फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   हमले से द हली थी अयोध्या

हमले से द हली थी अयोध्या

Tue, 18 Jun 2019 09:00 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jun 2019 09:00 PM IST
विज्ञापन
हमले से द हली थी अयोध्या
भीषण धमाके से दहल उठी थी अयोध्या
विज्ञापन

0 डेढ़ घंटे तक होती रही गोलीबारी, सीआरपीएफ ने ढेर कर दिए थे पांचों आतंकी
प्रयागराज। पांच जुलाई 2005 की सुबह रामनगरी अयोध्या भीषण बम धमाके से दहल उठी थी। धमाका किया था रामजन्म भूमि परिसर में घुसने का प्रयास कर रहे पांच आतंकवादियों ने। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक अयोध्यावासी बमों के धमाकों और गोलियों की तडताड़हट के बीच सहमे रहे।
पांच जुलाई को सुबह करीब सवा नौ बजे रामजन्म भूमि परिसर से ठीक पहले जैन मंदिर के पास बनी बैरिकेटिंग पर एक सफेद रंग की मार्शल जीप महिंद्रा इकोनॉमी आकर रूकी। इसमें सवार पांच लोग जीप के रुकते ही उसमें से कूद कर अलग-अलग दिशाओं में भागे। जैन मंदिर के पास तैनात 11 वीं वाहिनी पीएसी के दलनायक कृष्णचंद्र सिंह जबतक कुछ समझ पाते जीप में जोर का धमाका हुआ जिससे चारो ओर धुंआ छा गया। धमाके से लगभग दस मीटर बेरिकेटिंग उड़ गई थी। आतंकियों की ओर से सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाकर एके 47 राइफलों से गोलीबारी शुरू कर दी। आतंकी रॉकेट लांचर और ग्रेनेड का भी प्रयोग कर रहे थे। पांचों आतंकी अलग-अलग दिशा से मुख्य परिसर की ओर बढ़ रहे थे।
विज्ञापन

पीएसी के जवानों से उनकी चारों ओर से घेरा बंदी शुरू कर दी। तबतक इनर कार्डेन में तैनात सीआरपीएफ की टुकड़ियों ने भी मोर्चा संभाल लिया था। सीआरपीएफ कंपनी कमांडर विजेरो टिनी और महिला कंपनी कमांडर संतोदेवी की टुकड़ी ने मुख्य परिसर को पूरी तरह से घेर लिया और जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। इससे आतंकी मुख्य परिसर घुस नहीं सके। इस बीच 33 वीं वाहिनी पीएसी ने जैन मंदिर के पास बने जनरेटर रूम के बगल वाले मकान पर चढ़कर आतंकियों पर फायरिंग शुरू कर दी। इस सब में करीब आधे घंटे बीत गए थे। अब तक फैजाबाद एसएसपी के साथ सिविल पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी थी। सिविल पुलिस ने सीता रसोई की ओर मोर्चा संभाल लिया। अब आतंकी चारों ओर से घिर चुके थे। करीब 11 बजे तक आतंकियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच गोलियां चलती रहीं। इसके बाद आतंकियों की ओर से फायरिंग बंद हो गई। इसके बावजूद सुरक्षाबलों ने ऐहतियात बरतते हुए करीब आधे घंटे इंतजार किया। जब आतंकियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो पूरे इलाके को घेर का काबिंग शुरू कराई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

