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फूूलपुर में सपा देगी कड़ी टक्कर
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:22 AM IST
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फूलपुर संसदीय क्षेत्र में सपा देगी मजबूत टक्कर
0 क्षेत्र की नगर पंचायतों में पार्टी के हाथ लगी बाजी, पार्षदी में भी भाजपा से आगे
0 शहरी निकाय में है यह हाल, ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं अधिक मिलेगी चुनौती
अविनाशी श्रीवास्तव
इलाहाबाद।
अब फूलपुर संसदीय क्षेत्र के लिए उपचुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। जनवरी में चुनाव संभावित हैं, लेकिन नगर निकाय में भगवा परचम लहराने वाली भाजपा की राह उपचुनाव में उतनी आसान नहीं दिख रही। फूलपुर के अंतर्गत आने वाली नगर पंचायतों के चुनाव में सपा ने एकतरफा बढ़त बनाई तो पार्षदी के चुनाव में भी भाजपा से आगे रही। ऐसे में विपक्षी दलों की ओर से साझा उम्मीदवार पर सहमति बन गई तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।
फूलपुर लोकसभा के अंतर्गत शहर पश्चिमी, उत्तरी, फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इनके अंतर्गत आने वाले लालगोपालगंज, झूंसी, फूलपुर और मऊआइमा नगर पंचायत चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित हुए। इनमें भाजपा का हाथ खाली रहा, जबकि सपा ने फूलपुर और मऊआइमा में जीत हासिल की। वहीं झूंसी में दूसरे स्थान पर रही। इसके विपरीत भाजपा लालगोपालगंज और फूलपुर में सीधी टक्कर दे पाई। वहीं मेयर चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अभिलाषा गुप्ता नंदी ने ज्यादातर वार्ड में बढ़त बनाई, लेकिन पार्षदी में पार्टी प्रत्याशी पीछे रह गए। इसके अंतर्गत शहर उत्तरी में कुल 30 वार्ड शामिल हैं। इनमें 12 में सपा की जीत हुई है। वहीं नगर निगम के अंतर्गत शहर पश्चिमी में शामिल 22 में से छह पर सपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इस तरह से 52 में 18 पर सपा प्रत्याशी जीते। वहीं भाजपा के कुल 22 पार्षद नगर निगम सदन में पहुंचे हैं, जबकि इनमें शहर दक्षिणी के पार्षद भी शामिल हैं। इस तरह से पार्षदी के चुनाव में सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहा। सपा के वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि नगर निकाय चुनाव में भाजपा हमेशा से आगे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सपा मजबूत है। ऐसे में फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा के लिए उम्मीदें अधिक हैं।
जनवरी में संभावित है लोकसभा उपचुनाव
0 मार्च के मध्य तक फूलपुर के नए सांसद का चुनाव हो जाना चाहिए। यानी, उससे पहले उपचुनाव हो जाना चाहिए। इसके विपरीत यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी में घोषित हैं। सीबीएसई तथा अन्य बोर्ड की परीक्षाएं भी फरवरी और मार्च में होंगी। परीक्षाओं के दौरान चुनाव कराना मुश्किल होगा। ऐसे में फूलपुर लोकसभा उपचुनाव जनवरी में संभावित है। जल्द ही अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
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0 क्षेत्र की नगर पंचायतों में पार्टी के हाथ लगी बाजी, पार्षदी में भी भाजपा से आगे
0 शहरी निकाय में है यह हाल, ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं अधिक मिलेगी चुनौती
अविनाशी श्रीवास्तव
इलाहाबाद।
अब फूलपुर संसदीय क्षेत्र के लिए उपचुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। जनवरी में चुनाव संभावित हैं, लेकिन नगर निकाय में भगवा परचम लहराने वाली भाजपा की राह उपचुनाव में उतनी आसान नहीं दिख रही। फूलपुर के अंतर्गत आने वाली नगर पंचायतों के चुनाव में सपा ने एकतरफा बढ़त बनाई तो पार्षदी के चुनाव में भी भाजपा से आगे रही। ऐसे में विपक्षी दलों की ओर से साझा उम्मीदवार पर सहमति बन गई तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।
फूलपुर लोकसभा के अंतर्गत शहर पश्चिमी, उत्तरी, फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इनके अंतर्गत आने वाले लालगोपालगंज, झूंसी, फूलपुर और मऊआइमा नगर पंचायत चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित हुए। इनमें भाजपा का हाथ खाली रहा, जबकि सपा ने फूलपुर और मऊआइमा में जीत हासिल की। वहीं झूंसी में दूसरे स्थान पर रही। इसके विपरीत भाजपा लालगोपालगंज और फूलपुर में सीधी टक्कर दे पाई। वहीं मेयर चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अभिलाषा गुप्ता नंदी ने ज्यादातर वार्ड में बढ़त बनाई, लेकिन पार्षदी में पार्टी प्रत्याशी पीछे रह गए। इसके अंतर्गत शहर उत्तरी में कुल 30 वार्ड शामिल हैं। इनमें 12 में सपा की जीत हुई है। वहीं नगर निगम के अंतर्गत शहर पश्चिमी में शामिल 22 में से छह पर सपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इस तरह से 52 में 18 पर सपा प्रत्याशी जीते। वहीं भाजपा के कुल 22 पार्षद नगर निगम सदन में पहुंचे हैं, जबकि इनमें शहर दक्षिणी के पार्षद भी शामिल हैं। इस तरह से पार्षदी के चुनाव में सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहा। सपा के वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि नगर निकाय चुनाव में भाजपा हमेशा से आगे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सपा मजबूत है। ऐसे में फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा के लिए उम्मीदें अधिक हैं।
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जनवरी में संभावित है लोकसभा उपचुनाव
0 मार्च के मध्य तक फूलपुर के नए सांसद का चुनाव हो जाना चाहिए। यानी, उससे पहले उपचुनाव हो जाना चाहिए। इसके विपरीत यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी में घोषित हैं। सीबीएसई तथा अन्य बोर्ड की परीक्षाएं भी फरवरी और मार्च में होंगी। परीक्षाओं के दौरान चुनाव कराना मुश्किल होगा। ऐसे में फूलपुर लोकसभा उपचुनाव जनवरी में संभावित है। जल्द ही अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
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