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सीबीआई के निशाने पर आयोग के आठ सचिव
Updated Mon, 05 Mar 2018 01:48 AM IST
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सीबीआई के निशाने पर आयोग के कई पूर्व सचिव
0 आयोग के कुछ सचिवों की नियुक्ति पर शुरू से बना रहा विवाद
0 दो सचिवों के कार्यकाल में सर्वाधिक गड़बड़ी, पूछताछ की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुईं भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई के निशाने पर अब आयोग के कई पूर्व सचिव भी हैं। वर्ष 2012 से 2017 तक आयोग में कुल आठ सचिवों की तैनाती रही और कुछ की तैनाती पर काफी विवाद भी रहा। यहां तक कि एक सचिव को हाईकोर्ट के आदेश पर पर से हटाया गया। साथ ही दो सचिवों के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे अधिक विवाद सामने आए। सीबीआई अब इन पूर्व सचिवों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।
वैसे तो आयोग से जुड़े सभी निर्णय अध्यक्ष और सदस्यों की बैठक में लिए जाते लेकिन उन्हें लागू आयोग के सचिव ही करते हैं। यहां तक कि आयोग के निर्णय पर सचिव के हस्ताक्षर से ही आदेश जारी किए जाते हैं। ऐसे में अध्यक्ष एवं सदस्यों के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सचिव की होती है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव ने जब कार्यकाल संभाला तो उस वक्त बीबी सिंह आयोग के सचिव थे लेकिन माह भर बाद ही झांसी के कमिश्नर पद पर उनका तबादला कर दिया गया। सचिव आईएएस का पद है लेकिन, बीबी सिंह के जाने के बाद इस पद पर पीसीएस अधिकारी अनिल यादव की तैनाती कर दी गई। उनकी तैनाती पर भी सवाल उठे, क्योंकि उस वक्त उनसे वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी पीएन दुबे आयोग में परीक्षा नियंत्रक थे और तब सवाल उठे थे कि सीनियर अफसर के रहते जूनियर अफसर की तैनाती सचिव जैसे बड़े पद कैसे की गई। अनिल यादव के जाने के बाद आयोग में ही सेक्शन अफसर रहे रिजवानउर रहमान को कार्यकारी सचिव बना दिया गया। इसके बाद जेपी चौरसिया की नियुक्ति सचिव पद पर हो गई। हालांकि डेढ़ माह बाद ही जेपी चौरसिया का तबादला कर दिया गया और उनके जाते ही रिजवानउर रहमान को फिर से कार्यवाहक सचिव बना दिया गया।
रिजवान की तैनाती का विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर रिजवानउर रहमान को पद से हटा दिया गया। अनिल यादव और रिजवान का सचिव के रूप में कार्यकाल सबसे लंबा रहा और इन्हीं के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे अधिक विवाद सामने आए। रिजवानउर रहमान को पद से हटाए जाने के बाद सुरेश पाल सिंह और फिर चंद्र पाल सचिव बनाकर भेजे गए। इनके जाने के बाद कुछ दिनों के लिए तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को सचिव का चार्ज सौंप दिया गया। प्रभुनाथ को लेकर भी विवाद बना रहा। उनके बाद आईएएस अधिकारी अटल कुमार राय को सचिव बनाया गया। उन्हीं के कार्यकाल में पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में अभ्यर्थी सुहासिनी बजापेयी की कॉपी बदल जाने का मामला सामना आया। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जिस कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है, उसमें सभी आठ सचिव जांच के दायरे में आ रहे हैं। कुछ सचिवों की तैनाती सीधे विवाद से जुड़ी रही, सो वे सीबीआई के निशाने पर हैं। सूत्रों के मुताबिक आयोग से सुबूत जुटाने के बाद सीबीआई अब इन पूर्व सचिवों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।
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0 आयोग के कुछ सचिवों की नियुक्ति पर शुरू से बना रहा विवाद
0 दो सचिवों के कार्यकाल में सर्वाधिक गड़बड़ी, पूछताछ की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुईं भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई के निशाने पर अब आयोग के कई पूर्व सचिव भी हैं। वर्ष 2012 से 2017 तक आयोग में कुल आठ सचिवों की तैनाती रही और कुछ की तैनाती पर काफी विवाद भी रहा। यहां तक कि एक सचिव को हाईकोर्ट के आदेश पर पर से हटाया गया। साथ ही दो सचिवों के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे अधिक विवाद सामने आए। सीबीआई अब इन पूर्व सचिवों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।
वैसे तो आयोग से जुड़े सभी निर्णय अध्यक्ष और सदस्यों की बैठक में लिए जाते लेकिन उन्हें लागू आयोग के सचिव ही करते हैं। यहां तक कि आयोग के निर्णय पर सचिव के हस्ताक्षर से ही आदेश जारी किए जाते हैं। ऐसे में अध्यक्ष एवं सदस्यों के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सचिव की होती है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव ने जब कार्यकाल संभाला तो उस वक्त बीबी सिंह आयोग के सचिव थे लेकिन माह भर बाद ही झांसी के कमिश्नर पद पर उनका तबादला कर दिया गया। सचिव आईएएस का पद है लेकिन, बीबी सिंह के जाने के बाद इस पद पर पीसीएस अधिकारी अनिल यादव की तैनाती कर दी गई। उनकी तैनाती पर भी सवाल उठे, क्योंकि उस वक्त उनसे वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी पीएन दुबे आयोग में परीक्षा नियंत्रक थे और तब सवाल उठे थे कि सीनियर अफसर के रहते जूनियर अफसर की तैनाती सचिव जैसे बड़े पद कैसे की गई। अनिल यादव के जाने के बाद आयोग में ही सेक्शन अफसर रहे रिजवानउर रहमान को कार्यकारी सचिव बना दिया गया। इसके बाद जेपी चौरसिया की नियुक्ति सचिव पद पर हो गई। हालांकि डेढ़ माह बाद ही जेपी चौरसिया का तबादला कर दिया गया और उनके जाते ही रिजवानउर रहमान को फिर से कार्यवाहक सचिव बना दिया गया।
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रिजवान की तैनाती का विवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर रिजवानउर रहमान को पद से हटा दिया गया। अनिल यादव और रिजवान का सचिव के रूप में कार्यकाल सबसे लंबा रहा और इन्हीं के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सबसे अधिक विवाद सामने आए। रिजवानउर रहमान को पद से हटाए जाने के बाद सुरेश पाल सिंह और फिर चंद्र पाल सचिव बनाकर भेजे गए। इनके जाने के बाद कुछ दिनों के लिए तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को सचिव का चार्ज सौंप दिया गया। प्रभुनाथ को लेकर भी विवाद बना रहा। उनके बाद आईएएस अधिकारी अटल कुमार राय को सचिव बनाया गया। उन्हीं के कार्यकाल में पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में अभ्यर्थी सुहासिनी बजापेयी की कॉपी बदल जाने का मामला सामना आया। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जिस कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है, उसमें सभी आठ सचिव जांच के दायरे में आ रहे हैं। कुछ सचिवों की तैनाती सीधे विवाद से जुड़ी रही, सो वे सीबीआई के निशाने पर हैं। सूत्रों के मुताबिक आयोग से सुबूत जुटाने के बाद सीबीआई अब इन पूर्व सचिवों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।
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