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पिता की हत्या के आरोपी बेटे की सजा माफ
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आगरा (फिरोजाबाद) के ध्यानार्थ
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पिता की हत्या के आरोपी बेटे की सजा माफ
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने पिता की हत्या करने के आरोपी बेटे को सुनाई गई दस वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा रद्द कर दी है। आदेश दिया है कि वह यदि किसी अन्य मुकदमे में वांछित नहीं है तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाए। आदेश सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सजा देने योग्य पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
फिरोजाबाद के टुंडला सुरमावाली गली निवासी कौशल की जेल अपील पर न्यायमूर्ति घंडीकोटा श्रीदेवी ने यह आदेश दिया। मामले के अनुसार अभियुक्त कौशल अपने पिता जगदीश के साथ रहता था। तीन नवंबर 2010 को पिता पुत्र के बीच विवाद हुआ। अगले दिन सुबह देर तक उनके घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों ने झांक कर देखा। जगदीश बिस्तर पर मृत पड़ा था। उसके सिर पर हथौडे़ से प्रहार किया गया था। मानसिक रूप से बीमार कौशल उसके बगल में सोया था। पुलिस ने उसे हत्या का दोषी मानते हुए आरोपपत्र दाखिल किया था। अदालत ने उसे मानव वध का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत नहीं है कि आरोपी को ही दोषी माना जाए।
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पिता की हत्या के आरोपी बेटे की सजा माफ
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने पिता की हत्या करने के आरोपी बेटे को सुनाई गई दस वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा रद्द कर दी है। आदेश दिया है कि वह यदि किसी अन्य मुकदमे में वांछित नहीं है तो उसे जेल से रिहा कर दिया जाए। आदेश सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ सजा देने योग्य पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
फिरोजाबाद के टुंडला सुरमावाली गली निवासी कौशल की जेल अपील पर न्यायमूर्ति घंडीकोटा श्रीदेवी ने यह आदेश दिया। मामले के अनुसार अभियुक्त कौशल अपने पिता जगदीश के साथ रहता था। तीन नवंबर 2010 को पिता पुत्र के बीच विवाद हुआ। अगले दिन सुबह देर तक उनके घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों ने झांक कर देखा। जगदीश बिस्तर पर मृत पड़ा था। उसके सिर पर हथौडे़ से प्रहार किया गया था। मानसिक रूप से बीमार कौशल उसके बगल में सोया था। पुलिस ने उसे हत्या का दोषी मानते हुए आरोपपत्र दाखिल किया था। अदालत ने उसे मानव वध का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत नहीं है कि आरोपी को ही दोषी माना जाए।
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