काबिंग के दौरान इनर कार्डेन के पास सीमेंटेड रास्ते पर दो आतंकियों के शव पाए गए। दोनों की उम्र लगभग 30 वर्ष थी और उनके पास से एके 47 राफइलें, गोलियों, हैंडग्रेनेड तथा रॉकेट लांचर के अलावा चाइना मेड पिस्टल और कुरान बरामद की गई। दो आतंकियों के शव सीता रसोई के पश्चिमी हिस्से में झाड़ियों के बीच पाए गए। इनमें से एक आतंकी मानव बम बना था। उसने खुद को उड़ा लिया था। उसके शव के टुकड़े इधर उधर पड़े हुए जिससे उसके हुलिए और आयु का पता नहीं चल सका। इनके पास से भी रॉकेट लांचर, हैंड ग्रेनेड, एके 47 राइफल और बड़ी मात्र गोलियां तथा मैगजीन आदि बरामद हुई। पांचवें आतंकी का शव जनरेटर रूम के पास आउटर कार्डेन की ओर से जाने वाले रास्ते पर मिला। इसकी उम्र करीब 25 वर्ष थी। इसके पास से भी आत्याधुनिक राइफल, ग्रेनड और गोलियां बरामद हुई। इस सब के अलावा आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल हैंडसेट भी घटना स्थल से बरामद किए गए।
हमले दो नागरिकों की भी मौत
प्रयागराज। आतंकी हमले में दो बेकसूर नागारिकों रमेश कुमार पांडेय और शांति देवी की भी गोलियां लगने से मौत हो गई। यह दोनों आतंकियों की ओर से की जा रही फायरिंग की चपेट में आ गए। जबकि मुठभेड़ में सात सुरक्षाकर्मी घायल हुए जिनमें इंस्पेक्टर नंदकिशोर शर्मा, हेड कांस्ेटबल सुल्तान सिंह, हेडकांस्टेबल धर्मवीर सिंह, पीएसी आरक्षी हिमांशु यादव, कृष्ण स्वरूप, हेडकांस्टेबल प्रेमचंद्र गर्ग और सीआरपीएफ की सहायक कमाडेंट संतोदेवी थी। हमले की घटना की तहरीर पीएसी दल नायक कृष्णचंद्र सिंह की ओर से थाना रामजन्म भूमि में दर्ज कराई गई।
000000000000000000000000

बाबरी मस्जिद विंध्वस का बदला लेने आए थे आतंकी
प्रयागराज। रामजन्म भूमि पर आतंकी हमला करने के पीछे आतंकियों का इरादा बाबरी मस्जिद ढहाए जाने का बदला लेना था। जांच के बाद पुलिस द्वारा प्रेषित आरोपपत्र में जो हमले का जो मोटिव(उद्देश्य) बताया गया है वह यही है। आरोपपत्र में कहा गया है कि आतंकवादी रामलला मंदिर को ध्वस्त करके दो सम्प्रदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने और साम्प्रदायिक सौहार्द को नष्ट करना चाहते थे। उनका इरादा एक सम्प्रदाय की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना था।
00000000000000000000000000

