकेगी, उन्हें अन्य जगह बसाया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि ऐसी संस्थाओं को जीटी गंगोली शिवाला की ओर बसाया जाएगा।
ऐसी स्थिति में कई संस्थाएं जोड़तोड़ में जुट गईं हैं। कई संस्थाएं तो मेला प्रशासन से इन मार्गों पर जमीन लेने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी कहते हैं कि प्रतिवर्ष मेला प्रशासन महावीर, त्रिवेणी पर कम जमीन का शोर मचाता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी आड़ में पुरानी संस्थाओं को हटा कर नई संस्थाओं को बसाया जाता है।
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0 गंगा की धारा बदलने से महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर कम हुई जमीन
0 मेला प्रशासन जीटी रोड गंगोली शिवाला की ओर भूमि आवंटित करने क ी तैयारी में
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
मेला क्षेत्र के संगम तट के पास इस बार कई संस्थाओं को भूमि मिलना मुश्किल है। गंगा की धारा बदलने से महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर भूमि कम हो गई है। इसके चलते मेला प्रशासन संस्थाओं को जीटी रोड गंगोली शिवाला की ओर भूमि आवंटन की तैयारी कर रहा है।
महावीर मार्ग, त्रिवेणी और काली सड़क पर पिछले साल गंगा की धारा एक ही स्थान से बह रही थी। इसके चलते भूमि अधिक थी। इस बार गंगा दो धारा में बह रहीं हैं, जिससे इन मार्गों पर जमीन कम हो गई है। मेला प्रशासन चार दिसंबर से भूमि आवंटन कर रहा है। ज्यादातर संस्थाएं महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर ही भूमि की मांग कर रहीं हैं। पिछले वर्ष इन मार्गों पर 11 हजार, 800 वर्ग फीट भूमि पर 350 संस्थाओं को बसाया गया था। लेकिन इस बार गंगा के बहाव से इन मार्गों पर 6900 वर्ग गज भूमि ही रह गई है। इससे इस बार 350 संस्थाओं को भूमि आवंटित होना मुश्किल हो गया है। मेला प्रशासन इस आकलन में जुटा है कि इस बार वह इन मार्गों पर किन-किन संस्थाओं को भूमि आवंटित करे। प्रभारी मेलाधिकारी राजीव कुमार राय का कहना है कि महावीर, त्रिवेणी और काली सड़क पर जिन संस्थाओं को भूमि नहीं मिल सकेगी, उन्हें अन्य जगह बसाया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि ऐसी संस्थाओं को जीटी गंगोली शिवाला की ओर बसाया जाएगा।
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ऐसी स्थिति में कई संस्थाएं जोड़तोड़ में जुट गईं हैं। कई संस्थाएं तो मेला प्रशासन से इन मार्गों पर जमीन लेने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी कहते हैं कि प्रतिवर्ष मेला प्रशासन महावीर, त्रिवेणी पर कम जमीन का शोर मचाता। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी आड़ में पुरानी संस्थाओं को हटा कर नई संस्थाओं को बसाया जाता है।
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