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प्रसव के समय संक्रमण से बचाव जरुरी
Updated Sat, 17 Nov 2018 10:57 PM IST
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प्रसव के समय संक्रमण से बचाव जरुरी
महिलाओं से जुड़े रोगों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा
मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन
प्रयागराज। प्रसव के समय गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है। इसके प्रति सावधानी बतरने की जरुरत परिवारिक सदस्यों के साथ ही चिकित्सक की भी रहती है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में शनिवार को आखिरी दिन स्त्री-प्रसूति रोगों पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहाकि संक्रमण से बचाव करके जच्चा-बच्चा के जीवन की रक्षा की जा सकती है। गोरखपुर की डॉ.साधना गुप्ता ने प्रसव के समय होने वाले संक्रमण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा परिवारजनों में अभाव के चलते कई बार यह खतरनाक हो सकता है इसलिए चिकित्सकों को चाहिए कि वह समय रहते उनको सचेत करें। डॉ.गुप्ता ने इसमें चिकित्सकों की भूमिका को भी अहम बताया।
मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास प्रेक्षागृह में संतानहीनता, मीनोपॉज, अधिक उम्र में गर्भधारण, गर्भपात, बच्चेदानी के ग्रीवा कैंसर समेत महिलाओं की अन्य बीमारियों पर चिकित्सकों ने अनुभव साझा किए। अहमदाबाद की डॉ.कांति बंसल ने आईवीएफ तकनीक पर चर्चा की। डॉ.आरके मारवा ने गर्भावस्था में विटामिन डी के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। नोयडा की डॉ.चित्रा सेटया ने यूरिन से संबंधित विभिन्न बीमारियों के बारे में बताते हुए कहाकि इसके बारे में महिलाएं अधिक जागरुक नहीं होती, उनको समय पर सचेत करने की जरुरत है। डॉ.सुधा यादव ने चर्मरोग के विषय पर चर्चा की। इसके अलावा चिकित्सकों ने बच्चेदानी के ग्रीवा कैंसर के कारण और निवारण के बारे में बताया कि नई विधियों से बच्चेदानी का बचाव कर कैंसर का इलाज कर सकते हैं। इस दौरान डॉ. मीना दयाल, डॉ. बीना गुप्ता, डॉ.अदिति, डॉ. सादिया, डॉ. तोषी, डॉ. अमृता अग्रहरि, डॉ. चित्रा पांडेय, डॉ. सबिता दीक्षित समेत अन्य मौजूद रहीं। संचालन डॉ.अमूता अग्र्रहरि ने किया।
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महिलाओं से जुड़े रोगों पर विशेषज्ञों ने की चर्चा
मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन
प्रयागराज। प्रसव के समय गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का खतरा काफी अधिक बढ़ जाता है। इसके प्रति सावधानी बतरने की जरुरत परिवारिक सदस्यों के साथ ही चिकित्सक की भी रहती है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में शनिवार को आखिरी दिन स्त्री-प्रसूति रोगों पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहाकि संक्रमण से बचाव करके जच्चा-बच्चा के जीवन की रक्षा की जा सकती है। गोरखपुर की डॉ.साधना गुप्ता ने प्रसव के समय होने वाले संक्रमण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा परिवारजनों में अभाव के चलते कई बार यह खतरनाक हो सकता है इसलिए चिकित्सकों को चाहिए कि वह समय रहते उनको सचेत करें। डॉ.गुप्ता ने इसमें चिकित्सकों की भूमिका को भी अहम बताया।
मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास प्रेक्षागृह में संतानहीनता, मीनोपॉज, अधिक उम्र में गर्भधारण, गर्भपात, बच्चेदानी के ग्रीवा कैंसर समेत महिलाओं की अन्य बीमारियों पर चिकित्सकों ने अनुभव साझा किए। अहमदाबाद की डॉ.कांति बंसल ने आईवीएफ तकनीक पर चर्चा की। डॉ.आरके मारवा ने गर्भावस्था में विटामिन डी के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। नोयडा की डॉ.चित्रा सेटया ने यूरिन से संबंधित विभिन्न बीमारियों के बारे में बताते हुए कहाकि इसके बारे में महिलाएं अधिक जागरुक नहीं होती, उनको समय पर सचेत करने की जरुरत है। डॉ.सुधा यादव ने चर्मरोग के विषय पर चर्चा की। इसके अलावा चिकित्सकों ने बच्चेदानी के ग्रीवा कैंसर के कारण और निवारण के बारे में बताया कि नई विधियों से बच्चेदानी का बचाव कर कैंसर का इलाज कर सकते हैं। इस दौरान डॉ. मीना दयाल, डॉ. बीना गुप्ता, डॉ.अदिति, डॉ. सादिया, डॉ. तोषी, डॉ. अमृता अग्रहरि, डॉ. चित्रा पांडेय, डॉ. सबिता दीक्षित समेत अन्य मौजूद रहीं। संचालन डॉ.अमूता अग्र्रहरि ने किया।
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