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विश्वगुरु बन सकता है भारत
Updated Sat, 17 Jun 2017 09:07 PM IST
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वैदिक संस्कृति से जुड़कर ही, विश्वगुरु बन सकता है भारत
0 उपमुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा, वैदिक संस्कृति में सर्वमंगल की कामना
0 फाफामऊ में ‘इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर’ का औपचारिक उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा है कि पूरी दुनिया में भारतीय वैदिक संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जिसमें ‘सर्वे भवंतु सुखिन:’ के साथ सर्वमंगल का कामना है। वैदिक संस्कृति में ही पशु-पक्षियों, वृक्षों को देवों का दर्जा देकर उनकी पूजा और रक्षा करते हैं। वेदों से जुड़कर ही भारत पुन:विश्वगुरु बन सकता है।
फाफामऊ स्थित शिवगंगा विद्या मदिर में आयोजित कार्यक्रम ‘उतिष्ठ’ के तहत उन्होंने कहा, दुनिया की तमाम सभ्यताओं से हजारों वर्ष पहले विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ, वेदों की रचना हुई। भारत ऋषि-कृषि का देश रहा है। वैदिक परंपरा के संरक्षण और विकास के लिए की गई पहल स्वागतयोग्य है। इससे पहले उन्होंने विद्यालय में स्थापित ‘इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर’ का औपचारिक उद्घाटन किया।
यूनेस्को के सदस्य अलेक्जेंडर उसेनिन ने वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया। कहा, वेदों में ही जीवन को सफल बनाने का मंत्र है। भारत की वैदिक संस्कृति में ही पर्यावरण संरक्षण और एक श्रेष्ठ इंसान बनने के सूत्र हैं। इसके आधार पर पर्यावरण संरक्षण सहित दुनिया की सभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
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जर्मन वैदिक स्कॉलर मारिया विर्थ ने कहा, पूरी दुनिया ने वेदों की महत्ता स्वीकार की है। भारत को फिर से वैदिक ज्ञान को अपनाना होगा। इसी क्रम में रशियन वैदिक स्कॉलर ऑबलोनोकोव इगोर, इस्कॉन नेपाल के रीजनल सेक्रे ट्री पत्री प्रभु, नेपाल के इस्कॉन अध्यक्ष रुपेश गौरा दास ने भी वैदिक संस्कृति की महत्ता बताई।
आरंभ में महापौर अभिलाषा गुप्ता ‘नंदी’ ने बुके देकर उप मुख्यमंत्री का स्वागत किया। स्वदेशी जागरण मंच के डॉ.निरंजन सिंह ने संचालन जबकि निदेशक प्रो.एसएस ओझा ने स्वागत और सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। रूस, जर्मनी, नेपाल के अनेक वैदिक विद्वानों, शोधार्थियों के अतिरिक्त आएएफ कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, संयोजक आलोक ओझा आदि मौजूद थे।
क्या है ‘इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर’
भारत की वैदिक संस्कृति को बचाने और उसे विकसित करके जन-जन तक ले जाने के उद्देश्य से ही यूनेस्को की पहल पर इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर की स्थापना की गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को वेदों के सूत्रों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की सीख देने सहित श्रेष्ठ व्यक्ति बनाना है। इसमें वैदिक स्कॉलर्स के अतिरिक्त इस्कॉन के सदस्य भी सहयोग करेंगे। यहां विद्यार्थियों को वैदिक, वैज्ञानिक, तकनीकी ज्ञान देने सहित रूसी भाषा भी सिखाई जाएगी। वहीं मेधावियों को छात्रवृत्ति देकर उच्च शिक्षा के लिए रूस भेजा जाएगा।
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0 उपमुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा, वैदिक संस्कृति में सर्वमंगल की कामना
0 फाफामऊ में ‘इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर’ का औपचारिक उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा है कि पूरी दुनिया में भारतीय वैदिक संस्कृति ही एकमात्र ऐसी संस्कृति है जिसमें ‘सर्वे भवंतु सुखिन:’ के साथ सर्वमंगल का कामना है। वैदिक संस्कृति में ही पशु-पक्षियों, वृक्षों को देवों का दर्जा देकर उनकी पूजा और रक्षा करते हैं। वेदों से जुड़कर ही भारत पुन:विश्वगुरु बन सकता है।
फाफामऊ स्थित शिवगंगा विद्या मदिर में आयोजित कार्यक्रम ‘उतिष्ठ’ के तहत उन्होंने कहा, दुनिया की तमाम सभ्यताओं से हजारों वर्ष पहले विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ, वेदों की रचना हुई। भारत ऋषि-कृषि का देश रहा है। वैदिक परंपरा के संरक्षण और विकास के लिए की गई पहल स्वागतयोग्य है। इससे पहले उन्होंने विद्यालय में स्थापित ‘इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर’ का औपचारिक उद्घाटन किया।
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यूनेस्को के सदस्य अलेक्जेंडर उसेनिन ने वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया। कहा, वेदों में ही जीवन को सफल बनाने का मंत्र है। भारत की वैदिक संस्कृति में ही पर्यावरण संरक्षण और एक श्रेष्ठ इंसान बनने के सूत्र हैं। इसके आधार पर पर्यावरण संरक्षण सहित दुनिया की सभी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।
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जर्मन वैदिक स्कॉलर मारिया विर्थ ने कहा, पूरी दुनिया ने वेदों की महत्ता स्वीकार की है। भारत को फिर से वैदिक ज्ञान को अपनाना होगा। इसी क्रम में रशियन वैदिक स्कॉलर ऑबलोनोकोव इगोर, इस्कॉन नेपाल के रीजनल सेक्रे ट्री पत्री प्रभु, नेपाल के इस्कॉन अध्यक्ष रुपेश गौरा दास ने भी वैदिक संस्कृति की महत्ता बताई।
आरंभ में महापौर अभिलाषा गुप्ता ‘नंदी’ ने बुके देकर उप मुख्यमंत्री का स्वागत किया। स्वदेशी जागरण मंच के डॉ.निरंजन सिंह ने संचालन जबकि निदेशक प्रो.एसएस ओझा ने स्वागत और सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। रूस, जर्मनी, नेपाल के अनेक वैदिक विद्वानों, शोधार्थियों के अतिरिक्त आएएफ कमांडेंट दिनेश सिंह चंदेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, संयोजक आलोक ओझा आदि मौजूद थे।
क्या है ‘इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर’
भारत की वैदिक संस्कृति को बचाने और उसे विकसित करके जन-जन तक ले जाने के उद्देश्य से ही यूनेस्को की पहल पर इंडो रशियन वैदिक कल्चरल सेंटर की स्थापना की गई है। इसके तहत विद्यार्थियों को वेदों के सूत्रों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की सीख देने सहित श्रेष्ठ व्यक्ति बनाना है। इसमें वैदिक स्कॉलर्स के अतिरिक्त इस्कॉन के सदस्य भी सहयोग करेंगे। यहां विद्यार्थियों को वैदिक, वैज्ञानिक, तकनीकी ज्ञान देने सहित रूसी भाषा भी सिखाई जाएगी। वहीं मेधावियों को छात्रवृत्ति देकर उच्च शिक्षा के लिए रूस भेजा जाएगा।