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मरीजों के अधिकार वाला चार्टर करेगा टार्चर

Tue, 18 Sep 2018 01:35 AM IST
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:35 AM IST
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मरीजों के  अधिकार वाला चार्टर करेगा टार्चर
मरीजों के अधिकार वाला चार्टर मरीजों और नर्सिंग होम संचालकों को टार्चर करेगा। इंसानियत के आधार पर बिल भुगतान के बिना मरीज की छुट्टी संबंधी निर्देश से डॉक्टरों में खलबली मची है। कई बार निर्देश के बाद भी अधिकांश अस्पतालों में चिकित्सा शुल्क की सूची नहीं लगाई गई फिर भी डॉक्टर इस कानून को अस्पतालों को बंद करने का षड़यंत्र बता रहे हैं। साफ है कि बिना जाने गंभीर मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी बढ़ेगी। छुट्टी के समय बिल भुगतान के समय होने वाली किचकिच कानूनी दांव पेच में बदलेगी।
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जार्जटाउन इलाके में अभी पखवाड़े भर पहले का ही मामला है। एक नामचीन नर्सिंग होम में फोड़े का ऑपरेशन करने के नाम पर मरीज से निर्धारित शुल्क से दस गुना अधिक रकम का बिल दिया गया। मरीज ने भुगतान में असमर्थता जताई तो उसे कई घंटे बंधक बनाकर रखा गया। देर रात बीस हजार जमा कराकर बाकी राशि बकाया में दर्ज कर भगा दिया गया। इस मामले की शिकायत सीएमओ और जिलाधिकारी से की गई, लेकिन कार्रवाई अभी तक लंबित है। यह मामला तो बानगी भर है, शहर के कई ऐसे नर्सिंग होम हैं, जहां मरीजों का शोषण किया जाता है।
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आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल का कहना है कि इलाज करने के बाद भुगतान लेना जुर्म नहीं है। मरीज अपने मर्ज और आर्थिक स्थिति का आंकलन कर ही कहीं भर्ती होता है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि बिना पैसे दिए मरीज को छोड़ने के बाद सेवाओं, दवा के मद में भुगतान कौन करेगा। मरीज पैसे न देने पड़े मुकदमा करेगा, डॉक्टर काम छोड़ कर पुलिस और कचहरी के चक्कर लगाएगा। उन्होंने कहा कि एएमए क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के कई प्रावधानों का विरोध कर रहा है। मरीज को दूसरी राय लेने का पूरा अधिकार है, लेकिन इलाज तो विश्वास के आधार पर ही कराना होगा।
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वहीं एएमए स्थानीय शाखा के अध्यक्ष डॉ. अनिल शुक्ला ने बताया कि सरकार इस तरह के नियम थोप कर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। अस्पताल या क्लीनिक संचालक अन्य व्यवसाय की तुलना में कई तरह के टैक्स देते हैं। इस सिटीजन चार्टर के दूरगामी परिणाम होंगे। डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास कम होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय कॉरपोरेट घरानों के बड़े अस्पतालों को बढ़ावा देने और छोटे-छोटे सस्ते में इलाज कराने वाले अस्पतालों को बंद कराने की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है। डॉक्टर समुदाय चार्टर के कई बिंदुओं पर असहमत हैं। मरीजों के साथ डॉक्टरों का हित भी देखना होगा।
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