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बिक्री होने वाले हर माल पर देनी होगी जीएसटी
Updated Thu, 06 Jul 2017 10:07 PM IST
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टैक्स की अलग-अलग दरों से खाता-बही तैयार करना मुश्किल
- अमर उजाला की चौपाल में व्यापारियों ने जीएसटी पर उठाए कई सवाल
- कहा, सरकार टैक्स का एक स्लैब बनाती तो न होती इतनी परेशानी
इलाहाबाद। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद व्यापारियों-कारोबारियों की व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को कपड़ा, ट्रांसपोर्ट, फुटवियर समेत अन्य उत्पादों का कारोबार करने वाले व्यापारियों की समस्याओं को जानने के लिए चौपाल लगाई तो कई सवाल खड़े हुए। चार्टर्ड एकाउंटेंट सुमित अग्रवाल ने उनकी समस्याओं का समाधान भी किया। चौक में मोहम्मद अली पार्क के सामने स्थित पालको स्टोर में अमर उजाला चौपाल में व्यापारियों ने सबसे अधिक परेशानी खाता-बही को तैयार करने में बताई। कहा कि टैक्स की पांच श्रेर्णियां होने से खाता-बही तैयार करना मुश्किल हो रहा है। अलग-अलग टैक्स स्लैब के हिसाब से खाता-बही तैयार करना बेहद कठिन काम है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोरा, मो. कादिर समेत कई व्यापारियों ने कहा कि दुनिया के दूसरे मुल्कों की तरह जीएसटी के अंतर्गत टैक्स का एक ही स्लैब होता तो खाता-बही तैयार करना आसान होता। हालांकि चार्टर्ड एकाउंटेंट ने बताया कि खाता-बही को टैक्स स्लैब के हिसाब से नहीं बल्कि सीजीएसटी, एसजीएसट, आईजीएसटी) के हिसाब से दुरुस्त रखना है। आईजीएसटी बाहर से मंगाए जाने वाले सामानों पर लगती है। टैक्स की अलग-अलग गणना करने से सहूलियत भी होती है। व्यापारियों ने कंप्यूटर न होने की समस्या उठाई तो बताया गया कि खाता-बही से ही सारा प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
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20 लाख से नीचे का कारोबार करने वालों को भी करना होगा रजिस्ट्रेशन
व्यापारियों ने जीएसटी के अंतर्गत 20 लाख रुपये सालान से कम के कारोबार करने वालों के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाही। सीए अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी के अंतर्गत 20 लाख से नीचे का कारोबार करने वालों को सामान्य तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने से छूट दी गई है लेकिन अगर कोई कारोबारी दूसरे राज्यों में माल बेचता है या रिवर्स चार्ज के अंतर्गत भुगतान करता है। जैसे-भाड़े का भुगतान, वकील की फीस आदि, तो उसे रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन की सामान्य प्रक्रिया है कि आवेदन करते समय पहले पार्ट ए को भरना होता है। पार्ट ए में पैन नंबर, मोबाइल और व्यापारी का ई-मेल आईडी वेरीफाई होता है, जिससे टीआरएन (टेंपरेरी रिफरेंस नंबर) उपलब्ध हो जाता है। इसके बाद पार्ट बी भरना होगा, जिसमें वांछित सूचनाएं वेबसाइट पर अपलोड करनी पड़ती हैं। वांछित सूचनाओं में जैसे-फोटो, बैंक स्टेटमेंट और व्यापार स्थल का प्रमाण अपलोड करने के बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
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पुराने मालों पर देना होगा जीएसटी
कपड़ा व्यापारी प्रकाश टंडन ने समस्या बताई कि उन्होंने मुंबई से माल मंगाया। पांच जुलाई को माल यहां पहुंचा, उस पर टैक्स की प्रक्रिया क्या होगी। गोदामों में रखा माल जीएसटी के दायरे में आएगा कि नहीं। सीए सुमित ने बताया कि आज की तारीख में बिकने वाले सभी माल पर जीएसटी के अंतर्गत टैक्स वसूला जाएगा। माल भले ही पुराना हो, उससे कोई छूट नहीं है। व्यापारी नेता सुहैल अहमद ने पूछा कि अगर कोई माल छोटे दुकानदारों को उधार दे दिया जाए और माल की बिक्री न हो तो ऐसी स्थिति में जीएसटी को भुगतान कौन करेगा। बताया गया कि ऐेसे माल की बिक्री के समय जीएसटी तो उधार देने वाले व्यापारी को देना होगा। माल वापस होने पर टैक्स वापस हो जाएगा।
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ई-वे बिल क्या है
व्यापारियों ने ई-वे बिल के बारे में भी जानकारी ली। सीएम सुमित ने बताया कि 50 हजार से ज्यादा के माल के मूवमेंट पर ऑनलाइन सूचना देनी जरूरी है। फिलहाल अभी इसे लागू नहीं किया गया है।
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चौपाल में हिस्सा लेने वाले व्यापारी
अमर उजाला की चौपाल में प्रयाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोरा, अभिषेक मित्तल, शानू यादव, फयाज अहमद, गुरुचरन अरोरा, मो. कादिर, अनिल कुशवाहा, प्रफुल्ल मित्तल, राजेश जायसवाल, सुहैल अहमद, जितेंद्र सिंह, मंजीत सिंह, रोहित अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