सर्विलांस ने पहुंचाया आतंकियों के मददगारों तक
0 आतंकियों से बरामद मोबाइल हैंडसेट और सिम से खुला राज
प्रयागराज। रामजन्म भूमि पर हमले करने वाले पांचों आतंकी भले ही मौके पर ही मार दिए गए पर उनके पास से बरामद मोबाइल ने पुलिस को घटना के साजिशकर्ताओं और मददगारों तक पहुंचा दिया। एक आतंकी की जेब से बरामद बिना बैटरी और बिना सिमकार्ड के नोकिया हैंडसेट को सर्विलांस पर डालने से मोबाइल नंबंर 9891719808 ट्रेस हुआ। इसके बाद उस हैंडसेट में आठ सिमकार्ड उपयोग किए जाने की जानकारी मिली। इन सभी को सर्विलांस की मदद से ट्रेस कर लिया गया। बाद में तीन नंबंरों का और पता चला जिसमें से एक नंबर जम्मू के शहजान की दुकान से खरीदा गया था। शहजान से पूछताछ में पता चला कि उपरोक्त नंबर का सिम नसीम ने लश्करे तोइबा कमांडर कारी के कहने पर खरीदा था। मो. अजीज ने इसे वेरीफाइ किया था। कारी ने सिम कार्ड आशिक इकबाल उर्फ फार्रुख को दिया था। इस तरह से अभियुक्त मो. नसीम, मो अजीज, मो शकील और आशिक इकबाल 28 जुलाई 2005 को जम्मू से पकड़े गए।
0000000000000000000
टाटा सूमो में कैविटी बनाकर लाए गए असलहे
प्रयागराज। आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए बम और असलहों को अयोध्या तक पहुंचाने में टाटा सूमो का इस्तेमाल हुआ। टाटा सूमो मो. शकील की थी जिसे आशिक इकबाल चलाता था। शकील की सहमति से आशिक इसे श्रीनगर ले गया। वहां अदनान नाम के आतंकी ने सूमो में कैविटी बनाई और बक्से फिट किए। कुछ हाथियार जम्मू से तो कुछ राइफलों की व्यवस्था पानीपत से की गई। आतंकी मुश्ताक के सहयोग से इन असलहों को पहले अलीगढ़ में लाकर रखा गया।
000000000000000000000000000
घटना में हर एक की थी अहम भूमिका
प्रयागराज। रामजन्म भूमि पर आतंकी हमले की घटना को अंजाम देने वाले आतंकियों के पांचों मददगारों की पूरे मामले में अहम भूमिका रही। इन्हीं की मदद से इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दिया गया।
1- आसिफ इकबाल उर्फ फार्रुख- हमले का मुख्य साजिशकर्ता और सहयोगी। शकील की टाटा सूमो यही चलाता था। आतंकी कारी के सीधे संपर्क में था। शकील को इसी ने कारी से मिलवाया। घटना को अंजाम देने में हर मोड़ पर इसकी भूमिका रही। असलहों का जम्मू, पानीपत और श्रीननगर से इंतजाम कर खुद टाटा सूमो चलाकर अलीगढ़ तक पहुंचाया। इसमें आतंकी मुश्ताक का सहयोग लिया गया। सर्विलांस में आतंकी कारी, डा. इरफान, शकील, अब्दुल माजिद आदि से बातचीत की सीडीआर बरामद की गई है। कारी द्वारा दिया गया सिम कार्ड और नोकिया हैंडसेट ने मेण्डर में नाले में फेंक दिया था जो बरामद नहीं हुआ।
2- डा. इरफान- दिल्ली में क्लीनिक चलाता था। हमले मेें शामिल आतंकियों को पनाह दी। हमले मारे गए आतंकियों में एक मात्र पहचाने गए आतंकी अरशद का इसके यहां आना जाना था। रामजन्म भूमि की पूरी लोकेशन इसी ने आतंकियों को उपलब्ध कराई। गिरफ्तारी पर इसके कब्जे से एक पैनासोनिक मोबाइल बरामद हुआ। इसी मोबाइल से इसने मारे गए आतंकियों के मोबाइल पर बात की थी। हमले में शामिल आतंकियों द्वारा उपयोग किए गए सिमकार्ड का इस्तेमाल इसके मोबाइल हैंडसेट से भी किया गया था।

3- मो. नसीम- नसीम ने जम्मू में शहजान की दुकान से अपने पहचानपत्र पर सिमकार्ड खरीदा। एके 47 राइफल की व्यवस्था करने पानीपत गया। असलहों को अलीगढ़ तक पहुंचाने में सहयोग किया।


4-मो. शकील- असलहे ले जाने में इस्तेमाल की गई टाटा सूमो का मालिक था। अपनी सूमो लेकर आशिफ इकबाल के साथ कश्मीर के पूंछ मेंढर स्थित अकबर के घर गया। वहां कारी भी मौजूद था। घटना को अंजाम देने की पूरी साजिश यहीं रची गई। कारी ने मो. शकील को दो लाख 20 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद टाटा सूमो को लेकर श्रीनगर में अदनान के पास गया जहां कैविटी और बाक्स लगाए गए। असलहों की व्यवस्था करने और उनको अलीगढ़ तक पहुंचाने में पूरा सहयोग दिया।

5- मो: अजीज- आतंकियों द्वारा इस्तेमाल सिम को खरीदने में मदद का आरोप



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed