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कम नहीं हुई वकीलों की नाराजगी, हड़ताल जारी
Updated Fri, 21 Jul 2017 09:14 PM IST
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कम नहीं हुई वकीलों की नाराजगी, हड़ताल जारी
0 जज के व्यवहार से नाराज वकीलों ने नहीं किया काम
0 वकीलों को नहीं करने दिया प्रवेश, 24 को भी हड़ताल
0 मामला सुलझाने के लिए तीन जजों की कमेटी बनी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश के व्यवहार से नाराज वकील शुक्रवार को पूरी तरह से हड़ताल पर रहे। वकीलों ने गेट पर आम सभा कर सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए, जिससे अधिवक्ता कोर्ट परिसर में भी नहीं पहुंच सके। आम सभा में इस मामले का समाधान होने तक आगे भी हड़ताल जारी रखने की घोषणा की गई। वकील 24 जुलाई सोमवार को भी काम नहीं करेंगे। उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने तीन सीनियर जजों की एक कमेटी बना दी है जो वकीलों से वार्ता कर समस्या का हल निकालने की कोशिश करेगी।
तय कार्यक्रम के तहत अधिवक्ता सुबह नौ बजे गेट संख्या तीन पर जमा हो गए। बाकी के गेट से कोई वकील प्रवेश न कर सके इसलिए सभी प्रवेश द्वारा पर पहरा बैठा दिया गया। कुछ वकीलों ने भीतर प्रवेश करने की कोशिश की तो उनको रोक दिया गया। आम सभा में वकीलों ने जज के व्यवहार की निंदा की। तय किया गया कि यदि उनके प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई नहीं होती है और उक्त न्यायमूर्ति का किसी दूसरे प्रदेश के हाईकोर्ट में स्थानांतरण नहीं किया जाता है तो वकील आगे भी हड़ताल जारी रखेंगे। इस पर निर्णय 24 जुलाई की मीटिंग में होगा। आम सभा को हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी, महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय सहित अन्य अधिवक्ताओं ने संबोधित किया।
आम सभा में तय किया गया कि 24 जुलाई सोमवार को भी अधिवक्ता हड़ताल पर रहेंगे और गेट संख्या तीन पर आम सभा होगी। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए पूर्व अध्यक्षों और पूर्व सचिवों की एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है। बार के अध्यक्ष कमेटी के चेयरमैन और सचिव इसके संयोजक होंगे। सभा में कहा गया कि 20 जुलाई को उक्त कोर्ट में अधिकांश मुकदमों में वकीलों की गैरहाजिरी में आदेश पारित किए गए।
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आम सभा में यह भी मांग की गई कि उक्त न्यायमूर्ति का स्थानांतरण होने तक उनको कोई भी न्यायिक कार्य आवंटित न किया जाए। इस प्रस्ताव की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को भी भेजने का निर्णय निर्णय लिया गया है।
अवध बार को भी भेजा जाएगा प्रस्ताव
आम सभा में निर्णय लिया गया कि इस प्रस्ताव की प्रति अवध बार एसोसिएशन को भेजकर उनसे भी सहयोग मांगा जाएगा। अवध बार के अध्यक्ष और सचिव से यहां आने का अनुरोध किया जाएगा।
25 वकीलों को सदस्यता समाप्त करने का नोटिस
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने हड़ताल के प्रस्ताव का उल्लंघन कर काम करने की कोशिश करने वाले 25 वकीलों को नोटिस भेजा है। इनसे पूछा गया है कि क्यों न उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए। अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि आम सभा ने निर्णय लिया है कि भविष्य में प्रस्ताव का उल्लंघन करने वालों की सदस्यता बिना नोटिस के समाप्त कर दी जाए।
सभी ने रखे अपने विचार
आम सभा की बैठक में तमाम अधिवक्ताओं को अपने विचार रखने का मौका दिया गया इसमें पूर्व पदाधिकारी भी शामिल थे। आम सभा में वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद त्रिपाठी, पंकज उपाध्याय, उदय शंकर तिवारी, शशि शेखर तिवारी, राहुल पांडेय, अमित कुमार, अजय मिश्र, आलोक कुमार शुक्ला, सारिका शर्मा, विंदेश्वरी प्रसाद, आराधना सिंह, असलम अली, अर्चना जादौन, विक्रम बहादुर, अनुराग मिश्र के अलावा पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा, राकेश पांडेय बबुआ, सीपी उपाध्याय, प्रभाश्ंाकर मिश्र, अतुल पांडेय, एके ओझा, सुरेंद्र नाथ मिश्र, श्यामाचरण त्रिपाठी, संतोष सिंह समेत तमाम अधिवक्ता शामिल थे।
