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शहर के बाहर जाने को तैयार नहीं पशुपालक
Updated Sat, 15 Jul 2017 07:59 PM IST
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शहर के बाहर जाने को तैयार नहीं पशुपालक
- सर्किल रेट से आधी कीमत पर जमीन देने का है प्रस्ताव
- सड़कों पर छुट्टा घूमते मवेशी स्मार्ट सिटी पर धब्बा हो रहे हैं साबित
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। अब जब इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन सड़कों पर छुट्टा घूमते मवेशी स्मार्ट सिटी पर धब्बा साबित हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि नगर निगम ने पशुओं को शहर के बाहर ले जाने की योजना नहीं बनाई। इसके लिए निगम ने नैनी और फाफामऊ में कैटिल कॉलोनी बनाई। दोनों कॉलियों में 167 प्लॉट तैयार किए गए। पशुपालकों को यहां सर्किल रेट से आधी कीमत पर जमीन देने का फैसला हुआ। नगर निगम ने चार बार विज्ञापन प्रकाशित भी किया, लेकिन एक भी पशुपालक ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। ऐसा न करने पर निगम ने पशु को पकड़ने का अभियान चलाया। बड़ी संख्या में पशु पकड़े, भारी-भरकम जुर्माना भी वसूला गया, लेकिन पशुपालकों पर इसका असर नहीं है।
नगर निगम द्वारा कैटिल कालोनी के लिए नैनी में 106 एवं फाफामऊ में 61 भूखंडों का आवंटन किया गया है। ताकि शहरी क्षेत्र के पशुपालक वहां शिफ्ट हो जाएं। निगम द्वारा इसके लिए सबसे पहले जनवरी 2016, अप्रैल 2016, अक्तूबर 2016 और मई 2017 में विज्ञापन भी प्रकाशित किया गया, लेकिन अब तक किसी भी पशुपालक ने वहां प्रतिभाग नहीं किया। इस बीच वित्तीय वर्ष 2016-17 नगर निगम द्वारा साल चले अभियान के दौरान 5889 पशुओं को शहरी सीमा में पकड़ा गया। इसमें 2050 गोसदन एवं 2179 साड़/बछड़ा शहरी सीमा से बाहर छोड़े गए। 1660 पशुओं की रिहाई की एवज में 2.89 लाख रुपये की आय हुई। नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ.धीरज गोयल के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1250 साड़/बछड़ा को नगर सीमा क्षेत्र से बाहर छोड़ा गया। इसमें से 116 गोवंशीय पशुओं को गोसदन भेजा गया। पशुबाड़े में पशुओं की रिहाई से 63910 रुपये की आय हुई।
कुत्तों की नसबंदी के लिए संस्था का हुआ चयन
- शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर नगर निगम ने कुत्तों की नसंबदी कराने वाली संस्था का चयन कर लिया है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ.धीरज गोयल ने इसकी पुष्टि की है।
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- सर्किल रेट से आधी कीमत पर जमीन देने का है प्रस्ताव
- सड़कों पर छुट्टा घूमते मवेशी स्मार्ट सिटी पर धब्बा हो रहे हैं साबित
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। अब जब इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन सड़कों पर छुट्टा घूमते मवेशी स्मार्ट सिटी पर धब्बा साबित हो रहे हैं। ऐसा नहीं है कि नगर निगम ने पशुओं को शहर के बाहर ले जाने की योजना नहीं बनाई। इसके लिए निगम ने नैनी और फाफामऊ में कैटिल कॉलोनी बनाई। दोनों कॉलियों में 167 प्लॉट तैयार किए गए। पशुपालकों को यहां सर्किल रेट से आधी कीमत पर जमीन देने का फैसला हुआ। नगर निगम ने चार बार विज्ञापन प्रकाशित भी किया, लेकिन एक भी पशुपालक ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। ऐसा न करने पर निगम ने पशु को पकड़ने का अभियान चलाया। बड़ी संख्या में पशु पकड़े, भारी-भरकम जुर्माना भी वसूला गया, लेकिन पशुपालकों पर इसका असर नहीं है।
नगर निगम द्वारा कैटिल कालोनी के लिए नैनी में 106 एवं फाफामऊ में 61 भूखंडों का आवंटन किया गया है। ताकि शहरी क्षेत्र के पशुपालक वहां शिफ्ट हो जाएं। निगम द्वारा इसके लिए सबसे पहले जनवरी 2016, अप्रैल 2016, अक्तूबर 2016 और मई 2017 में विज्ञापन भी प्रकाशित किया गया, लेकिन अब तक किसी भी पशुपालक ने वहां प्रतिभाग नहीं किया। इस बीच वित्तीय वर्ष 2016-17 नगर निगम द्वारा साल चले अभियान के दौरान 5889 पशुओं को शहरी सीमा में पकड़ा गया। इसमें 2050 गोसदन एवं 2179 साड़/बछड़ा शहरी सीमा से बाहर छोड़े गए। 1660 पशुओं की रिहाई की एवज में 2.89 लाख रुपये की आय हुई। नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ.धीरज गोयल के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1250 साड़/बछड़ा को नगर सीमा क्षेत्र से बाहर छोड़ा गया। इसमें से 116 गोवंशीय पशुओं को गोसदन भेजा गया। पशुबाड़े में पशुओं की रिहाई से 63910 रुपये की आय हुई।
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कुत्तों की नसबंदी के लिए संस्था का हुआ चयन
- शहरी क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर नगर निगम ने कुत्तों की नसंबदी कराने वाली संस्था का चयन कर लिया है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ.धीरज गोयल ने इसकी पुष्टि की है।
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