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कोर्ट में गलत हलफनामा देने वाले दो अधिकारी निलंबित
Updated Fri, 17 Nov 2017 08:54 PM IST
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मथुरा में यमुना प्रदूषण
कोर्ट में गलत हलफनामा देने वाले दो अफसर निलंबित
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद की गई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
यमुना प्रदूषण पर कोर्ट में गलत हलफनामा देने पर मुख्य सचिव ने सहायक नगर आयुक्त और जल निगम के एक अभियंता को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई की जानकारी हाईकोर्ट में मुख्य सचिव के हलफनामे में दी गई। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भी उन अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए जिन्होंने गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस मामले पर 30 नवंबर को फिर से सुनवाई होगी।
महंत मधुमंगल दास शुक्ल की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति राजीव जोशी की पीठ ने पहले ही मुख्य सचिव को अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इन अधिकारियों ने कोर्ट मेें विरोधाभासी हलफनामा दाखिल कर कहा कि यमुना में सीवेज का पानी शोधन के बाद छोड़ा जा रहा है जबकि नगर निगम के हलफनामे में था कि दूषित पानी के शोधन की पर्याप्त क्षमता एसटीपी में नहीं है। कोर्ट ने इस विरोधाभास पर गहरी नाराजगी जताई थी।
कोर्ट ने यमुना में प्रदूषण की स्थिति की जांच अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। न्यायिक अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद पता चला कि मथुरा में उत्सर्जित दूषित जल के शोधन की क्षमता एसटीपी में नहीं है।
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कोर्ट में गलत हलफनामा देने वाले दो अफसर निलंबित
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद की गई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
यमुना प्रदूषण पर कोर्ट में गलत हलफनामा देने पर मुख्य सचिव ने सहायक नगर आयुक्त और जल निगम के एक अभियंता को निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई की जानकारी हाईकोर्ट में मुख्य सचिव के हलफनामे में दी गई। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भी उन अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए जिन्होंने गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस मामले पर 30 नवंबर को फिर से सुनवाई होगी।
महंत मधुमंगल दास शुक्ल की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति राजीव जोशी की पीठ ने पहले ही मुख्य सचिव को अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इन अधिकारियों ने कोर्ट मेें विरोधाभासी हलफनामा दाखिल कर कहा कि यमुना में सीवेज का पानी शोधन के बाद छोड़ा जा रहा है जबकि नगर निगम के हलफनामे में था कि दूषित पानी के शोधन की पर्याप्त क्षमता एसटीपी में नहीं है। कोर्ट ने इस विरोधाभास पर गहरी नाराजगी जताई थी।
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कोर्ट ने यमुना में प्रदूषण की स्थिति की जांच अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। न्यायिक अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद पता चला कि मथुरा में उत्सर्जित दूषित जल के शोधन की क्षमता एसटीपी में नहीं है।
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