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कम नहीं हुई वकीलों की नाराजगी, हड़ताल जारी
0 जज के व्यवहार से नाराज वकीलों ने नहीं किया काम
0 वकीलों को नहीं करने दिया प्रवेश, 24 को भी हड़ताल
0 मामला सुलझाने के लिए तीन जजों की कमेटी बनी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश के व्यवहार से नाराज वकील शुक्रवार को पूरी तरह से हड़ताल पर रहे। वकीलों ने गेट पर आम सभा कर सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए, जिससे अधिवक्ता कोर्ट परिसर में भी नहीं पहुंच सके। आम सभा में इस मामले का समाधान होने तक आगे भी हड़ताल जारी रखने की घोषणा की गई। वकील 24 जुलाई सोमवार को भी काम नहीं करेंगे। उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने तीन सीनियर जजों की एक कमेटी बना दी है जो वकीलों से वार्ता कर समस्या का हल निकालने की कोशिश करेगी।
तय कार्यक्रम के तहत अधिवक्ता सुबह नौ बजे गेट संख्या तीन पर जमा हो गए। बाकी के गेट से कोई वकील प्रवेश न कर सके इसलिए सभी प्रवेश द्वारा पर पहरा बैठा दिया गया। कुछ वकीलों ने भीतर प्रवेश करने की कोशिश की तो उनको रोक दिया गया। आम सभा में वकीलों ने जज के व्यवहार की निंदा की। तय किया गया कि यदि उनके प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई नहीं होती है और उक्त न्यायमूर्ति का किसी दूसरे प्रदेश के हाईकोर्ट में स्थानांतरण नहीं किया जाता है तो वकील आगे भी हड़ताल जारी रखेंगे। इस पर निर्णय 24 जुलाई की मीटिंग में होगा। आम सभा को हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी, महासचिव सुरेश चंद्र पांडेय सहित अन्य अधिवक्ताओं ने संबोधित किया।
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आम सभा में तय किया गया कि 24 जुलाई सोमवार को भी अधिवक्ता हड़ताल पर रहेंगे और गेट संख्या तीन पर आम सभा होगी। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए पूर्व अध्यक्षों और पूर्व सचिवों की एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है। बार के अध्यक्ष कमेटी के चेयरमैन और सचिव इसके संयोजक होंगे। सभा में कहा गया कि 20 जुलाई को उक्त कोर्ट में अधिकांश मुकदमों में वकीलों की गैरहाजिरी में आदेश पारित किए गए।
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आम सभा में यह भी मांग की गई कि उक्त न्यायमूर्ति का स्थानांतरण होने तक उनको कोई भी न्यायिक कार्य आवंटित न किया जाए। इस प्रस्ताव की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को भी भेजने का निर्णय निर्णय लिया गया है।
अवध बार को भी भेजा जाएगा प्रस्ताव
आम सभा में निर्णय लिया गया कि इस प्रस्ताव की प्रति अवध बार एसोसिएशन को भेजकर उनसे भी सहयोग मांगा जाएगा। अवध बार के अध्यक्ष और सचिव से यहां आने का अनुरोध किया जाएगा।
25 वकीलों को सदस्यता समाप्त करने का नोटिस
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने हड़ताल के प्रस्ताव का उल्लंघन कर काम करने की कोशिश करने वाले 25 वकीलों को नोटिस भेजा है। इनसे पूछा गया है कि क्यों न उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए। अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि आम सभा ने निर्णय लिया है कि भविष्य में प्रस्ताव का उल्लंघन करने वालों की सदस्यता बिना नोटिस के समाप्त कर दी जाए।
सभी ने रखे अपने विचार
आम सभा की बैठक में तमाम अधिवक्ताओं को अपने विचार रखने का मौका दिया गया इसमें पूर्व पदाधिकारी भी शामिल थे। आम सभा में वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद त्रिपाठी, पंकज उपाध्याय, उदय शंकर तिवारी, शशि शेखर तिवारी, राहुल पांडेय, अमित कुमार, अजय मिश्र, आलोक कुमार शुक्ला, सारिका शर्मा, विंदेश्वरी प्रसाद, आराधना सिंह, असलम अली, अर्चना जादौन, विक्रम बहादुर, अनुराग मिश्र के अलावा पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा, राकेश पांडेय बबुआ, सीपी उपाध्याय, प्रभाश्ंाकर मिश्र, अतुल पांडेय, एके ओझा, सुरेंद्र नाथ मिश्र, श्यामाचरण त्रिपाठी, संतोष सिंह समेत तमाम अधिवक्ता शामिल थे।