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- अमर उजाला की चौपाल में व्यापारियों ने जीएसटी पर उठाए कई सवाल
- कहा, सरकार टैक्स का एक स्लैब बनाती तो न होती इतनी परेशानी
इलाहाबाद। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद व्यापारियों-कारोबारियों की व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को कपड़ा, ट्रांसपोर्ट, फुटवियर समेत अन्य उत्पादों का कारोबार करने वाले व्यापारियों की समस्याओं को जानने के लिए चौपाल लगाई तो कई सवाल खड़े हुए। चार्टर्ड एकाउंटेंट सुमित अग्रवाल ने उनकी समस्याओं का समाधान भी किया। चौक में मोहम्मद अली पार्क के सामने स्थित पालको स्टोर में अमर उजाला चौपाल में व्यापारियों ने सबसे अधिक परेशानी खाता-बही को तैयार करने में बताई। कहा कि टैक्स की पांच श्रेर्णियां होने से खाता-बही तैयार करना मुश्किल हो रहा है। अलग-अलग टैक्स स्लैब के हिसाब से खाता-बही तैयार करना बेहद कठिन काम है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोरा, मो. कादिर समेत कई व्यापारियों ने कहा कि दुनिया के दूसरे मुल्कों की तरह जीएसटी के अंतर्गत टैक्स का एक ही स्लैब होता तो खाता-बही तैयार करना आसान होता। हालांकि चार्टर्ड एकाउंटेंट ने बताया कि खाता-बही को टैक्स स्लैब के हिसाब से नहीं बल्कि सीजीएसटी, एसजीएसट, आईजीएसटी) के हिसाब से दुरुस्त रखना है। आईजीएसटी बाहर से मंगाए जाने वाले सामानों पर लगती है। टैक्स की अलग-अलग गणना करने से सहूलियत भी होती है। व्यापारियों ने कंप्यूटर न होने की समस्या उठाई तो बताया गया कि खाता-बही से ही सारा प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
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20 लाख से नीचे का कारोबार करने वालों को भी करना होगा रजिस्ट्रेशन
व्यापारियों ने जीएसटी के अंतर्गत 20 लाख रुपये सालान से कम के कारोबार करने वालों के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाही। सीए अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी के अंतर्गत 20 लाख से नीचे का कारोबार करने वालों को सामान्य तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने से छूट दी गई है लेकिन अगर कोई कारोबारी दूसरे राज्यों में माल बेचता है या रिवर्स चार्ज के अंतर्गत भुगतान करता है। जैसे-भाड़े का भुगतान, वकील की फीस आदि, तो उसे रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन की सामान्य प्रक्रिया है कि आवेदन करते समय पहले पार्ट ए को भरना होता है। पार्ट ए में पैन नंबर, मोबाइल और व्यापारी का ई-मेल आईडी वेरीफाई होता है, जिससे टीआरएन (टेंपरेरी रिफरेंस नंबर) उपलब्ध हो जाता है। इसके बाद पार्ट बी भरना होगा, जिसमें वांछित सूचनाएं वेबसाइट पर अपलोड करनी पड़ती हैं। वांछित सूचनाओं में जैसे-फोटो, बैंक स्टेटमेंट और व्यापार स्थल का प्रमाण अपलोड करने के बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
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पुराने मालों पर देना होगा जीएसटी
कपड़ा व्यापारी प्रकाश टंडन ने समस्या बताई कि उन्होंने मुंबई से माल मंगाया। पांच जुलाई को माल यहां पहुंचा, उस पर टैक्स की प्रक्रिया क्या होगी। गोदामों में रखा माल जीएसटी के दायरे में आएगा कि नहीं। सीए सुमित ने बताया कि आज की तारीख में बिकने वाले सभी माल पर जीएसटी के अंतर्गत टैक्स वसूला जाएगा। माल भले ही पुराना हो, उससे कोई छूट नहीं है। व्यापारी नेता सुहैल अहमद ने पूछा कि अगर कोई माल छोटे दुकानदारों को उधार दे दिया जाए और माल की बिक्री न हो तो ऐसी स्थिति में जीएसटी को भुगतान कौन करेगा। बताया गया कि ऐेसे माल की बिक्री के समय जीएसटी तो उधार देने वाले व्यापारी को देना होगा। माल वापस होने पर टैक्स वापस हो जाएगा।
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ई-वे बिल क्या है
व्यापारियों ने ई-वे बिल के बारे में भी जानकारी ली। सीएम सुमित ने बताया कि 50 हजार से ज्यादा के माल के मूवमेंट पर ऑनलाइन सूचना देनी जरूरी है। फिलहाल अभी इसे लागू नहीं किया गया है।
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चौपाल में हिस्सा लेने वाले व्यापारी
अमर उजाला की चौपाल में प्रयाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विजय अरोरा, अभिषेक मित्तल, शानू यादव, फयाज अहमद, गुरुचरन अरोरा, मो. कादिर, अनिल कुशवाहा, प्रफुल्ल मित्तल, राजेश जायसवाल, सुहैल अहमद, जितेंद्र सिंह, मंजीत सिंह, रोहित अरोड़ा आदि मौजूद रहे।