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सूबे की नर्द खनन नीति को चुनौती
Updated Tue, 03 Oct 2017 08:03 PM IST
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सूबे की नई खनन नीति को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
प्रदेश सरकार की नई खनन नीति विवादों में आ गई है। इसकी वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इलाहाबाद के राकेश कुमार ने जनहित याचिका दाखिल कर नई नीति को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। याचिका में नई नीति को लेकर जारी 14 अगस्त के शासनादेश और माइंस एंड मिनरल्स कंसेशन रूल्स की संशोधित धारा 23 की वैधता को चुनौती दी गई है। इस संशोधन से मूल अधिकारों के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 का हनन होता है।
याची के अधिवक्ता के मुताबिक नई नीति में खनन पट्टा देने की दोहरी प्रक्रिया अपनाई गई है। ई-टेंडरिंग के तहत सबसे ऊंची बोली को न्यूनतम मानते हुए पट्टे की नीलामी की जाएगी। इसके बाद अधिकतम बोली लगाने वाले को पट्टा दिया जाएगा। इसके अलावा व्यवस्था यह भी है कि यदि खनन एरिया के तय रेट से 400 गुना अधिक बोली लगती है तो उसी को पट्टा देने के लिए पर्याप्त माना जाएगा तथा इसके बाद ई-टेंडरिंग से पट्टे की नीलामी नहीं होगी। याचिका में कहा गया है कि यह नीति विभेदकारी है। इससे आवेदकों के समानता के अधिकार का हनन होता है। याचिका पर पांच अक्तूबर को सुनवाई हो सकती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
प्रदेश सरकार की नई खनन नीति विवादों में आ गई है। इसकी वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इलाहाबाद के राकेश कुमार ने जनहित याचिका दाखिल कर नई नीति को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। याचिका में नई नीति को लेकर जारी 14 अगस्त के शासनादेश और माइंस एंड मिनरल्स कंसेशन रूल्स की संशोधित धारा 23 की वैधता को चुनौती दी गई है। इस संशोधन से मूल अधिकारों के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 का हनन होता है।
याची के अधिवक्ता के मुताबिक नई नीति में खनन पट्टा देने की दोहरी प्रक्रिया अपनाई गई है। ई-टेंडरिंग के तहत सबसे ऊंची बोली को न्यूनतम मानते हुए पट्टे की नीलामी की जाएगी। इसके बाद अधिकतम बोली लगाने वाले को पट्टा दिया जाएगा। इसके अलावा व्यवस्था यह भी है कि यदि खनन एरिया के तय रेट से 400 गुना अधिक बोली लगती है तो उसी को पट्टा देने के लिए पर्याप्त माना जाएगा तथा इसके बाद ई-टेंडरिंग से पट्टे की नीलामी नहीं होगी। याचिका में कहा गया है कि यह नीति विभेदकारी है। इससे आवेदकों के समानता के अधिकार का हनन होता है। याचिका पर पांच अक्तूबर को सुनवाई हो सकती है।
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