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विशेष कोर्ट एमपी-एमएलए
Updated Thu, 30 Aug 2018 02:04 AM IST
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स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए
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क्षेत्राधिकार को लेकर उलझा मामला
0 विशेष न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से मांगा दिशा निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। माननीयों के मुकदमों के लिए गठित स्पेशल कोर्ट के क्षेत्राधिकार का मामला उलझ गया है। स्पेशल मौजूदा एमपीएमएल के ही मुकदमों की सुनवाई करेगी या पूर्व एमपीएमएलए के मुकदमे भी सुनें जाएंगे। इसी प्रकार से मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुने जाने वाले कम सजा के मुकदमों की सुनवाई भी स्पेशल कोर्ट ही करेगी या नहीं, इन सवालों पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अमर उजाला ने पहले ही अपनी खबर में ऐसे सवालों पर स्थिति साफ नहीं होने की बात कही थी।
इन सवालों को लेकर विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट के महानिबंधक और संयुक्त निबंधक अतुल श्रीवास्तव को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगा है। हाईकोर्ट को लिखे पत्र में विशेष न्यायाधीश ने कहा है कि निर्वाचित एमपी एमएलए की श्रेणी में क्या भूतपूर्व एमपी एमएलए के प्रकरण भी शामिल किए गए है। और स्पेशल कोर्ट को क्या मजिस्ट्रेट द्वारा परीक्षणीय मुकदमे और 156(3) की अर्जी और परिवाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार भी दिया गया है।
यह मामला तब उलझा जब जौनपुर जनपद से माननीयों के खिलाफ लंबित मजिस्ट्रेट ट्रायल से संबंधित पत्रावली कोर्ट में सुनवाई के लिए आ गई। स्पेशल कोर्ट के गठन के लिए जारी अधिसूचना में केवल यह लिखा गया है कि निर्वाचित एमपी एमएलए के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट करेगी। इसकी सुनवाई के लिए प्रदेश स्तर पर इलाहाबाद में कोर्ट बनाई गई है जिसमें विधिवत सुनवाई शुरू हो चुकी है। हालांकि स्पेशल कोर्ट में अभी इलाहाबाद जनपद की लंबित पत्रावलियों पर सुनवाई की जा रही है। इसमें पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों के मामले शामिल है। क्षेत्राधिकार को लेकर भ्रम शुरू से बना हुआ है। क्योंकि इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी नहीं हुआ है।
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क्षेत्राधिकार को लेकर उलझा मामला
0 विशेष न्यायाधीश ने हाईकोर्ट से मांगा दिशा निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। माननीयों के मुकदमों के लिए गठित स्पेशल कोर्ट के क्षेत्राधिकार का मामला उलझ गया है। स्पेशल मौजूदा एमपीएमएल के ही मुकदमों की सुनवाई करेगी या पूर्व एमपीएमएलए के मुकदमे भी सुनें जाएंगे। इसी प्रकार से मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुने जाने वाले कम सजा के मुकदमों की सुनवाई भी स्पेशल कोर्ट ही करेगी या नहीं, इन सवालों पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अमर उजाला ने पहले ही अपनी खबर में ऐसे सवालों पर स्थिति साफ नहीं होने की बात कही थी।
इन सवालों को लेकर विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट के महानिबंधक और संयुक्त निबंधक अतुल श्रीवास्तव को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगा है। हाईकोर्ट को लिखे पत्र में विशेष न्यायाधीश ने कहा है कि निर्वाचित एमपी एमएलए की श्रेणी में क्या भूतपूर्व एमपी एमएलए के प्रकरण भी शामिल किए गए है। और स्पेशल कोर्ट को क्या मजिस्ट्रेट द्वारा परीक्षणीय मुकदमे और 156(3) की अर्जी और परिवाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार भी दिया गया है।
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यह मामला तब उलझा जब जौनपुर जनपद से माननीयों के खिलाफ लंबित मजिस्ट्रेट ट्रायल से संबंधित पत्रावली कोर्ट में सुनवाई के लिए आ गई। स्पेशल कोर्ट के गठन के लिए जारी अधिसूचना में केवल यह लिखा गया है कि निर्वाचित एमपी एमएलए के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट करेगी। इसकी सुनवाई के लिए प्रदेश स्तर पर इलाहाबाद में कोर्ट बनाई गई है जिसमें विधिवत सुनवाई शुरू हो चुकी है। हालांकि स्पेशल कोर्ट में अभी इलाहाबाद जनपद की लंबित पत्रावलियों पर सुनवाई की जा रही है। इसमें पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों के मामले शामिल है। क्षेत्राधिकार को लेकर भ्रम शुरू से बना हुआ है। क्योंकि इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी नहीं हुआ है।
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