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दरोगा भर्ती में अनियमितता पर जवाब तलब
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दरोगा भर्ती में अनियमितता पर जवाब तलब
0 चयन परिणाम याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने सिविल पुलिस में उपनिरीक्षक और पीएसी प्लाटून कमांडर तथा फायर बिग्रेड की भर्ती में अनियमितता की शिकायत को लेकर दाखिल याचिका पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड को एक माह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
आशुतोष राय सहित 200 अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा सुनवाई कर रहे हैं। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर ने बहसद की। याचिका में कहा गया कि 2016 में पुलिस भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन निकाला था। लिखित परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक वाले अभ्यर्थियों को ही शारीरिक दक्षता परीक्षा में बुलाया जाना था। याचीगण भी शारीरिक दक्षता के लिए बुलाए गए। बाद में पुलिस बोर्ड ने उनको यह कहते हुए शामिल नहीं किया कि नार्मलाइजेशन(ऑन लाइन परीक्षा में असमानता को दूर करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया) प्रक्रिया में वह असफल पाए गए हैं। याचीगण का कहना है कि तमाम ऐसे अभ्यर्थियों को चयन में शामिल किया गया है, जिनके 50 प्रतिशत से कम अंक थे। भर्ती बोर्ड ने मनमाना तरीका अपनाया है, जिससे तमाम सफल अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। कोर्ट ने सरकार और भर्ती बोर्ड को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।
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दरोगा भर्ती में अनियमितता पर जवाब तलब
0 चयन परिणाम याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने सिविल पुलिस में उपनिरीक्षक और पीएसी प्लाटून कमांडर तथा फायर बिग्रेड की भर्ती में अनियमितता की शिकायत को लेकर दाखिल याचिका पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड को एक माह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
आशुतोष राय सहित 200 अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा सुनवाई कर रहे हैं। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर ने बहसद की। याचिका में कहा गया कि 2016 में पुलिस भर्ती बोर्ड ने विज्ञापन निकाला था। लिखित परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक वाले अभ्यर्थियों को ही शारीरिक दक्षता परीक्षा में बुलाया जाना था। याचीगण भी शारीरिक दक्षता के लिए बुलाए गए। बाद में पुलिस बोर्ड ने उनको यह कहते हुए शामिल नहीं किया कि नार्मलाइजेशन(ऑन लाइन परीक्षा में असमानता को दूर करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया) प्रक्रिया में वह असफल पाए गए हैं। याचीगण का कहना है कि तमाम ऐसे अभ्यर्थियों को चयन में शामिल किया गया है, जिनके 50 प्रतिशत से कम अंक थे। भर्ती बोर्ड ने मनमाना तरीका अपनाया है, जिससे तमाम सफल अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। कोर्ट ने सरकार और भर्ती बोर्ड को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।
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